BSE ODISHA CLASS 9 • UTKAL MASTER STROKE

ବୋର୍ଡ ଅଫ୍ ସେକେଣ୍ଡାରୀ ଏଜୁକେସନ୍ (BSE Odisha) — ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଧ୍ୟାୟ ମାଷ୍ଟର ନୋଟ୍ସ

ଶ୍ରେଣୀ: Class 9 | ବିଷୟ: Hindi Grammer

ଅଧ୍ୟାୟ: Class9 HindiGram Ch06 Ch06 Ling


୧. ଅଧ୍ୟାୟର ସାରାଂଶ ଓ ମାଇଣ୍ଡ ମ୍ୟାପ୍ (Mind Map & Conceptual Architecture)


ଅଧ୍ୟାୟର ସାରାଂଶ (Summary of the Chapter):

यह अध्याय हिंदी व्याकरण में 'लिंग' (Gender) की अवधारणा पर केंद्रित है। संज्ञाओं में परिवर्तन के तीन मुख्य कारणों में से एक लिंग है। लिंग का अर्थ है 'चिह्न' जिससे किसी शब्द की जाति (स्त्री या पुरुष) का बोध होता है। हिंदी में केवल दो ही लिंग होते हैं - पुंलिंग (Masculine) और स्त्रीलिंग (Feminine)। चेतन (मनुष्य, प्राणी) और अचेतन (वस्तु, भाव) सभी को इन दो वर्गों में वर्गीकृत किया जाता है।

अध्याय में लिंग निर्णय के विभिन्न आधारों को विस्तार से समझाया गया है:

१. मानव वर्ग और मानवेतर प्राणियों का लिंग निर्णय: कुछ प्राणियों का लिंग स्पष्ट करने के लिए 'नर' या 'मादा' शब्द का प्रयोग किया जाता है।

२. शब्द वर्ग के आधार पर लिंग निर्णय: शरीर के अंग, भोजन, फल, रत्न, धातु, शस्य, ग्रह, वर्ण, जल-स्थल, द्रव पदार्थ और वृक्ष जैसे विभिन्न वर्गों के शब्दों को पुंलिंग या स्त्रीलिंग में वर्गीकृत किया गया है, साथ ही उनके अपवाद भी दिए गए हैं।

३. शब्दान्त मात्रा (प्रत्यय) के आधार पर लिंग निर्णय: शब्दों के अंत में आने वाले विभिन्न प्रत्ययों के आधार पर लिंग का निर्धारण किया जाता है, जैसे 'अ', 'अन', 'आ', 'ई', 'इमा', 'ता' आदि। इसमें भी कई अपवाद शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त, अध्याय में पुंलिंग शब्दों को स्त्रीलिंग में बदलने के लिए विभिन्न 'स्त्री प्रत्ययों' (suffixes) के नियमों को विस्तार से बताया गया है। ये नियम 'आ', 'ई', 'इया', 'इन', 'नी', 'आनी', 'इका', 'इनी', 'आइन', 'वती/मती' जैसे प्रत्ययों के प्रयोग पर आधारित हैं। कुछ ऐसे शब्द भी हैं जिनके पुंलिंग और स्त्रीलिंग रूप पूरी तरह से भिन्न होते हैं, या जिनमें 'नर'/'मादा' शब्द जोड़कर लिंग स्पष्ट किया जाता है।

यह अध्याय छात्रों को हिंदी शब्दों के लिंग को पहचानने और उनका सही प्रयोग करने में मदद करता है, जो सही वाक्य रचना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

ମାଇଣ୍ଡ ମ୍ୟାପ୍ (Conceptual Mind Map):

```

संज्ञा में परिवर्तन

├── लिंग (Gender)

│ ├── अर्थ: जाति का बोध कराने वाला चिह्न

│ ├── प्रकार:

│ │ ├── पुंलिंग (Masculine)

│ │ └── स्त्रीलिंग (Feminine)

│ └── लिंग निर्णय के आधार:

│ ├── १. मानव वर्ग एवं मानवेतर प्राणी

│ │ ├── स्पष्ट (पुरुष-स्त्री, हाथी-हथिनी)

│ │ └── 'नर'/'मादा' जोड़कर (नर कौआ-मादा कौआ)

│ ├── २. शब्द वर्ग के आधार पर

│ │ ├── पुंलिंग वर्ग (शरीर, भोजन, फल, रत्न, धातु, शस्य, ग्रह, वर्ण, जल-स्थल, द्रव, वृक्ष) + अपवाद

│ │ └── स्त्रीलिंग वर्ग (नदी, नक्षत्र, भाषा, तिथि, दुकान-सामग्री) + अपवाद

│ └── ३. शब्दान्त मात्रा (प्रत्यय) के आधार पर

│ ├── पुंलिंग अंत (अ, अन, आस, आर, आय, ख, ज, त, त्य, त्व, त्र, न, व, य, आ, आन, आव, आवा, आर, ना, आब, खाना, न, दान, पन, पा) + अपवाद

│ └── स्त्रीलिंग अंत (आ, इ, इमा, उ, ता, ति, ना, नि, या, सा, अन, आ, ईर, ईल, आई, ई, इया, ऊ, ख, त, श, स, वट, हट, ह) + अपवाद

└── लिंग परिवर्तन के नियम (स्त्री प्रत्यय)

├── १. 'आ' जोड़कर (वृद्ध → वृद्धा)

├── २. 'ई' जोड़कर (देव → देवी)

├── ३. आकारांत में 'ई' जोड़कर (लड़का → लड़की)

├── ४. 'इया' जोड़कर (कुत्ता → कुतिया)

├── ५. 'इन' जोड़कर (बाघ → बाघिन)

├── ६. 'नी' जोड़कर (मोर → मोरनी)

├── ७. 'आनी' जोड़कर (देवर → देवरानी)

├── ८. 'अक' को 'इका' बनाकर (पाठक → पाठिका)

├── ९. 'ई' को 'इनी' बनाकर (तपस्वी → तपस्विनी)

├── १०. 'आइन' जोड़कर (लाला → ललाइन)

├── ११. 'वान/मान' को 'वती/मती' बनाकर (धनवान → धनवती)

├── १२. कुछ स्त्रीलिंग शब्दों में प्रत्यय लगाकर पुंलिंग बनाना (ननद → ननदोई)

├── १३. 'नर'/'मादा' शब्द जोड़कर (नर कोयल → मादा कोयल)

└── १४. अलग-अलग शब्दों का व्यवहार (पिता → माता)

```


୨. ମୁଖ୍ୟ ବିଷୟବସ୍ତୁ, ସିଦ୍ଧାନ୍ତ ଓ ଗାଣିତିକ ସୂତ୍ରାବଳୀ (Comprehensive Theory & Formulas)


संज्ञा का परिवर्तन या विकार

संज्ञाओं में परिवर्तन तीन कारणों से होता है:

(i) लिंग के कारण

(ii) वचन के कारण

(iii) कारक के कारण

लिंग (Gender)

१. लिंग का अर्थ:

लिंग का अर्थ है चिह्न। जिस चिह्न से जाति के होने का बोध होता है, उसे लिंग कहते हैं। कोई शब्द स्त्री जाति अथवा पुरुष जाति के होते हैं। हिंदी में दो ही लिंग हैं - पुंलिंग और स्त्रीलिंग। हिंदी में चेतन (मानव या मानवेतर), अचेतन (वस्तु या भाव) सभी को दो वर्गों में बाँट दिया जाता है, अर्थात् उन्हें पुंलिंग या स्त्रीलिंग में रखा जाता है।

२. लिंग निर्णय के नियम:

२.१. मानव वर्ग के लिंग निर्णय:

मानव वर्ग के लिंग निर्णय में कठिनाई नहीं होती, क्योंकि वे स्वाभाविक रूप से पुरुष या स्त्री होते हैं।

  • पुंलिंग: पुरुष, धोबी, बाप, बेटा, नाना, फूफा, नेता, दाता
  • स्त्रीलिंग: स्त्री, धोबिन, माँ, बेटी, नानी, फूफी, नेत्री, दात्री
  • २.२. मानवेतर प्राणियों के लिंग निर्णय:

    कुछ मानवेतर प्राणियों का लिंग-निर्णय करना भी आसान है।

  • पुंलिंग: हाथी, बकरा, शेर, बाघ, बैल, साँड़, भैंसा, भेड़ा, ऊँट
  • स्त्रीलिंग: हथिनी, बकरी, शेरनी, बाघिन, गाय, भैंस, भेड़, ऊँटनी
  • २.३. कुछ प्राणी जो केवल पुंलिंग या केवल स्त्रीलिंग में प्रयुक्त होते हैं:

    मानवेतर प्राणियों में कुछ ऐसे प्राणी हैं, जो केवल पुंलिंग या केवल स्त्रीलिंग में ही प्रयुक्त होते हैं।

  • केवल पुंलिंग: कौआ, मच्छर, पक्षी, तोता, नेवला, बाज, केंचुआ
  • केवल स्त्रीलिंग: कोयल, मक्खी, चिड़िया, मैना, गिलहरी, चील, जोंक
  • इन शब्दों का लिंग स्पष्ट करने के लिए नर या मादा शब्द जोड़ा जाता है, जैसे - नर कौआ - मादा कौआ। नर कोयल - मादा कोयल।

    अतएव हिंदी के प्रत्येक शब्द का लिंग जानना जरूरी है।

    २.४. लिंग निर्णय के विविध आधार:

    लिंग निर्णय के विविध आधार होते हैं -

    (i) शब्द वर्ग के आधार पर

    (ii) शब्दान्त मात्रा के आधार पर

    २.४.१. शब्द वर्ग के आधार पर पुंलिंग:

    (क) शरीर वर्ग: ओंठ, कान, बाल, नाखून, खून, हाथ, पाँव, दाँत

  • अपवाद: आँख, नाक, जीभ, पीठ, जाँघ, नस, कोहनी, हड्डी (ये स्त्रीलिंग हैं)
  • (ख) भोजन वर्ग: लड्डू, समोसा, पकौड़ा, पेठा, पेड़ा, रसगुल्ला, भात

  • अपवाद: दाल, रोटी, पूड़ी, चपाती, सब्जी, खीर, कचौड़ी, जलेबी, रसमलाई, खिचड़ी, तरकारी (ये स्त्रीलिंग हैं)
  • (ग) फल वर्ग: आम, पपीता, खरबूजा, सेव, संतरा, केला, अंगूर

  • अपवाद: लीची, नारंगी, ककड़ी, नाशपाती (ये स्त्रीलिंग हैं)
  • (घ) रत्न वर्ग: मोती, माणिक, पन्ना, हीरा, जवाहिर, मूँगा, नीलम, पुखराज

  • अपवाद: मणि (यह स्त्रीलिंग है)
  • (ङ) धातु वर्ग: ताँबा, लोहा, सोना, सीसा, काँसा, पीतल, टीन, राँगा

  • अपवाद: चाँदी (यह स्त्रीलिंग है)
  • (च) शस्य वर्ग: जौ, चावल, गेहूँ, बाजरा, धान, चना, तिल

  • अपवाद: मकई, जुआर, मूँग, अरहर, खेसारी (ये स्त्रीलिंग हैं)
  • (छ) ग्रह वर्ग: सूर्य, चन्द्रमा, शुक्र, मंगल, शनि, वृहस्पति

  • अपवाद: पृथ्वी (यह स्त्रीलिंग है)
  • (ज) वर्ण वर्ग: अ, आ, उ, ऊ

  • अपवाद: इ, ई, ऋ (ये स्त्रीलिंग हैं)
  • (झ) जल-स्थल वर्ग: पहाड़, पर्वत, रेगिस्तान, द्वीप, समुद्र, सरोवर, हिमालय

  • अपवाद: तराई, घाटी, नदी, पहाड़ी, झील (ये स्त्रीलिंग हैं)
  • (ञ) द्रव पदार्थ वर्ग: शरबत, घी, तेल, जल, पानी, दूध, दही, मट्ठा

  • अपवाद: चाय, कॉफी, छाछ, स्याही, शराब (ये स्त्रीलिंग हैं)
  • (ट) वृक्ष वर्ग: आम, कटहल, देवदार, बरगद, चीड़, शीशम, सागौन, अशोक

  • अपवाद: खिरनी, इमली, मौलसिरी (ये स्त्रीलिंग हैं)
  • २.४.२. शब्द वर्ग के आधार पर स्त्रीलिंग:

    (क) नदी वर्ग: गंगा, यमुना, महानदी, ऋषिकुल्या, झेलम, राबी

  • अपवाद: सोन, सिंधु, ब्रह्मपुत्र (ये पुंलिंग हैं)
  • (ख) नक्षत्र वर्ग: अश्विनी, रोहिणी, विशाखा, पूर्वाषाढ़ा

    (ग) भाषा वर्ग: ओड़िआ, हिन्दी, संस्कृत, उर्दू, अंग्रेजी

    (घ) तिथि वर्ग: तृतीया, अमावस्या, पूर्णिमा

    (ङ) दुकान-सामग्री वर्ग: इलायची, लौंग, सुपारी, हल्दी, हींग

  • अपवाद: तेजपात, कपूर, मसाला, धनिया, जीरा, नमक (ये पुंलिंग हैं)
  • २.४.३. शब्दान्त मात्रा के आधार पर पुंलिंग:

  • अ, अन, आस, आर, आय, ख, ज, त, त्य, त्व, त्र, न, व, य से अन्त होनेवाले तत्सम शब्द; जैसे - त्याग, क्रोध, दोष, वचन, साधन, विकास, ह्रास, विकार, संसार, उपाय, अध्याय, मुख, शंख, सरोज, पंकज, गीत, स्वागत, नृत्य, साहित्य, सतीत्व, महत्त्व, नेत्र, पवित्र, प्रश्न, पालन, गौरव, लाघव, कार्य, धैर्य
  • अपवाद: विजय, विद्युत, आय (ये स्त्रीलिंग हैं)
  • आ, आन, आव, आवा, आर, ना (क्रियार्थक संज्ञाएँ), आब, खाना, न, दान, पन, पा से अन्त होने वाले हिन्दी / उर्दू शब्द; जैसे - झगड़ा, लगान, मिलान, बहाव, चढ़ाव, बढ़ावा, भुलावा, इनकार, पढ़ना, आना, हिसाब, गुलाब, डाकखाना, जेलखाना, खत, फूलदान, पीकदान, बचपन, कालापन, बुढ़ापा, पुजापा
  • अपवाद: उड़ान, पहचान, किताब, शराब, दुकान, सरकार (ये स्त्रीलिंग हैं)
  • २.४.४. शब्दान्त मात्रा के आधार पर स्त्रीलिंग:

  • आ, इ, इमा, उ, ता, ति, ना, नि, या, सा से अन्त होनेवाले तत्सम शब्द; जैसे - पूजा, प्रतिमा, छवि, विधि, गरिमा, महिमा, मृत्यु, ऋतु, स्वतंत्रता, साधुता, गति, रीति, रचना, प्रार्थना, हानि, ग्लानि, विद्या, क्रिया, मीमांसा, जिज्ञासा
  • अन, आ, ईर, ईल, आई, ई, इया, ऊ, ख, त, श, स, वट, हट, ह से अन्त होनेवाले हिन्दी / उर्दू शब्द; जैसे - जलन, सूजन, दवा, दुनिया, जागीर, तस्वीर, तामील, तहसील, पढ़ाई, कटाई, गरीबी, बीमारी, खटिया, गुड़िया, झाडू, बालू, चीख, भूख, इज्जत, कीमत, कोशिश, बारिश, प्यास, सजावट, लिखावट, चिकनाहट, चिल्लाहट, सलाह, सुबह
  • अपवाद: होश, चालचलन, ताश, दस्तखत, वक्त, माह, गुनाह (ये पुंलिंग हैं)
  • ३. लिंग परिवर्त्तन के नियम (स्त्री प्रत्यय):

    पुंलिंग शब्दों को स्त्रीलिंग में परिवर्तन करने के लिए जो प्रत्यय लगते हैं, उन्हें स्त्री प्रत्यय कहते हैं। ऐसे भी कुछ शब्द हैं जिनके पुंलिंग रूप तथा स्त्रीलिंग रूप पूरी तरह अलग अलग होते हैं।

    ३.१. अकारांत शब्दों में 'आ' जोड़कर:

    पुंलिंग स्त्रीलिंग पुंलिंग स्त्रीलिंग
    वृद्ध वृद्धा सुत सुता
    प्रिय प्रिया प्रियतम प्रियतमा
    शिष्य शिष्या तनय तनया
    कनिष्ठ कनिष्ठा छात्र छात्रा

    ३.२. अकारांत शब्दों में 'ई' जोड़कर:

    पुंलिंग स्त्रीलिंग पुंलिंग स्त्रीलिंग
    देव देवी हंस हंसी
    पुत्र पुत्री हिरन हिरनी
    कुमार कुमारी ब्राह्मण ब्राह्मणी
    दास दासी मेंढक मेंढकी

    ३.३. आकारांत शब्दों में 'ई' जोड़कर:

    पुंलिंग स्त्रीलिंग पुंलिंग स्त्रीलिंग
    लड़का लड़की बकरा बकरी
    दादा दादी भतीजा भतीजी
    बेटा बेटी बूढ़ा बूढ़ी
    घोड़ा घोड़ी मामा मामी

    ३.४. अकारांत शब्दों में 'इया' जोड़कर:

    पुंलिंग स्त्रीलिंग पुंलिंग स्त्रीलिंग
    कुत्ता कुतिया गुड्डा गुड़िया
    बूढ़ा बुढ़िया बन्दर बन्दरिया
    बेटा बिटिया बाछा बछिया
    चूहा चुहिया लोटा लुटिया

    ३.५. कुछ प्राणिवाचक और व्यवसायवाचक शब्दों में 'इन' जोड़कर:

    पुंलिंग स्त्रीलिंग पुंलिंग स्त्रीलिंग
    बाघ बाघिन नाई नाइन
    साँप साँपिन तेली तेलिन
    नाग नागिन धोबी धोबिन
    सुनार सुनारिन नाती नातिन

    ३.६. कुछ प्राणिवाचक शब्दों में 'नी' जोड़कर:

    पुंलिंग स्त्रीलिंग पुंलिंग स्त्रीलिंग
    मोर मोरनी हाथी हथिनी
    शेर शेरनी सिंह सिंहनी
    ऊँट ऊँटनी जाट जाटनी
    स्यार स्यारनी गरीब गरीबनी

    ३.७. कुछ प्राणिवाचक शब्दों में 'आनी' जोड़कर:

    पुंलिंग स्त्रीलिंग पुंलिंग स्त्रीलिंग
    देवर देवरानी नौकर नौकरानी
    जेठ जेठानी सेठ सेठानी
    चौधरी चौधरानी मेहतर मेहतरानी

    ३.८. शब्दान्त 'अक' को 'इका' बनाकर:

    पुंलिंग स्त्रीलिंग पुंलिंग स्त्रीलिंग
    पाठक पाठिका सेवक सेविका
    बालक बालिका अध्यापक अध्यापिका
    लेखक लेखिका नायक नायिका
    कारक कारिका पाचक पाचिका

    ३.९. शब्दान्त 'ई' को 'इनी' बनाकर:

    पुंलिंग स्त्रीलिंग
    तपस्वी तपस्विनी
    स्वामी स्वामिनी

    ३.१०. शब्दान्त में 'आइन' जोड़कर:

    पुंलिंग स्त्रीलिंग
    लाला ललाइन
    ठाकुर ठकुराइन

    ३.११. शब्दान्त वान/मान को वती/मती बनाकर:

    पुंलिंग स्त्रीलिंग पुंलिंग स्त्रीलिंग
    धनवान धनवती श्रीमान श्रीमती
    ज्ञानवान ज्ञानवती शक्तिमान शक्तिमती
    बलवान बलवती आयुष्मान आयुष्मती
    भाग्यवान भाग्यवती बुद्धिमान बुद्धिमती

    ३.१२. पुंलिंग बनाने के लिए कुछ स्त्रीलिंग शब्दों में प्रत्यय लगाकर (या भिन्न शब्द):

    पुंलिंग स्त्रीलिंग पुंलिंग स्त्रीलिंग
    ननदोई ननद भेड़ा भेड़
    बहनोई बहन भैंसा भैंस

    ३.१३. कुछ शब्दों में 'नर' और 'मादा' शब्द जोड़कर:

    पुंलिंग स्त्रीलिंग
    नर कोयल मादा कोयल
    नर गिलहरी मादा गिलहरी
    नर कौआ मादा कौआ
    नर खरगोश मादा खरगोश

    ३.१४. पुंलिंग और स्त्रीलिंग के लिए अलग-अलग शब्दों का व्यवहार:

    पुंलिंग स्त्रीलिंग पुंलिंग स्त्रीलिंग
    पिता माता युवक युवती
    भाई बहन / भाभी वर वधू
    मर्द/आदमी औरत बैल/साँड़ गाय
    राजा रानी साहब मेम
    बाप माँ नर मादा
    ससुर सास पुत्र कन्या
    पति पत्नी बादशाह बेगम
    पुरुष स्त्री दाता दात्री
    विद्वान विदुषी कवि कवयित्री
    सम्राट सम्राज्ञी भ्राता भ्राग्नि
    विधुर विधवा जनक जननी


    ୩. ପାଠ୍ୟପୁସ୍ତକ ଅଭ୍ୟାସ ପ୍ରଶ୍ନାବଳୀର ୧୦୦% ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସମାଧାନ (100% Complete Solved Exercises)


    अभ्यास

    Q1. नीचे लिखे वाक्यों की रेखांकित संज्ञाओं के लिंग बताइए:

    (i) आसमान में बादल घिर आये।

  • उत्तर: बादल - पुंलिंग
  • (ii) दूर का पहाड़ सुन्दर लगता है।

  • उत्तर: पहाड़ - पुंलिंग
  • (iii) मेरी परीक्षा पन्द्रह दिन सरक गयी है।

  • उत्तर: परीक्षा - स्त्रीलिंग
  • (iv) आपके घर की छत से पानी रिसता है।

  • उत्तर: पानी - पुंलिंग
  • (v) मैंने उसकी सुन्दरता की सराहना की।

  • उत्तर: सुन्दरता - स्त्रीलिंग
  • (vi) हम देश की इज्जत की रक्षा करेंगे।

  • उत्तर: इज्जत - स्त्रीलिंग
  • (vii) आज दाल थोड़ी सी पतली हो गयी है।

  • उत्तर: दाल - स्त्रीलिंग
  • (viii) आपको शराब नहीं पीनी चाहिए।

  • उत्तर: शराब - स्त्रीलिंग
  • (ix) उसे लज्जा नहीं आती।

  • उत्तर: लज्जा - स्त्रीलिंग
  • (x) दूध से दही बनता है।

  • उत्तर: दूध - पुंलिंग, दही - पुंलिंग
  • Q2. ध्यान दीजिए कि क्रिया पदों का लिंग कर्म के स्थान पर आई संज्ञा के अनुसार है। निम्न सारणी के शब्दों से सही वाक्य बनाइए:

    कर्ता कर्म क्रिया
    मोहन ने साबुन खरीदा।
    बहेलिए ने बाण चलाया।
    राजू ने किताब खरीदी।
    गोपाल ने साइकिल चलायी।
    उसने मेज बनायी।
    आपने चित्र बनाया।
    सीता ने कलम खो दी।
    गीता ने रबड़ खो दिया।
    उसमें धैर्य नहीं था।
    उसमें शक्ति नहीं थी।

    उत्तर:

  • मोहन ने साबुन खरीदा।
  • बहेलिए ने बाण चलाया।
  • राजू ने किताब खरीदी।
  • गोपाल ने साइकिल चलायी।
  • उसने मेज बनायी।
  • आपने चित्र बनाया।
  • सीता ने कलम खो दी।
  • गीता ने रबड़ खो दिया।
  • उसमें धैर्य नहीं था।
  • उसमें शक्ति नहीं थी।
  • Q3. नीचे लिखी गयी संज्ञाओं के पहले विशेषण अच्छा या अच्छी का उचित प्रयोग कीजिए:

  • हिन्दी, घड़ी, इमारत, नौकरी, दया, परदा, गाड़ी, झाडू, प्रथा, नतीजा, दुकान
  • उत्तर:

  • अच्छी हिन्दी
  • अच्छी घड़ी
  • अच्छी इमारत
  • अच्छी नौकरी
  • अच्छी दया
  • अच्छा परदा
  • अच्छी गाड़ी
  • अच्छी झाडू
  • अच्छी प्रथा
  • अच्छा नतीजा
  • अच्छी दुकान
  • Q4. निम्नलिखित शब्दों के लिंग बदलिए:

  • बेटी, भगवान, स्त्री, पुत्र, घोड़ा, मनुष्य, साँप, बच्चा, युवक, छात्र
  • उत्तर:

  • बेटी - बेटा
  • भगवान - भगवती
  • स्त्री - पुरुष
  • पुत्र - पुत्री
  • घोड़ा - घोड़ी
  • मनुष्य - मानवी (या स्त्री)
  • साँप - साँपिन
  • बच्चा - बच्ची
  • युवक - युवती
  • छात्र - छात्रा
  • Q5. निम्नलिखित शब्दों के लिंग बताइए:

  • आँख, शरीर, इज्जत, कहानी, बात, झगड़ा, भीख, तलवार, खेत, नौकरी
  • उत्तर:

  • आँख - स्त्रीलिंग
  • शरीर - पुंलिंग
  • इज्जत - स्त्रीलिंग
  • कहानी - स्त्रीलिंग
  • बात - स्त्रीलिंग
  • झगड़ा - पुंलिंग
  • भीख - स्त्रीलिंग
  • तलवार - स्त्रीलिंग
  • खेत - पुंलिंग
  • नौकरी - स्त्रीलिंग
  • Q6. आप अपनी पाठ्यपुस्तक से कुछ अप्राणिवाचक शब्द चुनिए और उनके लिंग जानिए।

    उत्तर:

  • पुस्तक - स्त्रीलिंग
  • किताब - स्त्रीलिंग
  • जल - पुंलिंग
  • पवन - पुंलिंग
  • शहर - पुंलिंग
  • दाल - स्त्रीलिंग
  • बिजली - स्त्रीलिंग
  • हवा - स्त्रीलिंग
  • नहर - स्त्रीलिंग
  • बात - स्त्रीलिंग
  • पेड़ - पुंलिंग
  • नदी - स्त्रीलिंग
  • Q7. देखिए मज़ा

    यह खंड विभिन्न शब्दों और उनके लिंग को दर्शाता है। यहाँ दिए गए शब्दों का लिंग इस प्रकार है:

    शब्द लिंग शब्द लिंग
    ग्रन्थ पुंलिंग पुस्तक स्त्रीलिंग
    जल पुंलिंग किताब स्त्रीलिंग
    मेघ पुंलिंग धानी स्त्रीलिंग
    पानी पुंलिंग हवा स्त्रीलिंग
    पवन पुंलिंग नहर स्त्रीलिंग
    शहर पुंलिंग दाल स्त्रीलिंग
    थाल पुंलिंग बिजली स्त्रीलिंग
    सरौता पुंलिंग इमली स्त्रीलिंग
    आरा पुंलिंग सरिता स्त्रीलिंग
    पर्वत पुंलिंग नदी स्त्रीलिंग
    पहाड़ पुंलिंग धारा स्त्रीलिंग
    वन पुंलिंग गेंद स्त्रीलिंग
    गोंद पुंलिंग गौ स्त्रीलिंग
    बल्ला पुंलिंग कोयल स्त्रीलिंग
    जौ पुंलिंग कमीज स्त्रीलिंग
    कौआ पुंलिंग साड़ी स्त्रीलिंग
    कुर्ता पुंलिंग आत्मा स्त्रीलिंग
    लहंगा पुंलिंग बात स्त्रीलिंग
    परमात्मा पुंलिंग
    भात पुंलिंग

    पाठ्य विषयों से ऐसे शब्द छाँटिए और उनका लिंग जानिए।

    (यह प्रश्न Q6 के समान है, कुछ अतिरिक्त उदाहरण दिए जा सकते हैं)

  • विज्ञान - पुंलिंग
  • इतिहास - पुंलिंग
  • भूगोल - पुंलिंग
  • भाषा - स्त्रीलिंग
  • गणित - स्त्रीलिंग
  • परीक्षा - स्त्रीलिंग
  • ज्ञान - पुंलिंग
  • शिक्षा - स्त्रीलिंग
  • समय - पुंलिंग
  • पुस्तक - स्त्रीलिंग
  • Q8. निम्नलिखित शब्दों के पुंलिंग रूप लिखिए:

  • धोबिन, मालिन, नौकरानी, डाक्टरानी, मास्टरानी, देवरानी, बालिका, औरत, सास, नानी, दादी, पुत्री, शिष्या, बच्ची, माता, शेरनी, मोरनी, भैंस, भेड़, बकरी, मुर्गी, चाची, बहिन, भानजी, ऊँटनी, मालकिन, सम्राज्ञी, सेठानी, मेहतरानी, श्रीमती, विदुषी, तपस्विनी, बेगम, पत्नी, भाभी, वधू, गुणवती, स्वामिनी, सेविका, लेखिका, गायिका, अध्यापिका, पाठिका, नायिका, ननद, कवयित्री, बाघिन, भिखारिन, भगवती, युवती, देवी, मानवी, राक्षसी
  • उत्तर:

  • धोबिन - धोबी
  • मालिन - माली
  • नौकरानी - नौकर
  • डाक्टरानी - डाक्टर
  • मास्टरानी - मास्टर
  • देवरानी - देवर
  • बालिका - बालक
  • औरत - मर्द / आदमी
  • सास - ससुर
  • नानी - नाना
  • दादी - दादा
  • पुत्री - पुत्र
  • शिष्या - शिष्य
  • बच्ची - बच्चा
  • माता - पिता
  • शेरनी - शेर
  • मोरनी - मोर
  • भैंस - भैंसा
  • भेड़ - भेड़ा
  • बकरी - बकरा
  • मुर्गी - मुर्गा
  • चाची - चाचा
  • बहिन - भाई
  • भानजी - भानजा
  • ऊँटनी - ऊँट
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  • ୪. ବୋର୍ଡ ପରୀକ୍ଷା ମାଷ୍ଟ୍ରି ଟିପ୍ସ ଓ ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ (Board Exam Tips & Pitfalls)


    ବୋର୍ଡ ପରୀକ୍ଷା ମାଷ୍ଟ୍ରି ଟିପ୍ସ (Board Exam Mastery Tips):

    ୧. नियमित अभ्यास: लिंग-संबंधी नियमों को याद रखने का सबसे अच्छा तरीका नियमित अभ्यास है। पाठ्यपुस्तक में दिए गए उदाहरणों और अभ्यासों को बार-बार हल करें।

    ୨. शब्दों को संदर्भ में समझें: केवल शब्द के अंत को देखकर लिंग का अनुमान न लगाएँ। वाक्य में उसके प्रयोग (क्रिया और विशेषण के साथ) को देखें। जैसे, 'पानी' शब्द 'ई' से समाप्त होता है, लेकिन यह पुंलिंग है क्योंकि हम 'पानी बहता है' कहते हैं, 'पानी बहती है' नहीं।

    ୩. अपवादों पर विशेष ध्यान: हिंदी में लिंग निर्णय के कई अपवाद हैं। इन अपवादों को एक अलग सूची बनाकर याद करें। उदाहरण के लिए, शरीर के अंगों में 'आँख, नाक, जीभ' स्त्रीलिंग हैं, जबकि अधिकांश पुंलिंग हैं।

    ୪. प्रत्ययों को पहचानें: लिंग परिवर्तन के नियमों में दिए गए प्रत्ययों (जैसे -आ, -ई, -इया, -इन, -नी, -आनी, -इका, -इनी, -आइन, -वती/मती) को अच्छी तरह समझें और उनसे बनने वाले शब्दों का अभ्यास करें।

    ୫. 'नर' और 'मादा' का प्रयोग: उन प्राणियों के लिए जहाँ लिंग स्पष्ट नहीं होता, 'नर' या 'मादा' शब्द जोड़कर लिंग स्पष्ट करने का अभ्यास करें।

    ୬. अलग-अलग शब्दों वाले लिंग-युग्म: 'पिता-माता', 'राजा-रानी' जैसे पूरी तरह से भिन्न शब्दों वाले लिंग-युग्मों को कंठस्थ करें।

    ୭. वाक्य प्रयोग द्वारा पुष्टि: यदि किसी शब्द के लिंग को लेकर संदेह हो, तो उसे एक सरल वाक्य में प्रयोग करके देखें। क्रिया या विशेषण का रूप देखकर लिंग का पता चल जाएगा (जैसे 'दीवार ऊँची है' - स्त्रीलिंग, 'पेड़ ऊँचा है' - पुंलिंग)।

    ୮. पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र हल करें: बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए लिंग-संबंधी प्रश्नों को हल करने से आपको महत्वपूर्ण शब्दों और पैटर्न की जानकारी मिलेगी।

    ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ (Common Pitfalls):

    ୧. ध्वनि के आधार पर गलत अनुमान: छात्र अक्सर शब्द की अंतिम ध्वनि के आधार पर लिंग का अनुमान लगा लेते हैं, जो हमेशा सही नहीं होता। उदाहरण के लिए, 'दही' 'ई' से समाप्त होता है, लेकिन यह पुंलिंग है।

    ୨. अपवादों को अनदेखा करना: नियमों के अपवादों को याद न रखना एक बड़ी गलती है। 'चाँदी' (धातु) स्त्रीलिंग है, जबकि अन्य धातुएँ पुंलिंग हैं। 'पृथ्वी' (ग्रह) स्त्रीलिंग है, जबकि अन्य ग्रह पुंलिंग हैं।

    ୩. क्रिया और विशेषण के साथ असंगति: लिंग की गलती के कारण वाक्य में क्रिया और विशेषण का गलत प्रयोग करना। जैसे 'मेरी किताब अच्छा है' (गलत) के बजाय 'मेरी किताब अच्छी है' (सही)।

    ୪. 'नर'/'मादा' का गलत प्रयोग: जिन शब्दों का लिंग 'नर' या 'मादा' लगाकर स्पष्ट किया जाता है, उनमें सीधे प्रत्यय लगाकर लिंग बदलने की कोशिश करना।

    ୫. रटने पर अत्यधिक निर्भरता: केवल रटने से बचें। नियमों को समझें और फिर अभ्यास करें। समझ के साथ रटना अधिक प्रभावी होता है।

    ୬. संज्ञा के साथ क्रिया का लिंग न मिलाना: हिंदी में क्रिया का लिंग कर्ता या कर्म के लिंग के अनुसार बदलता है। यदि कर्म सजीव हो तो क्रिया का लिंग कर्म के अनुसार होता है। इस नियम की अनदेखी करने से गलतियाँ होती हैं।

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    (ନୋଟ୍ସ ପ୍ରସ୍ତୁତି: ଉତ୍କଳ ସ୍କିଲ୍ ସେଣ୍ଟର - BSE Odisha 100% Full Textbook Master Edition)

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