ବୋର୍ଡ ଅଫ୍ ସେକେଣ୍ଡାରୀ ଏଜୁକେସନ୍ (BSE Odisha) — ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଧ୍ୟାୟ ମାଷ୍ଟର ନୋଟ୍ସ
ଶ୍ରେଣୀ: Class 9 | ବିଷୟ: Hindi Grammer
ଅଧ୍ୟାୟ: Class9 HindiGram Ch08 Ch08 Karak
୧. ଅଧ୍ୟାୟର ସାରାଂଶ ଓ ମାଇଣ୍ଡ ମ୍ୟାପ୍ (Mind Map & Conceptual Architecture)
ଅଧ୍ୟାୟର ସାରାଂଶ (Deep Summary):
ଏହି ଅଧ୍ୟାୟରେ ହିନ୍ଦୀ ବ୍ୟାକରଣର ଏକ ଅତ୍ୟନ୍ତ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଂଶ 'କାରକ' ବିଷୟରେ ବିସ୍ତୃତ ଭାବରେ ଆଲୋଚନା କରାଯାଇଛି। କାରକ ଶବ୍ଦର ଅର୍ଥ ହେଉଛି ବାକ୍ୟରେ ଥିବା ପଦମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଥିବା ସମ୍ବନ୍ଧ। ଅର୍ଥାତ୍, କୌଣସି ବାକ୍ୟରେ ଗୋଟିଏ ପଦର ଅନ୍ୟ ପଦମାନଙ୍କ ସହିତ, ବିଶେଷ କରି କ୍ରିୟା ସହିତ, ଯେଉଁ ସମ୍ବନ୍ଧ ଥାଏ ତାହାକୁ କାରକ କୁହାଯାଏ। ଏହି ସମ୍ବନ୍ଧକୁ ଚିହ୍ନିବା ପାଇଁ ଯେଉଁ ଶବ୍ଦାଂଶ ବ୍ୟବହାର କରାଯାଏ, ତାହାକୁ 'କାରକ-ଚିହ୍ନ' ବା 'ପରସର୍ଗ' କୁହାଯାଏ। ହିନ୍ଦୀରେ ମୁଖ୍ୟତଃ ଆଠ ପ୍ରକାରର କାରକ ରହିଛି: କର୍ତ୍ତା, କର୍ମ, କରଣ, ସମ୍ପ୍ରଦାନ, ଅପାଦାନ, ସମ୍ବନ୍ଧ, ଅଧିକରଣ ଏବଂ ସମ୍ବୋଧନ। ପ୍ରତ୍ୟେକ କାରକର ନିଜସ୍ୱ କାରକ-ଚିହ୍ନ ଥାଏ, ଯାହା ସାଧାରଣତଃ ସଂଜ୍ଞା ବା ସର୍ବନାମ ଶବ୍ଦ ପରେ ଆସେ, କେବଳ ସମ୍ବୋଧନ କାରକରେ ଏହା ଶବ୍ଦ ପୂର୍ବରୁ ଆସିଥାଏ। ଏହି ଅଧ୍ୟାୟରେ ପ୍ରତ୍ୟେକ କାରକର ସଂଜ୍ଞା, କାରକ-ଚିହ୍ନ ଏବଂ ଉଦାହରଣ ସହିତ ବିସ୍ତୃତ ବର୍ଣ୍ଣନା କରାଯାଇଛି। ଏହା ସହିତ, ସଂଜ୍ଞା ଶବ୍ଦଗୁଡ଼ିକର ଲିଙ୍ଗ, ବଚନ ଏବଂ କାରକ ଅନୁସାରେ କିପରି ରୂପ ପରିବର୍ତ୍ତନ ହୁଏ (ରୂପାବଳୀ) ତାହା ମଧ୍ୟ ଉଦାହରଣ ସହିତ ବୁଝାଯାଇଛି।
ମାଇଣ୍ଡ ମ୍ୟାପ୍ (Conceptual Architecture):
କାରକ (Karak)
1. କର୍ତ୍ତା କାରକ (कर्ता कारक):
2. କର୍ମ କାରକ (कर्म कारक):
3. କରଣ କାରକ (करण कारक):
4. ସମ୍ପ୍ରଦାନ କାରକ (सम्प्रदान कारक):
5. ଅପାଦାନ କାରକ (अपादान कारक):
6. ସମ୍ବନ୍ଧ କାରକ (सम्बन्ध कारक):
7. ଅଧିକରଣ କାରକ (अधिकरण कारक):
8. ସମ୍ବୋଧନ କାରକ (सम्बोधन कारक):
୨. ମୁଖ୍ୟ ବିଷୟବସ୍ତୁ, ସିଦ୍ଧାନ୍ତ ଓ ଗାଣିତିକ ସୂତ୍ରାବଳୀ (Comprehensive Theory & Formulas)
(iii) कारक
वाक्य में आये पद के साथ अन्य पदों का जो संबंध होता है, या भिन्न-भिन्न पदों के बीच जो आपसी संबंध होता है - उस संबंध को कारक कहते हैं। कारक को पहचानने के लिए जिन शब्दांशों का प्रयोग किया जाता है उन्हें कारक-चिह्न या परसर्ग कहते हैं। ऐसे संबंधों की दृष्टि से हिन्दी में आठ कारक माने जाते हैं; वे हैं – कर्त्ता, कर्म, करण, संप्रदान, अपादान, सम्बन्ध, अधिकरण और सम्बोधन। प्रत्येक कारक के अलग-अलग कारक चिह्न हैं। ये चिह्न संज्ञा या सर्वनाम शब्दों के बाद आते हैं। अतः इन्हें परसर्ग भी कहते हैं। केवल सम्बोधन कारक में ये चिह्न शब्द के पहले आते हैं।
कारक के नाम एवं कारक-चिह्न
| कारकों के नाम | कारक-चिह्न |
|---|---|
| १. कर्त्ता | ने, ∅ |
| २. कर्म | को, ∅ |
| ३. करण | से, के द्वारा |
| ४. सम्प्रदान | को, के लिए, के निमित्त |
| ५. अपादान | से |
| ६. सम्बन्ध | का, के, की / रा, रे, री / ना, ने, नी |
| ७. अधिकरण | में, पर, को |
| ८. सम्बोधन | हे, अरे, ओ, जी, ए, हलो |
१. कर्त्ता कारक: वाक्य में जिस पद के द्वारा क्रिया का सम्पादन होता है, उसे कर्त्ता कहते हैं; जैसे -
२. कर्म कारक: जिस संज्ञा या सर्वनाम पर क्रिया-व्यापार का फल या प्रभाव पड़ता है, वह कर्म कारक होता है; जैसे -
(कर्म दो प्रकार के होते हैं -
(i) मुख्य कर्म (अप्राणिवाचक कर्म)
(ii) गौण कर्म (प्राणिवाचक कर्म))
३. करण कारक: जिस संज्ञा या सर्वनाम पद से क्रिया के साधन का बोध होता है, उसे करण कारक कहते हैं; जैसे -
४. सम्प्रदान कारक: जिसे कुछ दिया जाय या जिसके लिए कुछ किया जाय, उसे सम्प्रदान कारक कहते हैं; जैसे -
५. अपादान कारक: जिस संज्ञा या सर्वनाम से क्रिया व्यापार के अलग होने का बोध होता है, उसे अपादान कारक कहते हैं; जैसे -
६. सम्बन्ध कारक: जिस संज्ञा या सर्वनाम से उसका संबंध क्रिया से भिन्न किसी दूसरे शब्द (संज्ञा / सर्वनाम) के साथ सूचित होता है, उसे संबंध कारक कहते हैं; जैसे -
७. अधिकरण कारक: जिस संज्ञा या सर्वनाम से क्रिया-व्यापार के आधार का बोध होता है, उसे अधिकरण कारक कहते हैं; जैसे -
८. सम्बोधन कारक: जिस संज्ञा से किसी को पुकारने का बोध होता है, उसे सम्बोधन कारक कहते हैं; जैसे -
संज्ञाओं की रूपावली
लिंग, वचन, कारक के आधार पर संज्ञा शब्दों के चार वर्ग बनते हैं – अकारांत पुंलिंग, आकारांत पुंलिग, अकारांत स्त्रीलिंग, इकारांत स्त्रीलिंग। नीचे संज्ञाओं की रूपावली के कुछ उदाहरण दिये गये हैं –
अकारांत पुंलिंग 'बालक'
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | बालक / बालक ने | बालक / बालकों ने |
| कर्म | बालक को | बालकों को |
| करण | बालक से/के द्वारा | बालकों से / के द्वारा |
| संप्रदान | बालक को/के लिए | बालकों को / के लिए |
| अपादान | बालक से | बालकों से |
| सम्बन्ध | बालक का/के/की | बालकों का / के / की |
| अधिकरण | बालक में / पर | बालकों में / पर |
| सम्बोधन | हे बालक ! | हे बालको ! |
(ध्यान देने की बात यह है कि दीर्घ ई / ऊ कारांत शब्द को बहुवचन बनाते समय दीर्घ स्वर ह्रस्व इ/उ में बदल जाते हैं। इ/ई कारांत का बहुवचनांत प्रत्यय 'ओं' की जगह 'यों' हो जाता है; जैसे - हाथी ने - हाथियों ने, भालू ने - भालुओं ने)
आकारांत पुंलिंग 'लड़का'
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | लड़का / लड़के ने | लड़के/लड़कों ने |
| कर्म | लड़के को | लड़कों को |
| करण | लड़के से/लड़के के द्वारा | लड़कों से/लड़कों के द्वारा |
| संप्रदान | लड़के को/लड़के के लिए | लड़कों कों / लड़कों के लिए |
| अपादान | लड़के से | लड़कों से |
| सम्बन्ध | लड़के का / के / की | लड़कों का / के / की |
| अधिकरण | लड़के में/लड़के पर | लड़कों में / लड़कों पर |
| सम्बोधन | हे लड़के ! | हे लड़को ! |
अकारांत स्त्रीलिंग 'बहन'
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | बहन / बहन ने | बहनें / बहनों ने |
| कर्म | बहन को | बहनों को |
| करण | बहन से / के द्वारा | बहनों से / के द्वारा |
| संप्रदान | बहन को / के लिए | बहनों को / के लिए |
| अपादान | बहन से | बहनों से |
| सम्बन्ध | बहन का / के / की | बहनों का / के / की |
| अधिकरण | बहन में / पर | बहनों में / पर |
| सम्बोधन | हे बहन ! | हे बहनो ! |
आकारांत (बालिका, माता), उकारंत (धेनु, धातु), ऊकारांत (बहू), औकारांत (गौ) जैसे स्त्रीलिंग शब्दों की रूपावली 'बहन' की रूपावली की तरह होती है। दीर्घ ऊकारांत स्त्रीलिंग शब्दों को बहुवचन बनाते समय दीर्घ ऊकार ह्रस्व उ कार में बदल जाता है।
इकारांत स्त्रीलिंग 'जाति'
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | जाति / जाति ने | जातियाँ / जातियों ने |
| कर्म | जाति को | जातियों को |
| करण | जाति से / के द्वारा | जातियों से / के द्वारा |
| संप्रदान | जाति को / के लिए | जातियों को / के लिए |
| अपादान | जाति से | जातियों से |
| सम्बन्ध | जाति का / के / की | जातियों का / के / की |
| अधिकरण | जाति में / पर | जातियों में / पर |
| सम्बोधन | हे जाति ! | हे जातियो ! |
ईकारांत (नदी, लड़की) तथा 'या' में अंत होने वाले (बुढ़िया, गुड़िया) स्त्रीलिंग शब्दों की रूपावली 'जाति' की रूपावली की तरह ही होती है। दीर्घ ईकारांत स्त्रीलिंग शब्दों को बहुवचन बनाते समय दीर्घ ईकार ह्रस्व 'इ' कार में बदल जाता है।
୩. ପାଠ୍ୟପୁସ୍ତକ ଅଭ୍ୟାସ ପ୍ରଶ୍ନାବଳୀର ୧୦୦% ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସମାଧାନ (100% Complete Solved Exercises)
ଅଭ୍ୟାସ (अभ्यास)
Q1. निम्नलिखित तालिका से सही वाक्य बनाइए –
Q2. निम्नलिखित तालिका से सही वाक्य बनाइए –
Q3. निम्नलिखित क्रियाओं में से अकर्मक और सकर्मक क्रियाओं को छाँटकर सामान्य भूतकाल में एक एक वाक्य बनाइए –
(खाना, पढ़ना, दौड़ना, लिखना, कूदना, आना, देखना, पीना, सुनना, तैरना)
Q4. नीचे दी गयी तालिका से सही वाक्य बनाइए –
(क)
(ख)
(ग)
Q5. नीचे दी गयी तालिका से सही वाक्य बनाइए –
(क)
(ख)
Q6. नीचे दी गयी तालिका से सही वाक्य बनाइए –
(क)
(ख)
(ग)
(घ)
Q7. नीचे दी गयी तालिका से सही वाक्य बनाइए –
(क)
(ख)
Q8. सही परसर्ग लगाकर वाक्यों के रिक्त स्थान भरिए –
(i) बगीचे में बहुत फूल खिले हैं।
(ii) मुझ पर भरोसा रखो।
(iii) माँ ने शिशु को दूध पिलाया।
(iv) गोपाल को तेजी से काम करना पड़ेगा।
(v) रोगी से चला नहीं जाता।
(vi) तुम ने उस को क्यों पीटा?
(vii) वह ट्रेन के लोगों को देख रहा है।
(viii) तालाब में मछलियाँ तैरती हैं।
(ix) शहीदों को सलामी दी गयी।
(x) मोहन की बहन नाचती है।
(xi) हरीश का भाई नवीं कक्षा में पढ़ता है।
(xii) आप के कमरे बन्द हैं।
Q9. खाली जगहों पर का / के / की का प्रयोग कीजिए –
(i) रजनी की चंद्रिका
(ii) परम पिता की इच्छा
(iii) इस की चमक
(iv) रक्त की प्यास
(v) महिलाओं के कमरे
(vi) प्राणों की रक्षा
(vii) डोलियों का ताँता
(viii) उन का हृदय
(ix) दया का पात्र
(x) गुरु का उपदेश
रूपावली अभ्यास (Page 11)
Q1. निम्नलिखित शब्दो की रूपावली सभी कारकों और दोनों बचनों में लिखिए –
(नौकर, पुस्तक, बालिका, घोड़ा, पति, भाई, नदी, शिशु, बहू, गौ)
१. नौकर (अकारांत पुंलिंग)
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | नौकर / नौकर ने | नौकर / नौकरों ने |
| कर्म | नौकर को | नौकरों को |
| करण | नौकर से/के द्वारा | नौकरों से / के द्वारा |
| संप्रदान | नौकर को/के लिए | नौकरों को / के लिए |
| अपादान | नौकर से | नौकरों से |
| सम्बन्ध | नौकर का/के/की | नौकरों का / के / की |
| अधिकरण | नौकर में / पर | नौकरों में / पर |
| सम्बोधन | हे नौकर ! | हे नौकरो ! |
२. पुस्तक (अकारांत स्त्रीलिंग)
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | पुस्तक / पुस्तक ने | पुस्तकें / पुस्तकों ने |
| कर्म | पुस्तक को | पुस्तकों को |
| करण | पुस्तक से/के द्वारा | पुस्तकों से / के द्वारा |
| संप्रदान | पुस्तक को/के लिए | पुस्तकों को / के लिए |
| अपादान | पुस्तक से | पुस्तकों से |
| सम्बन्ध | पुस्तक का/के/की | पुस्तकों का / के / की |
| अधिकरण | पुस्तक में / पर | पुस्तकों में / पर |
| सम्बोधन | हे पुस्तक ! | हे पुस्तकों ! |
३. बालिका (आकारांत स्त्रीलिंग)
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | बालिका / बालिका ने | बालिकाएँ / बालिकाओं ने |
| कर्म | बालिका को | बालिकाओं को |
| करण | बालिका से/के द्वारा | बालिकाओं से / के द्वारा |
| संप्रदान | बालिका को/के लिए | बालिकाओं को / के लिए |
| अपादान | बालिका से | बालिकाओं से |
| सम्बन्ध | बालिका का/के/की | बालिकाओं का / के / की |
| अधिकरण | बालिका में / पर | बालिकाओं में / पर |
| सम्बोधन | हे बालिका ! | हे बालिकाओ ! |
४. घोड़ा (आकारांत पुंलिंग)
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | घोड़ा / घोड़े ने | घोड़े / घोड़ों ने |
| कर्म | घोड़े को | घोड़ों को |
| करण | घोड़े से/घोड़े के द्वारा | घोड़ों से/घोड़ों के द्वारा |
| संप्रदान | घोड़े को/घोड़े के लिए | घोड़ों को / घोड़ों के लिए |
| अपादान | घोड़े से | घोड़ों से |
| सम्बन्ध | घोड़े का / के / की | घोड़ों का / के / की |
| अधिकरण | घोड़े में/घोड़े पर | घोड़ों में / घोड़ों पर |
| सम्बोधन | हे घोड़े ! | हे घोड़ो ! |
५. पति (इकारांत पुंलिंग)
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | पति / पति ने | पति / पतियों ने |
| कर्म | पति को | पतियों को |
| करण | पति से/के द्वारा | पतियों से / के द्वारा |
| संप्रदान | पति को/के लिए | पतियों को / के लिए |
| अपादान | पति से | पतियों से |
| सम्बन्ध | पति का/के/की | पतियों का / के / की |
| अधिकरण | पति में / पर | पतियों में / पर |
| सम्बोधन | हे पति ! | हे पतियों ! |
६. भाई (ईकारांत पुंलिंग)
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | भाई / भाई ने | भाई / भाइयों ने |
| कर्म | भाई को | भाइयों को |
| करण | भाई से/के द्वारा | भाइयों से / के द्वारा |
| संप्रदान | भाई को/के लिए | भाइयों को / के लिए |
| अपादान | भाई से | भाइयों से |
| सम्बन्ध | भाई का/के/की | भाइयों का / के / की |
| अधिकरण | भाई में / पर | भाइयों में / पर |
| सम्बोधन | हे भाई ! | हे भाइयो ! |
७. नदी (ईकारांत स्त्रीलिंग)
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | नदी / नदी ने | नदियाँ / नदियों ने |
| कर्म | नदी को | नदियों को |
| करण | नदी से/के द्वारा | नदियों से / के द्वारा |
| संप्रदान | नदी को/के लिए | नदियों को / के लिए |
| अपादान | नदी से | नदियों से |
| सम्बन्ध | नदी का/के/की | नदियों का / के / की |
| अधिकरण | नदी में / पर | नदियों में / पर |
| सम्बोधन | हे नदी ! | हे नदियो ! |
८. शिशु (उकारांत पुंलिंग)
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | शिशु / शिशु ने | शिशु / शिशुओं ने |
| कर्म | शिशु को | शिशुओं को |
| करण | शिशु से/के द्वारा | शिशुओं से / के द्वारा |
| संप्रदान | शिशु को/के लिए | शिशुओं को / के लिए |
| अपादान | शिशु से | शिशुओं से |
| सम्बन्ध | शिशु का/के/की | शिशुओं का / के / की |
| अधिकरण | शिशु में / पर | शिशुओं में / पर |
| सम्बोधन | हे शिशु ! | हे शिशुओं ! |
९. बहू (ऊकारांत स्त्रीलिंग)
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | बहू / बहू ने | बहुएँ / बहुओं ने |
| कर्म | बहू को | बहुओं को |
| करण | बहू से/के द्वारा | बहुओं से / के द्वारा |
| संप्रदान | बहू को/के लिए | बहुओं को / के लिए |
| अपादान | बहू से | बहुओं से |
| सम्बन्ध | बहू का/के/की | बहुओं का / के / की |
| अधिकरण | बहू में / पर | बहुओं में / पर |
| सम्बोधन | हे बहू ! | हे बहुओ ! |
१०. गौ (औकारांत स्त्रीलिंग)
| कारक | एकवचन | बहुवचन |
|---|---|---|
| कर्त्ता | गौ / गौ ने | गौएँ / गौओं ने |
| कर्म | गौ को | गौओं को |
| करण | गौ से/के द्वारा | गौओं से / के द्वारा |
| संप्रदान | गौ को/के लिए | गौओं को / के लिए |
| अपादान | गौ से | गौओं से |
| सम्बन्ध | गौ का/के/की | गौओं का / के / की |
| अधिकरण | गौ में / पर | गौओं में / पर |
| सम्बोधन | हे गौ ! | हे गौओ ! |
Q2. निम्नलिखित शब्द किस कारक और किस वचन में हैं, लिखिए –
୪. ବୋର୍ଡ ପରୀକ୍ଷା ମାଷ୍ଟ୍ରି ଟିପ୍ସ ଓ ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ (Board Exam Tips & Pitfalls)
ବୋର୍ଡ ପରୀକ୍ଷା ମାଷ୍ଟ୍ରି ଟିପ୍ସ (Board Exam Mastery Tips):
୧. ସଂଜ୍ଞା ଓ ପରସର୍ଗ ମନେରଖନ୍ତୁ: ପ୍ରତ୍ୟେକ କାରକର ସଂଜ୍ଞା ଏବଂ ତାହାର ନିର୍ଦ୍ଦିଷ୍ଟ କାରକ-ଚିହ୍ନ (ପରସର୍ଗ) ଗୁଡ଼ିକୁ ଭଲ ଭାବରେ ମନେରଖନ୍ତୁ। ଏହା କାରକ ଚିହ୍ନିବାରେ ସାହାଯ୍ୟ କରିବ।
୨. କାରକର କାର୍ଯ୍ୟ ବୁଝନ୍ତୁ: କେବଳ ଚିହ୍ନ ମନେରଖିବା ପରିବର୍ତ୍ତେ, ପ୍ରତ୍ୟେକ କାରକର ମୂଳ କାର୍ଯ୍ୟ (ଯଥା: କର୍ତ୍ତା - କ୍ରିୟା କରୁଥିବା, କର୍ମ - କ୍ରିୟାର ଫଳ ଭୋଗୁଥିବା, କରଣ - କ୍ରିୟାର ସାଧନ) କୁ ବୁଝିବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କରନ୍ତୁ।
୩. 'ସେ' ପରସର୍ଗର ବ୍ୟବହାର: 'ସେ' ପରସର୍ଗ କରଣ (ସାଧନ) ଏବଂ ଅପାଦାନ (ଅଲଗା ହେବା) ଉଭୟ କାରକରେ ବ୍ୟବହୃତ ହୁଏ। ଏମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଥିବା ସୂକ୍ଷ୍ମ ପାର୍ଥକ୍ୟକୁ ଉଦାହରଣ ସହିତ ବୁଝିବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କରନ୍ତୁ।
୪. 'କୋ' ପରସର୍ଗର ବ୍ୟବହାର: 'କୋ' ପରସର୍ଗ କର୍ମ (କ୍ରିୟାର ଫଳ) ଏବଂ ସମ୍ପ୍ରଦାନ (ଦେବା ବା କାହା ପାଇଁ କିଛି କରିବା) ଉଭୟ କାରକରେ ବ୍ୟବହୃତ ହୁଏ। ଏମାନଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଥିବା ଭାବଗତ ପାର୍ଥକ୍ୟକୁ ବୁଝନ୍ତୁ।
୫. ସମ୍ବନ୍ଧ କାରକର ବିଭିନ୍ନ ରୂପ: 'କା, କେ, କୀ' ବ୍ୟତୀତ 'ରା, ରେ, ରୀ' ଏବଂ 'ନା, ନେ, ନୀ' ମଧ୍ୟ ସମ୍ବନ୍ଧ କାରକର ପରସର୍ଗ। ଏଗୁଡ଼ିକର ବ୍ୟବହାରକୁ ଧ୍ୟାନ ଦିଅନ୍ତୁ।
୬. ସମ୍ବୋଧନ କାରକର ସ୍ୱତନ୍ତ୍ରତା: ସମ୍ବୋଧନ କାରକର ପରସର୍ଗ (ହେ, ଅରେ, ଓ ଇତ୍ୟାଦି) ସଂଜ୍ଞା ଶବ୍ଦ ପୂର୍ବରୁ ଆସେ, ଯାହା ଅନ୍ୟ କାରକମାନଙ୍କ ଠାରୁ ଭିନ୍ନ। ଏହି ନିୟମକୁ ମନେରଖନ୍ତୁ।
୭. ରୂପାବଳୀ ଅଭ୍ୟାସ: ବିଭିନ୍ନ ପ୍ରକାରର ସଂଜ୍ଞା ଶବ୍ଦ (ଅକାରାନ୍ତ, ଆକାରାନ୍ତ, ଇକାରାନ୍ତ, ଉକାରାନ୍ତ ଇତ୍ୟାଦି) ର ଲିଙ୍ଗ ଓ ବଚନ ଅନୁସାରେ ରୂପ ପରିବର୍ତ୍ତନକୁ ଅଭ୍ୟାସ କରନ୍ତୁ। ବିଶେଷ କରି ଦୀର୍ଘ ସ୍ୱର ହ୍ରସ୍ୱ ହେବାର ନିୟମଗୁଡ଼ିକୁ ବୁଝନ୍ତୁ।
ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ (Common Pitfalls):
୧. ପରସର୍ଗ ରହିତ କାରକ ଚିହ୍ନିବାରେ ଅସୁବିଧା: ଯେଉଁଠାରେ କାରକ-ଚିହ୍ନ ସ୍ପଷ୍ଟ ଭାବରେ ନଥାଏ (ଯଥା: କର୍ତ୍ତା ଓ କର୍ମ କାରକରେ), ସେଠାରେ ଛାତ୍ରଛାତ୍ରୀମାନେ କାରକ ଚିହ୍ନିବାରେ ଭୁଲ୍ କରନ୍ତି। କ୍ରିୟା ସହିତ ପ୍ରଶ୍ନ ପଚାରି (କିଏ? କ'ଣ?) କାରକ ଚିହ୍ନିବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କରନ୍ତୁ।
୨. କରଣ ଓ ଅପାଦାନ କାରକରେ ଭ୍ରମ: 'ସେ' ପରସର୍ଗ ଦେଖିଲେ ତୁରନ୍ତ କରଣ ବା ଅପାଦାନ ନିର୍ଣ୍ଣୟ କରିବା ପୂର୍ବରୁ ବାକ୍ୟର ଅର୍ଥକୁ ଭଲ ଭାବରେ ବୁଝନ୍ତୁ। ଯଦି ଅଲଗା ହେବାର ଭାବ ଥାଏ, ତେବେ ଅପାଦାନ, ନଚେତ୍ କରଣ।
୩. କର୍ମ ଓ ସମ୍ପ୍ରଦାନ କାରକରେ ଭ୍ରମ: 'କୋ' ପରସର୍ଗ ଥିବା ସ୍ଥଳେ, ଯଦି କିଛି ଦେବାର ବା କାହା ପାଇଁ କିଛି କରିବାର ଭାବ ଥାଏ, ତେବେ ସମ୍ପ୍ରଦାନ କାରକ ହେବ, ନଚେତ୍ କର୍ମ କାରକ।
୪. ସମ୍ବନ୍ଧ କାରକକୁ ଅନ୍ୟ କାରକ ସହିତ ମିଶାଇବା: ସମ୍ବନ୍ଧ କାରକ କ୍ରିୟା ସହିତ ସମ୍ବନ୍ଧ ନ ଦର୍ଶାଇ ଅନ୍ୟ ସଂଜ୍ଞା/ସର୍ବନାମ ସହିତ ସମ୍ବନ୍ଧ ଦର୍ଶାଏ। ଏହି ମୌଳିକ ପାର୍ଥକ୍ୟକୁ ମନେରଖନ୍ତୁ।
୫. ରୂପାବଳୀରେ ଲିଙ୍ଗ ଓ ବଚନର ଭୁଲ୍: ବିଶେଷ କରି ସ୍ତ୍ରୀଲିଙ୍ଗ ଶବ୍ଦର ବହୁବଚନ ରୂପ ଲେଖିବା ସମୟରେ ଦୀର୍ଘ ସ୍ୱରକୁ ହ୍ରସ୍ୱ କରିବାକୁ ଭୁଲିଯିବା ଏକ ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍। ନିୟମଗୁଡ଼ିକୁ ବାରମ୍ବାର ଅଭ୍ୟାସ କରନ୍ତୁ।
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(ନୋଟ୍ସ ପ୍ରସ୍ତୁତି: ଉତ୍କଳ ସ୍କିଲ୍ ସେଣ୍ଟର - BSE Odisha 100% Full Textbook Master Edition)
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