BSE ODISHA CLASS 9 • UTKAL MASTER STROKE

ବୋର୍ଡ ଅଫ୍ ସେକେଣ୍ଡାରୀ ଏଜୁକେସନ୍ (BSE Odisha) — ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଧ୍ୟାୟ ମାଷ୍ଟର ନୋଟ୍ସ

ଶ୍ରେଣୀ: Class 9 | ବିଷୟ: Hindi Grammer

ଅଧ୍ୟାୟ: Class9 HindiGram Ch11 Ch11 Kriya


୧. ଅଧ୍ୟାୟର ସାରାଂଶ ଓ ମାଇଣ୍ଡ ମ୍ୟାପ୍ (Mind Map & Conceptual Architecture)


यह अध्याय 'क्रिया' और 'काल' के विस्तृत अध्ययन पर केंद्रित है। क्रिया किसी कार्य के होने या करने का बोध कराती है, और यह वाक्य का एक अनिवार्य अंग है। धातु क्रिया का मूल रूप है, जिससे विभिन्न क्रियाएँ बनती हैं। क्रिया के भेदों को रचना, कर्म, समाप्ति और कार्य-व्यापार की प्रधानता के आधार पर वर्गीकृत किया गया है। प्रेरणार्थक और संयुक्त क्रियाएँ भी क्रिया के महत्वपूर्ण प्रकार हैं। काल क्रिया के समय को दर्शाता है, जिसके तीन मुख्य भेद हैं - भूतकाल, वर्तमान काल और भविष्यत् काल, और प्रत्येक के अपने उपभेद हैं। इस अध्याय का उद्देश्य छात्रों को क्रिया के विभिन्न रूपों और कालों की पहचान करने तथा उनका सही प्रयोग करने में सक्षम बनाना है।

ମାଇଣ୍ଡ ମ୍ୟାପ୍ (Mind Map & Conceptual Architecture):

  • क्रिया (Kriya)
  • परिभाषा: कार्य का करना या होना
  • धातु (Dhatu)
  • मूल धातु (Basic Root)
  • यौगिक धातु (Compound Root)
  • संयुक्त धातु (Conjunctive Root)
  • क्रिया के भेद (Types of Kriya)
  • रचना के आधार पर (Based on Structure)
  • मूल क्रिया (Basic Verb)
  • यौगिक क्रिया (Compound Verb)
  • कर्म के आधार पर (Based on Object)
  • सकर्मक क्रिया (Transitive Verb)
  • द्विकर्मक क्रिया (Ditransitive Verb)
  • अकर्मक क्रिया (Intransitive Verb)
  • समाप्ति के आधार पर (Based on Completion)
  • समापिका क्रिया (Finite Verb)
  • असमापिका क्रिया (Non-finite Verb) (कृदंत)
  • कार्य-व्यापार की प्रधानता के आधार पर (Based on Predominance of Action)
  • मुख्य क्रिया (Main Verb)
  • सहायक क्रिया (Auxiliary Verb)
  • कालसूचक, वाच्य सूचक, वृत्ति सूचक, संम्मिश्र क्रिया सूचक, पक्ष सूचक, रंजक
  • अन्य प्रकार
  • संयुक्त क्रियाएँ (Compound Verbs)
  • प्रेरणार्थक क्रियाएँ (Causative Verbs)
  • प्रथम प्रेरणार्थक
  • द्वितीय प्रेरणार्थक
  • प्रेरक कर्त्ता, प्रेरित कर्त्ता
  • रूप-परिवर्तन के नियम
  • काल (Tense)
  • परिभाषा: कार्य के समय का बोध
  • भूतकाल (Past Tense) (6 भेद)
  • सामान्य भूतकाल
  • आसन्न भूतकाल
  • पूर्ण भूतकाल
  • अपूर्ण भूतकाल
  • संदिग्ध भूतकाल
  • हेतुहेतुमद् भूतकाल
  • वर्त्तमान काल (Present Tense) (4 भेद)
  • सामान्य वर्त्तमान काल
  • तात्कालिक वर्त्तमानकाल
  • संदिग्ध वर्त्तमानकाल
  • संभाव्य वर्त्तमानकाल
  • भविष्यत् काल (Future Tense) (3 भेद)
  • सामान्य भविष्यत्काल
  • संभाव्य भविष्यत् काल
  • हेतुहेतुमद् भविष्यत् काल

  • ୨. ମୁଖ୍ୟ ବିଷୟବସ୍ତୁ, ସିଦ୍ଧାନ୍ତ ଓ ଗାଣିତିକ ସୂତ୍ରାବଳୀ (Comprehensive Theory & Formulas)


    क्रिया (Kriya)

    जिस पद से किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है, उसे क्रियापद कहते हैं।

    उदाहरण: पढ़ना, लिखना, खाना, पीना, सोना, उठना, बैठना आदि।

    धातु (Dhatu)

    क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं। धातु में 'ना' प्रत्यय जोड़ने से क्रिया बनती है।

    उदाहरण:

  • पढ + ना = पढ़ना
  • लिख + ना = लिखना
  • जा + ना = जाना
  • धातु के दो प्रकार हैं:

    ୧. मूल धातु: यह स्वतंत्र होती है और किसी अन्य शब्द पर निर्भर नहीं करती।

    उदाहरण: जा, पढ़, लिख, खा, पी, सो आदि।

    ୨. यौगिक धातु: मूलधातु के साथ दूसरे शब्द (प्रत्यय) आदि जोड़ने से यौगिक धातु बनती है।

    उदाहरण:

  • 'खा' (मूल धातु) के साथ प्रेरणार्थक प्रत्यय 'ला' जोड़ने से 'खिलाना' क्रिया बनती है।
  • दो या दो से अधिक धातुओं को जोड़ने से संयुक्त धातु बनती है, जैसे 'पढ़ सकना', 'लिख देना'।
  • क्रिया के भेद (Types of Kriya)

    क्रिया के अनेक भेद होते हैं, जिनमें से कुछ प्रमुख भेद निम्नलिखित हैं:

    ୧. रचना के आधार पर (Based on Structure)

    (i) मूल क्रिया: जो क्रियाएँ धातु के मूल रूप से बनती हैं।

    उदाहरण: पढ़ना, लिखना, सोना, जाना।

    (ii) यौगिक क्रिया: जो क्रियाएँ दो या दो से अधिक धातुओं के योग से बनती हैं या जिनमें प्रत्यय आदि जुड़ते हैं।

    उदाहरण: पढ़ सकना, लिख देना, खा लेना, सो जाना।

    ୨. कर्म के आधार पर (Based on Object)

    कर्म के आधार पर क्रिया के तीन भेद हो सकते हैं:

    (i) सकर्मक क्रिया (Transitive Verb): जिस क्रिया के व्यापार का फल कर्त्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं। इन क्रियाओं के साथ कर्म का होना आवश्यक होता है या कर्म की संभावना बनी रहती है।

    पहचान: क्रिया के साथ 'क्या' या 'किसको' लगाकर प्रश्न करने पर यदि उत्तर मिले, तो वह सकर्मक क्रिया होती है।

    उदाहरण:

  • राम फल खाता है। (क्या खाता है? - फल)
  • वह पत्र लिखता है। (क्या लिखता है? - पत्र)
  • खाना, लिखना, पढ़ना, पीना, काटना आदि क्रियाएँ सकर्मक होती हैं। वाक्य में कर्म न आने पर भी कर्म की संभावना बनी रहती है। इसलिए ये क्रियाएँ सर्वदा सकर्मक हैं।
  • (ii) द्विकर्मक क्रिया (Ditransitive Verb): जिस क्रिया के दो कर्म होते हैं, उसे द्विकर्मक क्रिया कहते हैं।

    उदाहरण:

  • मोहन सोहन को पुस्तक देता है। (क्या देता है? - पुस्तक, किसको देता है? - सोहन)
  • अध्यापक छात्रों को हिंदी पढ़ाते हैं। (क्या पढ़ाते हैं? - हिंदी, किसको पढ़ाते हैं? - छात्रों को)
  • कहना, पूछना, पढ़ाना, देना आदि द्विकर्मक क्रियाएँ हैं।
  • (iii) अकर्मक क्रिया (Intransitive Verb): जिस क्रिया के व्यापार का फल सीधे कर्त्ता पर पड़ता है और जिसके साथ कर्म की आवश्यकता नहीं होती, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं।

    पहचान: क्रिया के साथ 'क्या' या 'किसको' लगाकर प्रश्न करने पर यदि कोई उत्तर न मिले, तो वह अकर्मक क्रिया होती है।

    उदाहरण:

  • घोड़ा दौड़ता है। (क्या दौड़ता है? - कोई उत्तर नहीं, किसको दौड़ता है? - कोई उत्तर नहीं)
  • बच्चा सोता है।
  • जाना, आना, कूदना, उड़ना, तैरना, हँसना, रोना आदि अकर्मक क्रियाएँ हैं।
  • ୩. समाप्ति के आधार पर (Based on Completion)

    कार्य के समाप्त होने या न होने के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं:

    (i) समापिका क्रिया (Finite Verb): जो क्रियाएँ वाक्य के अंत में आकर वाक्य को समाप्त करती हैं और कर्त्ता के लिंग, वचन, पुरुष तथा काल के अनुसार बदलती हैं, उन्हें समापिका क्रिया कहते हैं।

    उदाहरण:

  • घोड़ा दौड़ता था।
  • राम घर जाएगा।
  • वह पढ़ रहा है।
  • (ii) असमापिका क्रिया (Non-finite Verb): जो क्रियाएँ वाक्य को समाप्त नहीं करतीं और कर्त्ता के लिंग, वचन आदि से प्रभावित नहीं होतीं, उन्हें असमापिका क्रिया कहते हैं। इन्हें 'कृदंत' भी कहते हैं।

    उदाहरण:

  • रमेश रोज खाकर दफ्तर जाता है। ('खाकर' क्रिया वाक्य को समाप्त नहीं कर रही है)
  • गाड़ी अब आनेवाली है। ('आनेवाली' क्रिया वाक्य को समाप्त नहीं कर रही है)
  • वह हँसते-हँसते गिर पड़ा।
  • ୪. कार्य-व्यापार की प्रधानता के आधार पर (Based on Predominance of Action)

    कार्य-व्यापार की प्रधानता के आधार पर क्रिया के दो भेद होते हैं:

    (i) मुख्य क्रिया (Main Verb): जिस क्रिया से वाक्य में एक मात्र मुख्य कार्य-व्यापार का बोध होता है, उसे मुख्य क्रिया कहते हैं।

    उदाहरण:

  • वह स्कूल गया। (यहाँ 'जाना' मुख्य क्रिया है)
  • बच्चा रो रहा है। (यहाँ 'रोना' मुख्य क्रिया है)
  • (ii) सहायक क्रिया (Auxiliary Verb): जिस क्रिया के द्वारा मुख्य क्रिया में अर्थभेद उत्पन्न करने में सहायता मिलती है, उसे सहायक क्रिया कहते हैं। यह मुख्य क्रिया के साथ आकर उसके अर्थ को स्पष्ट करती है या उसमें विशेषता लाती है।

    उदाहरण:

  • कमला का पत्र पढ़ा गया। (यहाँ 'गया' सहायक क्रिया है, जो 'पढ़ना' क्रिया में वाच्य संबंधी अर्थभेद उत्पन्न कर रही है)
  • बच्चा रो रहा है। (यहाँ 'रहा है' सहायक क्रिया है, जो 'रोना' क्रिया में काल संबंधी अर्थभेद उत्पन्न कर रही है)
  • हिंदी में सहायक क्रियाएँ अनेक प्रकार की होती हैं, क्योंकि ये मुख्य क्रिया की कई तरह से सहायता करके अर्थभेद उत्पन्न कर सकती हैं:

  • कालसूचक सहायक क्रिया: बच्चा रो रहा है। (क्रिया चल रही है - तात्कालिक वर्तमान)
  • वाच्य सूचक सहायक क्रिया: चिट्ठी भेजी गयी। (वाच्य की सूचना - कर्मवाच्य)
  • वृत्ति सूचक सहायक क्रिया: शायद उसने पढ़ा होगा। (संभावना वृत्ति की सूचना)
  • संम्मिश्र क्रिया सूचक सहायक क्रिया: उसे साड़ी पसंद आयी। ('पसंद' के साथ 'आना' का मिश्रण)
  • पक्ष सूचक सहायक क्रिया: हम इतिहास पढ़ रहे हैं। (अपूर्णता बोधक)
  • रंजक सहायक क्रिया: बच्ची काँप उठी। (मुख्य क्रिया 'काँपना' को विशिष्टता प्रदान करती है 'उठी' क्रिया। यह रंजकता या विशेषता द्योतन करती है।)
  • ୫. संयुक्त क्रियाएँ (Compound Verbs)

    जब एक से अधिक क्रियाओं का प्रयोग हो और क्रिया व्यापार की नई विशेषता का बोध हो तो उन क्रियाओं को संयुक्त क्रिया कहते हैं। इनमें एक मुख्य क्रिया होती है (जो धातु रूप में होती है) और दूसरी क्रिया मुख्य कार्य-व्यापार में कोई खास वैशिष्ट्य लाने में सहायता करती है।

    उदाहरण:

  • रो उठना (अचानक रोना)
  • चल पड़ना (अचानक चलना)
  • लिख डालना (लिखने का कार्य पूरा करना)
  • पढ़ सकना (पढ़ने की क्षमता)
  • खा लेना (खाने का कार्य पूरा करना)
  • ६. प्रेरणार्थक क्रियाएँ (Causative Verbs)

    कर्त्ता की प्रेरणा से होनेवाले कार्य की क्रिया को 'प्रेरणार्थक क्रिया' कहा जाता है। इसमें कर्त्ता स्वयं कार्य न करके किसी दूसरे को कार्य करने के लिए प्रेरित करता है।

  • जो कर्त्ता कार्य करने की प्रेरणा देता है, वह 'प्रेरक कर्त्ता' कहलाता है।
  • जो कार्य करने के लिए प्रेरित होता है उसे 'प्रेरित कर्त्ता' कहते हैं।
  • इसमें प्रेरित कर्त्ता स्वयं कर्त्ता होने पर भी व्याकरणिक दृष्टि से 'को' या 'से' परसर्गयुक्त होने से क्रमशः 'कर्म' या 'करण' बन जाता है।
  • उदाहरण:

  • माँ ने बच्चे को दूध पिलाया। (यहाँ 'माँ' प्रेरक कर्त्ता है, 'बच्चे को' प्रेरित कर्त्ता है जो कर्म के स्थान पर आया है।)
  • माँ ने आया से बच्चे को दूध पिलवाया। (यहाँ 'माँ' प्रेरक कर्त्ता है, 'आया से' प्रेरित कर्त्ता है जो करण के स्थान पर आया है।)
  • प्रेरणार्थक क्रियाएँ दो प्रकार की होती हैं:

    (i) प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया: कार्य व्यापार में कर्त्ता प्रत्यक्ष भाग लेता है या स्वयं भी कार्य में शामिल होता है।

    उदाहरण: माँ बच्चे को दूध पिलाती है। (माँ स्वयं पिलाने का कार्य कर रही है)

    (ii) द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया: कार्य व्यापार में कर्त्ता प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लेता, पर उसकी प्रेरणा से कोई दूसरा कार्य-व्यापार का संपादन करता है।

    उदाहरण: माँ आया से बच्चे को दूध पिलवाती है। (माँ स्वयं नहीं पिला रही, आया से पिलवा रही है)

    प्रेरणार्थक क्रियाओं के रूप-परिवर्तन के नियम:

    १. मूल धातु में 'आना' जोड़कर प्रथम प्रेरणार्थक और 'वाना' जोड़कर द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया रूप बनाया जाता है।

    मूल धातु प्रथम प्रेरणार्थक द्वितीय प्रेरणार्थक
    उग उगाना उगवाना
    खिल खिलाना खिलवाना
    दौड़ दौड़ाना दौड़वाना
    पढ़ पढ़ाना पढ़वाना
    लिख लिखाना लिखवाना
    सुन सुनाना सुनवाना
    हँस हँसाना हँसवाना

    २. कुछ मूलधातु में पहली मात्रा परिवर्तन कर दिया जाता है (जैसे आ का अ, ई/ए का इ, ऊ/ओ का उ)। फिर 'आना' जोड़कर प्रथम प्रेरणार्थक और 'वाना' जोड़कर द्वितीय प्रेरणार्थक क्रियारूप बनाया जाता है।

    मूलधातु प्रथम प्रेरणार्थक द्वितीय प्रेरणार्थक
    काट कटाना कटवाना
    खेल खिलाना खिलवाना
    घूम घुमाना घुमवाना
    छोड़ छुड़ाना छुड़वाना
    जाग जगाना जगवाना
    डूब डुबाना / डुबोना डुबवाना
    नाच नचाना नचवाना
    बोल बुलाना बुलवाना

    ३. स्वरांत धातु में पहले मात्रा परिवर्तन करके (आ/ई/ए का इ, ऊ/ओ का उ), फिर 'लाना' जोड़कर प्रथम प्रेरणार्थक तथा 'लवाना' जोड़कर द्वितीय प्रेरणार्थक क्रियारूप बनाया जाता है।

    मूलधातु प्रथम प्रेरणार्थक द्वितीय प्रेरणार्थक
    खा खिलाना खिलवाना
    छू छुलाना छुलवाना
    जी जिलाना जिलवाना
    दे दिलाना दिलवाना
    पी पिलाना पिलवाना
    रो रुलाना रुलवाना
    सो सुलाना सुलवाना

    ४. कुछ धातुओं के दो-दो रूप बनते हैं।

    मूलधातु प्रथम प्रेरणार्थक द्वितीय प्रेरणार्थक
    कह कहाना, कहलाना कहवाना / कहलवाना
    देख दिखाना / दिखलाना दिखवाना / दिखलवाना
    बैठ बिठाना / बिठलाना बिठवाना / बिठलवाना
    सीख सिखाना / सिखलाना सिखवाना / सिखलवाना

    ५. कुछ क्रियाओं के 'प्रथम प्रेरणार्थक' रूप नहीं बनते।

    उदाहरण: खेना, खोना, गाना, ढोना, पीटना, भेजना, लेना।

    ६. कुछ क्रियाओं के कोई भी प्रेरणार्थक रूप नहीं बनते।

    उदाहरण: आना, गँवाना, चाहना, जँचना, जानना, जाना, पाना, मिलना, सोचना, होना।

    काल (Tense)

    कार्य के समय, कार्य की पूर्णता, या अपूर्णता का बोध कराने के लिए क्रिया में होनेवाले परिवर्तन को 'काल' कहते हैं।

    ये तीन प्रकार के हैं: भूतकाल, वर्त्तमानकाल, भविष्यत् काल।

    ୧. भूतकाल (Past Tense)

    जिससे कार्य के बीते हुए समय में होने का बोध होता है, उसे भूतकाल कहते हैं। इसके छह भेद होते हैं:

    (i) सामान्य भूतकाल: इससे बीते हुए समय का तो बोध होता है, पर विशेष समय का बोध नहीं होता।

    उदाहरण:

  • मैंने लिखा।
  • मैं गया।
  • तू गयी।
  • हमने लिखा।
  • हम गये।
  • वे गयीं।
  • (ii) आसन्न भूतकाल: इससे पता चलता है कि कार्य भूतकाल में आरंभ हुआ था, कुछ समय पहले समाप्त हो गया है।

    उदाहरण:

  • उसने रोटी खायी है।
  • आप गये हैं।
  • गोपाल ने केले खाये हैं।
  • हम दौड़ी हैं।
  • (iii) पूर्ण भूतकाल: इससे पता चलता है कि कार्य बहुत पहले समाप्त हो चुका है।

    उदाहरण:

  • मैंने केला खाया था।
  • उसने कहा था।
  • राजू आया था।
  • वे तैरे थे।
  • (iv) अपूर्ण भूतकाल: इससे पता चलता है कि कार्य भूतकाल में हो रहा था, पर उसके समाप्त होने का पता नहीं चलता।

    उदाहरण:

  • हम पढ़ रहे थे।
  • मैं जा रही थी।
  • हम पढ़ते थे।
  • मैं जाती थी।
  • (v) संदिग्ध भूतकाल: इसमें कार्य के भूतकाल में होने में सन्देह प्रकट किया जाता है। अतः यह स्पष्ट नहीं होता कि कार्य पूरा हुआ या नहीं।

    उदाहरण:

  • चोर अब तक भाग गया होगा।
  • उसने लड्डू खाया होगा।
  • वे अब तक पहुँच गये होंगे।
  • उसने दो लड्डू खाये होंगे।
  • (vi) हेतुहेतुमद् भूतकाल: इससे पता चलता है कि भूतकाल में कार्य होनेवाला था, पर किसी कारण नहीं हो पाया, क्योंकि शर्त पूरी न हो सकी।

    उदाहरण:

  • राम आता तो गीत गाता। (राम नहीं आया, इसलिए गीत नहीं गाया)
  • वर्षा होती तो स्कूल बन्द होता। (वर्षा नहीं हुई, इसलिए स्कूल बन्द नहीं हुआ)
  • हम जाते तो वह आती।
  • उसने पत्र लिखा होता तो मैंने उसे बुलाया होता।
  • ୨. वर्त्तमान काल (Present Tense)

    जिससे कार्य के वर्त्तमान समय में होने का बोध होता है, उसे वर्त्तमान काल कहते हैं। इसके चार भेद होते हैं:

    (i) सामान्य वर्त्तमान काल: इससे कार्य के वर्त्तमान समय में होने का पता तो चलता है, पर निश्चित समय का बोध नहीं हो पाता।

    उदाहरण:

  • हम रोटी खाते हैं।
  • मुझे हिंदी आती है।
  • मछली पानी में रहती है।
  • लड़के मैदान में खेलते हैं।
  • (ii) तात्कालिक वर्त्तमानकाल: इससे पता चलता है कि कार्य वर्त्तमानकाल में हो रहा है, पर पूरा नहीं हुआ है।

    उदाहरण:

  • पिताजी चिट्ठी लिख रहे हैं।
  • बच्चा चाँद देख रहा है।
  • चिड़िया आसमान में उड़ रही है।
  • (iii) संदिग्ध वर्त्तमानकाल: इससे वर्त्तमानकाल में कार्य के होने में सन्देह प्रकट होता है।

    उदाहरण:

  • लड़के पढ़ते होंगे।
  • लड़की पढ़ रही होगी।
  • मदन आता ही होगा।
  • वह जा रहा होगा।
  • (iv) संभाव्य वर्त्तमानकाल: इससे वर्त्तमानकाल में कार्य होने की संभावना का पता चलता है।

    उदाहरण:

  • संभवतः वह खाता हो।
  • संभवत वह पढ़ता हो।
  • ୩. भविष्यत् काल (Future Tense)

    इस काल की क्रिया से आनेवाले या भविष्य के समय का बोध होता है। इसके तीन भेद होते हैं:

    (i) सामान्य भविष्यत्काल: इससे बोध होता है कि आनेवाले समय में कार्य सामान्यतः सम्पन्न होगा।

    उदाहरण:

  • मैं गीत गाऊँगी।
  • वह भुवनेश्वर जाएगा।
  • (ii) संभाव्य भविष्यत् काल: इससे बोध होता है कि भविष्य में कार्य होने की संभावना है।

    उदाहरण:

  • संभवतः उमेश कल आए।
  • हो सकता है, दो दिनों में बारिश हो।
  • (iii) हेतुहेतुमद् भविष्यत् काल: इससे बोध होता है कि भविष्य में इस कार्य का होना, किसी दूसरे कार्य के होने पर निर्भर करता है।

    उदाहरण:

  • वह आए तो मैं जाऊँ। (उसके आने पर मेरा जाना निर्भर है)
  • वे हमारी बात मानें तो हम सभा में जाएँ। (उनके बात मानने पर हमारा सभा में जाना निर्भर है)

  • ୩. ପାଠ୍ୟପୁସ୍ତକ ଅଭ୍ୟାସ ପ୍ରଶ୍ନାବଳୀର ୧୦୦% ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସମାଧାନ (100% Complete Solved Exercises)


    अभ्यास

    Q1. 'क्रिया' किसे कहते हैं?

    उत्तर: जिस पद से किसी कार्य के करने या होने का बोध होता है, उसे क्रियापद कहते हैं।

    उदाहरण: पढ़ना, लिखना, खाना, पीना, सोना आदि।

    Q2. क्रिया के मूलरूप को क्या कहते हैं? उससे क्रिया कैसे बनायी जाती है?

    उत्तर: क्रिया के मूल रूप को धातु कहते हैं। धातु के साथ 'ना' प्रत्यय जोड़ने से क्रिया बनती है।

    उदाहरण:

  • पढ (धातु) + ना (प्रत्यय) = पढ़ना (क्रिया)
  • लिख (धातु) + ना (प्रत्यय) = लिखना (क्रिया)
  • जा (धातु) + ना (प्रत्यय) = जाना (क्रिया)
  • Q3. 'यौगिक धातु' किसे कहते हैं? उसके भेदों के नाम लिखिए।

    उत्तर: मूलधातु के साथ दूसरे शब्द (प्रत्यय) आदि जोड़ने से यौगिक धातु बनती है। दो या दो से अधिक धातुओं को जोड़ने से भी संयुक्त धातु बनती है, जो यौगिक धातु का ही एक प्रकार है।

    यौगिक धातु के मुख्य भेद इस अध्याय में स्पष्ट रूप से नहीं दिए गए हैं, लेकिन सामान्यतः ये प्रेरणार्थक क्रिया, संयुक्त क्रिया, नामधातु क्रिया आदि के रूप में होते हैं। पाठ्यपुस्तक के अनुसार, 'खा' के साथ 'ला' जोड़ने से 'खिलाना' यौगिक धातु बनती है, और दो या दो से अधिक धातुओं को जोड़ने से संयुक्त धातु बनती है।

    Q4. निम्नलिखित क्रियाओं के प्रथम और द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए:

    दौड़ना, लिखना, सुनना, चलना, पढ़ना, रोना

    मुख्य क्रिया प्रथम प्रेरणार्थक द्वितीय प्रेरणार्थक
    दौड़ना दौड़ाना दौड़वाना
    लिखना लिखाना लिखवाना
    सुनना सुनाना सुनवाना
    चलना चलाना चलवाना
    पढ़ना पढ़ाना पढ़वाना
    रोना रुलाना रुलवाना

    Q5. निम्नलिखित धातुओं के प्रथम और द्वितीय प्रेरणार्थक रूप बनाइए:

    काट, खेल, घूम, जाग, लेट, डूब, नाच

    मूल धातु प्रथम प्रेरणार्थक द्वितीय प्रेरणार्थक
    काट कटाना कटवाना
    खेल खिलाना खिलवाना
    घूम घुमाना घुमवाना
    जाग जगाना जगवाना
    लेट लिटाना लिटवाना
    डूब डुबाना / डुबोना डुबवाना
    नाच नचाना नचवाना

    Q6. अकर्मक और सकर्मक क्रिया में क्या अन्तर है? उदाहरण देकर समझाइए।

    उत्तर: अकर्मक और सकर्मक क्रिया में मुख्य अंतर उनके साथ कर्म की उपस्थिति या अनुपस्थिति का होता है।

    अकर्मक क्रिया (Intransitive Verb):

  • जिस क्रिया के व्यापार का फल सीधे कर्त्ता पर पड़ता है और जिसके साथ कर्म की आवश्यकता नहीं होती, उसे अकर्मक क्रिया कहते हैं।
  • इन क्रियाओं के साथ 'क्या' या 'किसको' लगाकर प्रश्न करने पर कोई उत्तर नहीं मिलता।
  • उदाहरण:
  • घोड़ा दौड़ता है। (क्या दौड़ता है? - कोई उत्तर नहीं)
  • बच्चा सोता है। (क्या सोता है? - कोई उत्तर नहीं)
  • वह हँसता है।
  • सकर्मक क्रिया (Transitive Verb):

  • जिस क्रिया के व्यापार का फल कर्त्ता को छोड़कर कर्म पर पड़ता है, उसे सकर्मक क्रिया कहते हैं।
  • इन क्रियाओं के साथ कर्म का होना आवश्यक होता है या कर्म की संभावना बनी रहती है।
  • इन क्रियाओं के साथ 'क्या' या 'किसको' लगाकर प्रश्न करने पर उत्तर मिलता है।
  • उदाहरण:
  • राम फल खाता है। (क्या खाता है? - फल)
  • वह पत्र लिखता है। (क्या लिखता है? - पत्र)
  • मोहन पुस्तक पढ़ता है।
  • संक्षेप में अंतर:

  • अकर्मक: कर्म नहीं होता, क्रिया का फल कर्त्ता पर।
  • सकर्मक: कर्म होता है, क्रिया का फल कर्म पर।
  • Q7. 'क' स्तंभ में कुछ वाक्य और 'ख' स्तंभ में कालों के नाम दिये गये हैं। वाक्यों के साथ कालों का मिलान करके लिखिए।

    'क' स्तंभ (वाक्य) 'ख' स्तंभ (काल)
    मैंने खाना खा लिया है। आसन्न भूत
    तुम कहानी लिखोगी। सामान्य भविष्यत्
    वह नवीं कक्षा में पढ़ता होगा। संदिग्ध वर्त्तमान
    नानी पुराण पढ़ रही थी। अपूर्ण भूत
    मैं पढ़ रहा होऊँ। संदिग्ध वर्त्तमान
    संभवतः वे पढ़ें। संभाव्य वर्त्तमान
    आप कहें तो मैं जाऊँ। हेतुहेतुमद् भविष्यत्
    धूप होती तो कपड़े सूख जाते। हेतुहेतुमद् भूत
    वह पाठ पढ़ चुका है। पूर्ण भूत
    उसने कहा था। पूर्ण भूत
    रमेश ने आम खाये हैं। आसन्न भूत

    Q8. निम्नलिखित वाक्यों को क्रियाओं की विभिन्न कालों में बदलकर लिखिए –

    वर्त्तमान भूत भविष्य
    हम रोज स्कूल जाते हैं। हम रोज स्कूल जाते थे। हम रोज स्कूल जायेंगे।
    रानी पुस्तक पढ़ रही है। रानी पुस्तक पढ़ रही थी। रानी पुस्तक पढ़ेगी।
    मंजु रोटी खाती है। मंजु ने रोटी खायी। मंजु रोटी खाएगी।
    शायद वह आता होगा। शायद वह आया होगा। शायद वह आएगा।
    सब लोग पढ़ रहे हैं। सब लोग पढ़ रहे थे। सब लोग पढ़ेंगे।
    वह दिल्ली जाता है। वह दिल्ली गया। वह दिल्ली जाएगा।
    रेलगाड़ी चल रही है। रेलगाड़ी चल रही थी। रेलगाड़ी चलेगी।
    लड़के मैदान में खेलते हैं। लड़के मैदान में खेलते थे। लड़के मैदान में खेलेंगे।
    लड़कियाँ गीत गाती हैं। लड़कियाँ गीत गाती थीं। लड़कियाँ गीत गाएँगी।
    वर्षा होती है। वर्षा होती थी। वर्षा होगी।
    कौआ उड़ रहा है। कौआ उड़ रहा था। कौआ उड़ेगा।
    हम पत्र लिखते हैं। हमने पत्र लिखा। हम पत्र लिखेंगे।
    ताला खोला जाता है। ताला खोला गया। ताला खोला जाएगा।
    संभवतः वह कल आए। संभवतः वह कल आया होगा। संभवतः वह कल आए।
    रोजी से चला नहीं जाता। रोजी से चला नहीं गया। रोजी से चला नहीं जाएगा।
    घोड़े दौड़ते हैं। घोड़े दौड़े। घोड़े दौड़ेंगे।
    पत्र भेज देना है। पत्र भेज दिया। पत्र भेज देना होगा।

    Q9. निम्नलिखित क्रियाओं के प्रथम और द्वितीय प्रेरणार्थक रूप लिखिए:-

    मुख्यक्रिया प्रथम प्रेरणार्थक द्वितीय प्रेरणार्थक
    हँसना हँसाना हँसवाना
    खेलना खिलाना खिलवाना
    खाना खिलाना खिलवाना
    पढ़ना पढ़ाना पढ़वाना
    लिखना लिखाना लिखवाना
    देखना दिखाना / दिखलाना दिखवाना / दिखलवाना
    सोना सुलाना सुलवाना
    सीखना सिखाना / सिखलाना सिखवाना / सिखलवाना
    रोना रुलाना रुलवाना
    चलना चलाना चलवाना
    सुनना सुनाना सुनवाना
    उगना उगाना उगवाना
    काटना कटाना कटवाना
    नाचना नचाना नचवाना
    बोलना बुलाना बुलवाना
    दौड़ना दौड़ाना दौड़वाना
    देना दिलाना दिलवाना
    पीना पिलाना पिलवाना
    कहना कहाना / कहलाना कहवाना / कहलवाना
    जागना जगाना जगवाना

    Q10. निम्नलिखित क्रिया पदों के सामने सकर्मक या अकर्मक लिखिए। इनको लगाकर एक-एक वाक्य भी बनाइए।

    क्रिया पद प्रकार वाक्य
    खाना सकर्मक राम खाना खाता है।
    जाना अकर्मक वह स्कूल जाता है।
    हँसना अकर्मक बच्चा हँसता है।
    लिखना सकर्मक मैं पत्र लिखता हूँ।
    पढ़ना सकर्मक छात्र पुस्तक पढ़ते हैं।
    रोना अकर्मक बच्ची रो रही है।
    आना अकर्मक मेहमान घर आए हैं।
    लाना सकर्मक माँ फल लाती है।
    कहना सकर्मक उसने मुझसे सच कहा।
    तैरना अकर्मक मछली पानी में तैरती है।
    दौड़ना अकर्मक खिलाड़ी दौड़ रहे हैं।
    देना सकर्मक मैंने उसे किताब दी।
    पीना सकर्मक वह पानी पीता है।
    सीखना सकर्मक मैं हिंदी सीख रहा हूँ।
    काटना सकर्मक माली पेड़ काटता है।
    फटना अकर्मक कपड़ा फट गया।
    पिलाना सकर्मक माँ बच्चे को दूध पिलाती है।
    उड़ना अकर्मक चिड़िया आसमान में उड़ रही है।
    नाचना अकर्मक लड़की नाच रही है।
    गाना सकर्मक वह गीत गाता है।
    गिरना अकर्मक बच्चा जमीन पर गिर गया।
    भेजना सकर्मक मैंने उसे पत्र भेजा।
    काँपना अकर्मक ठंड से वह काँप रहा था।
    कूदना अकर्मक मेंढक पानी में कूद गया।
    दुहना सकर्मक ग्वाला गाय दुहता है।
    खिलाना सकर्मक माँ बच्चे को खिलाती है।

    Q11. निम्नलिखित क्रियाओं के पाँच-पाँच उदाहरण दीजिए।

    (१) मुख्य क्रिया:

    1. वह खाता है।

    2. बच्चा सो रहा है।

    3. मैंने पत्र लिखा।

    4. वे स्कूल गए।

    5. वह किताब पढ़ता है।

    (२) सहायक क्रिया:

    1. वह पढ़ रहा है।

    2. पत्र लिखा गया।

    3. शायद वह आया होगा।

    4. उसे जाना चाहिए।

    5. तुमने काम कर लिया है।

    (३) संयुक्त क्रिया:

    1. वह अचानक रो पड़ा।

    2. तुम यह काम कर लो।

    3. वह गिरते-गिरते बच गया।

    4. मुझे अब चल देना चाहिए।

    5. बच्चा सो चुका है।

    (४) द्विकर्मक क्रिया:

    1. अध्यापक छात्रों को हिंदी पढ़ाते हैं। (छात्रों, हिंदी)

    2. पिताजी ने बेटे को पैसे दिए। (बेटे, पैसे)

    3. माँ ने बच्चे को दूध पिलाया। (बच्चे, दूध)

    4. मोहन ने सुरेश को कहानी सुनाई। (सुरेश, कहानी)

    5. मैंने भिखारी को भोजन दिया। (भिखारी, भोजन)


    ୪. ବୋର୍ଡ ପରୀକ୍ଷା ମାଷ୍ଟ୍ରି ଟିପ୍ସ ଓ ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ (Board Exam Tips & Pitfalls)


    ବୋର୍ଡ ପରୀକ୍ଷା ମାଷ୍ଟ୍ରି ଟିପ୍ସ (Board Exam Tips):

    1. परिभाषाओं को कंठस्थ करें: क्रिया, धातु, सकर्मक, अकर्मक, प्रेरणार्थक, काल आदि की परिभाषाएँ स्पष्ट रूप से याद रखें। उदाहरणों के साथ परिभाषाएँ लिखने का अभ्यास करें।

    2. भेद और उपभेद समझें: क्रिया और काल के सभी भेदों और उनके उपभेदों को अच्छी तरह समझें। प्रत्येक भेद की पहचान के नियम और उदाहरणों पर विशेष ध्यान दें।

    3. पहचान के नियम लागू करें: सकर्मक/अकर्मक क्रिया की पहचान के लिए 'क्या' और 'किसको' प्रश्न पूछने का अभ्यास करें। काल की पहचान के लिए क्रिया के अंत में लगे सहायक क्रिया पदों पर ध्यान दें।

    4. प्रेरणार्थक क्रियाओं का निर्माण: प्रेरणार्थक क्रियाओं के रूप-परिवर्तन के नियमों को याद रखें और विभिन्न धातुओं से प्रथम व द्वितीय प्रेरणार्थक रूप बनाने का अभ्यास करें। मात्रा परिवर्तन वाले नियमों पर विशेष ध्यान दें।

    5. वाक्य प्रयोग का अभ्यास: विभिन्न प्रकार की क्रियाओं और कालों का प्रयोग करते हुए वाक्य बनाने का अभ्यास करें। इससे आपकी समझ और लेखन क्षमता दोनों बेहतर होंगी।

    6. तालिकाओं का उपयोग करें: पाठ्यपुस्तक में दी गई तालिकाओं (जैसे प्रेरणार्थक क्रियाओं के रूप-परिवर्तन) को ध्यान से पढ़ें और स्वयं भी ऐसी तालिकाएँ बनाकर अभ्यास करें।

    7. पिछले वर्षों के प्रश्न हल करें: बोर्ड परीक्षाओं में पूछे गए क्रिया और काल से संबंधित प्रश्नों को हल करें। इससे आपको प्रश्नों के पैटर्न और महत्वपूर्ण क्षेत्रों का पता चलेगा।

    8. नियमित पुनरावृत्ति: व्याकरण के नियमों को भूलने से बचने के लिए नियमित रूप से पुनरावृत्ति (रिवीजन) करें।

    ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ (Common Pitfalls):

    1. सकर्मक और अकर्मक क्रिया में भ्रम: छात्र अक्सर सकर्मक और अकर्मक क्रियाओं को पहचानने में गलती करते हैं। याद रखें, सकर्मक क्रिया के साथ कर्म होता है या उसकी संभावना होती है, जबकि अकर्मक क्रिया के साथ कर्म नहीं होता। 'क्या' और 'किसको' प्रश्न पूछकर इस भ्रम को दूर किया जा सकता है।

  • गलती: "वह सोता है" को सकर्मक मानना।
  • सुधार: "क्या सोता है?" कोई उत्तर नहीं, अतः अकर्मक।
  • 2. मुख्य क्रिया और सहायक क्रिया में अंतर न कर पाना: संयुक्त क्रियाओं में मुख्य और सहायक क्रिया को पहचानने में गलती होती है। मुख्य क्रिया कार्य का बोध कराती है, जबकि सहायक क्रिया उसके अर्थ में विशेषता लाती है।

  • गलती: "वह पढ़ रहा है" में 'रहा है' को मुख्य क्रिया मानना।
  • सुधार: 'पढ़' मुख्य क्रिया है, 'रहा है' सहायक क्रिया है।
  • 3. प्रेरणार्थक क्रियाओं के रूप-परिवर्तन में त्रुटि: मात्रा परिवर्तन वाले नियमों को भूल जाना या गलत प्रत्यय (जैसे 'आना' की जगह 'लाना') का प्रयोग करना।

  • गलती: 'काट' का प्रथम प्रेरणार्थक 'काटना' बनाना (सही 'कटाना' है)।
  • सुधार: नियमों को ध्यान से पढ़ें और अभ्यास करें।
  • 4. काल के उपभेदों में भ्रम: विशेषकर भूतकाल और वर्तमान काल के संदिग्ध और संभाव्य भेदों में अंतर करने में कठिनाई।

  • गलती: "वह पढ़ता होगा" को संभाव्य वर्तमान मानना (यह संदिग्ध वर्तमान है)।
  • सुधार: प्रत्येक भेद की परिभाषा और उदाहरणों को ध्यान से समझें।
  • 5. वाक्य प्रयोग में व्याकरणिक अशुद्धियाँ: क्रिया और काल के सही रूप का प्रयोग न करना, जिससे वाक्य अशुद्ध हो जाते हैं।

  • गलती: "वह खाना खाया है" की जगह "वह खाना खाया था" या "वह खाना खाया है" (सही "उसने खाना खाया है")।
  • सुधार: वाक्य रचना और क्रिया के लिंग, वचन, पुरुष के अनुसार प्रयोग का अभ्यास करें।
  • इन टिप्स और सामान्य गलतियों पर ध्यान देकर छात्र इस अध्याय में बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।

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    (ନୋଟ୍ସ ପ୍ରସ୍ତୁତି: ଉତ୍କଳ ସ୍କିଲ୍ ସେଣ୍ଟର - BSE Odisha 100% Full Textbook Master Edition)

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