ବୋର୍ଡ ଅଫ୍ ସେକେଣ୍ଡାରୀ ଏଜୁକେସନ୍ (BSE Odisha) — ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଧ୍ୟାୟ ମାଷ୍ଟର ନୋଟ୍ସ
ଶ୍ରେଣୀ: Class 9 | ବିଷୟ: Hindi Grammar
ଅଧ୍ୟାୟ: Class 9 Hindi Grammar Chapter 12 - अव्यय (Avyay)
୧. ଅଧ୍ୟାୟର ସାରାଂଶ ଓ ମାଇଣ୍ଡ ମ୍ୟାପ୍ (Mind Map & Conceptual Architecture)
୧.୧ ଅଧ୍ୟାୟର ସାରାଂଶ (Chapter Summary):
हिन्दी व्याकरण में शब्दों को दो मुख्य भागों में विभाजित किया जाता है - विकारी (Declinable) और अविकारी (Indeclinable)। इस अध्याय में हम 'अविकारी शब्दों' अर्थात् 'अव्यय' (Avyay) के बारे में विस्तार से अध्ययन करेंगे।
'अव्यय' का शाब्दिक अर्थ है - 'जो व्यय न हो' अर्थात् जिसमें कोई परिवर्तन न हो। वाक्य में प्रयोग करते समय जिन शब्दों के रूप में लिंग (Gender), वचन (Number), पुरुष (Person), कारक (Case) या काल (Tense) के कारण कोई विकार या परिवर्तन नहीं होता, उन्हें 'अव्यय' या 'अविकारी शब्द' कहा जाता है। ये शब्द सदैव अपने मूल रूप में ही बने रहते हैं।
୧.୨ ମୁଖ୍ୟ ଶିକ୍ଷଣ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ (Core Learning Objectives):
୧.୩ ମାଇଣ୍ଡ ମ୍ୟାପ୍ (Conceptual Mind Map):
अव्यय (अविकारी शब्द)
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┌─────────────────────────────────┼─────────────────────────────────┐
│ │ │
(i) क्रिया विशेषण (ii) संबंधबोधक (iii) समुच्चयबोधक (iv) विस्मयादिबोधक
(Modifies Verbs) (Shows Relation) (Connects Words/Sentences) (Expresses Emotions)
│ │ │ │
• धीरे-धीरे, अचानक, • के बाद, के आगे, • और, तथा, परन्तु, • वाह!, हाय!, शाबाश!,
आजकल, यहाँ, वहाँ, के पीछे, की तरफ, किन्तु, इसलिए, ताकि, हे राम!, छिः!, अरे!
बहुत, चुपचाप आदि। के नीचे, के साथ आदि। क्योंकि, लेकिन आदि। आदि।
୨. ମୁଖ୍ୟ ବିଷୟବସ୍ତୁ, ସିଦ୍ଧାନ୍ତ ଓ ଗାଣିତିକ ସୂତ୍ରାବଳୀ (Comprehensive Theory & Formulas)
୨.୧ अव्यय की परिभाषा (Definition of Avyay):
वाक्य में प्रयुक्त होते समय जो शब्द मूल रूप में ही आते हैं और उनका कोई रूप-परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय कहते हैं। इसलिए अव्यय को 'अविकारी शब्द' भी कहते हैं।
उदाहरण: और, के पहले, वहाँ, शाबाश, हाँ, छिः, धीरे-धीरे आदि।
୨.୨ अव्यय के भेद (Types of Avyay):
अव्यय मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं:
(i) क्रिया विशेषण (Adverb):
ये शब्द क्रिया की विशेषता बताते हैं। अर्थात् क्रिया कब, कहाँ, कैसे और कितनी मात्रा में हो रही है, इसकी जानकारी देते हैं।
(ii) संबंधबोधक (Postposition / Preposition):
ये शब्द वाक्य में एक पद (संज्ञा या सर्वनाम) का संबंध दूसरे पद के साथ बताते हैं। इनके पहले प्रायः 'के', 'की' বা 'से' विभक्ति चिह्न लगते हैं।
(iii) समुच्चयबोधक (Conjunction):
ये शब्द दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को आपस में जोड़ने का कार्य करते हैं। इन्हें 'योजक' भी कहा जाता है।
(iv) विस्मयादिबोधक (Interjection):
ये शब्द वक्ता के मन के विस्मय (आश्चर्य), हर्ष (आनन्द), शोक (दुःख), घृणा, क्रोध, भय, चेतावनी आदि भावों को व्यक्त करते हैं। इनके साथ विस्मयादिबोधक चिह्न (!) का प्रयोग किया जाता है।
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ସାରଣୀ: ଅବ୍ୟୟର ଚାରୋଟି ପ୍ରକାରର ତୁଳନାତ୍ମକ ଚିତ୍ର (Comparative Table of Avyay Types)
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ପ୍ରକାର (Type) | କାର୍ଯ୍ୟ (Function) | ଉଦାହରଣ (Examples in Hindi)
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क्रिया विशेषण | क्रिया की विशेषता बताना | धीरे-धीरे, अचानक, आजकल, यहाँ, वहाँ, बहुत
संबंधबोधक | संज्ञा/सर्वनाम का अन्य शब्दों से संबंध बताना | के आगे, के पीछे, के नीचे, के साथ, की ओर
समुच्चयबोधक | शब्दों या वाक्यों को जोड़ना | और, परन्तु, किन्तु, इसलिए, क्योंकि, ताकि
विस्मयादिबोधक | मन के तीव्र भावों (हर्ष, शोक आदि) को दर्शाना | वाह!, हाय!, शाबाश!, अरे!, छिः!
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୩. ପାଠ୍ୟପୁସ୍ତକ ଅଭ୍ୟାସ ପ୍ରଶ୍ନାବଳୀର ୧୦୦% ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସମାଧାନ (100% Complete Solved Exercises)
ଉତ୍ତର: अव्यय का शाब्दिक अर्थ है - 'जो व्यय न हो' अर्थात् जिसमें कोई परिवर्तन न हो। व्याकरण में, जिन शब्दों के रूप में लिंग, वचन, पुरुष, कारक, काल आदि के कारण कोई विकार या रूप-परिवर्तन नहीं होता, उन्हें अव्यय कहते हैं। इन्हें 'अविकारी शब्द' भी कहा जाता है। जैसे - और, यहाँ, धीरे-धीरे, शाबाश आदि।
ଉତ୍ତର: अव्यय मुख्य रूप से चार प्रकार के होते हैं। वे निम्नलिखित हैं:
(i) क्रिया विशेषण (Adverb)
(ii) संबंधबोधक (Postposition)
(iii) समुच्चयबोधक (Conjunction)
(iv) विस्मयादिबोधक (Interjection)
ଉତ୍ତର: जो अव्यय शब्द क्रिया की विशेषता (जैसे - समय, स्थान, रीति, परिमाण आदि) प्रकट करते हैं, उन्हें क्रियाविशेषण कहते हैं। जैसे - धीरे-धीरे, अचानक, आजकल, तुरंत, यहाँ, वहाँ, बहुत आदि।
उदाहरण वाक्य: वह 'तेज' दौड़ता है। (यहाँ 'तेज' क्रियाविशेषण है जो 'दौड़ना' क्रिया की विशेषता बता रहा है।)
(i) मुझे थोड़ी-सी चाय दीजिए।
(ii) दीवार बारिश के कारण एकाएक ढह गयी।
(iii) बेचारा काम की तलाश में दिन भर घूमता रहा।
(iv) असल में वह झूठ नहीं बोली थी।
ଉତ୍ତର:
(i) थोड़ी-सी (परिमाणवाचक क्रियाविशेषण)
(ii) एकाएक (रीतिवाचक क्रियाविशेषण)
(iii) दिन भर (कालवाचक क्रियाविशेषण)
(iv) असल में, नहीं (रीतिवाचक और निषेधवाचक क्रियाविशेषण)
ଉତ୍ତର: जो अव्यय शब्द वाक्य में किसी संज्ञा या सर्वनाम के बाद आकर उसका संबंध वाक्य के दूसरे शब्दों (पदों) के साथ प्रकट करते हैं, उन्हें संबंधबोधक (सम्बन्धसूचक) अव्यय कहते हैं।
उदाहरण: के आगे, के पीछे, के नीचे, के साथ, की ओर आदि।
वाक्य प्रयोग:
(१) हमारे घर 'के आगे' एक सुंदर बगीचा है।
(२) बिल्ली मेज 'के नीचे' बैठी है।
ଉତ୍ତର: जो अव्यय शब्द दो शब्दों, वाक्यांशों या वाक्यों को परस्पर जोड़ने का कार्य करते हैं, उन्हें समुच्चयबोधक अव्यय कहते हैं। इन्हें 'योजक' भी कहा जाता है।
उदाहरण: और, परन्तु, किन्तु, इसलिए, क्योंकि, ताकि, अथवा आदि।
वाक्य प्रयोग:
(१) राम 'और' लक्ष्मण भाई थे।
(२) उसने बहुत परिश्रम किया, 'परन्तु' सफल न हो सका।
(i) लड़के और लड़कियाँ मैदान में खेल रहे हैं।
(ii) कुछ लोग कमरे के बाहर और कुछ लोग कमरे के भीतर बैठे थे।
(iii) वह तेज दौड़ता है, पर ज्यादा समय तक नहीं दौड़ सकता।
(iv) यदि तू ठीक से पढ़ा होता, तो आज तुझे रोना न पड़ता।
(v) तुम यहाँ से जाओगे कि मैं जाऊँगा?
ଉତ୍ତର:
(i) और
(ii) और
(iii) पर
(iv) यदि, तो
(v) कि
ଉତ୍ତର:
(i) वाह! तुमने तो कमाल कर दिया। (हर्षबोधक)
(ii) हाय! अब मेरा क्या होगा। (शोकबोधक)
(iii) अरे! तुम कब आए? (विस्मयबोधक)
(iv) शाबाश! ऐसे ही परीक्षा में अच्छे अंक लाते रहो। (स्वीकृति/प्रशंसासूचक)
(v) छिः! यहाँ कितनी बदबू है। (घृणाबोधक)
(i) वह चुपचाप आया।
(ii) वे लौटकर बाहर चले गये।
(iii) मैं जरा-सा हिलता था।
(iv) हाय! ये मर न जाएँ।
(v) हम कीड़ों को ध्यान से देखते थे।
(vi) वह बाहर चली आयी और बोली।
(vii) परन्तु तुम तो क्रूर हो।
(viii) वे किस छप्पर के नीचे बैठे थे?
(ix) उस के पीछे सेवक खड़ा था।
(x) मैं बिना हिले-डुले बैठा रहा।
ଉତ୍ତର:
(i) चुपचाप ── क्रियाविशेषण अव्यय (रीतिवाचक)
(ii) बाहर ── क्रियाविशेषण अव्यय (स्थानवाचक)
(iii) जरा-सा ── क्रियाविशेषण अव्यय (परिमाणवाचक)
(iv) हाय! ── विस्मयादिबोधक अव्यय (शोक/भयसूचक)
(v) ध्यान से ── क्रियाविशेषण अव्यय (रीतिवाचक)
(vi) और ── समुच्चयबोधक अव्यय (संयोजक)
(vii) परन्तु ── समुच्चयबोधक अव्यय (विरोधदर्शक)
(viii) के नीचे ── संबंधबोधक अव्यय
(ix) के पीछे ── संबंधबोधक अव्यय
(x) बिना हिले-डुले ── क्रियाविशेषण अव्यय (रीतिवाचक)
उन पद या पदों को अव्यय कहा जाता है -
(१) जिनका रूप वाक्य में प्रयुक्त होते ही बदल जाता है। [ ]
(२) जिनका रूप आंशिक बदलता है। [ ]
(३) जिनके रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता। [ ]
(४) जिनके रूप में कभी-कभी परिवर्तन हो जाता है। [ ]
ଉତ୍ତର:
(३) जिनके रूप में कोई परिवर्तन नहीं होता। [ ✓ ]
तुरंत, श्यामनंदन, कि, धीरे-धीरे, अच्छा, धन्यवाद, के नीचे, और, पढ़ाई, लेकिन, पहाड़, शाबाश, लगातार, ताकि, चूँकि, हालाँकि, उफ़्, की तरह, के सिवा, बहुत, बड़ा, काफी, छोटा, मंद-मंद, के बाद, आगे, अगुआ, अचानक, धीरता, अवश्य, आदमी, मानवता, वहाँ, आजकल, चोर, वे, किन्तु, अतएव।
ଉତ୍ତର: (ଦିଆଯାଇଥିବା ଶବ୍ଦଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରୁ କେବଳ ଅବ୍ୟୟ ପଦଗୁଡ଼ିକୁ ଚିହ୍ନଟ କରି ଲେଖାଗଲା)
(ସୂଚନା: श्यामनंदन, पढ़ाई, पहाड़, बड़ा, छोटा, अगुआ, धीरता, आदमी, मानवता, चोर, वे, अच्छा - ଏହି ଶବ୍ଦଗୁଡ଼ିକ ଅବ୍ୟୟ ନୁହଁନ୍ତି, ଏଗୁଡ଼ିକ ସଂଜ୍ଞା, ବିଶେଷଣ କିମ୍ବା ସର୍ବନାମ ପଦ ଅଟନ୍ତି।)
(i) जरा मेरी तरफ ध्यान दीजिए।
(ii) आज हवा धीरे-धीरे बह रही है।
(iii) बारिश से यह दीवार एकाएक ढह गयी।
(iv) जेट विमान बहुत तेज उड़ता है।
(v) लोगों ने चोर पर दनादन मुक्के बरसाये।
(vi) फेरीवाला दिन भर घूमता रहता है।
(vii) मतवाला हाथी हौले-हौले चलता है।
ଉତ୍ତର:
(i) जरा
(ii) आज, धीरे-धीरे
(iii) एकाएक
(iv) बहुत तेज
(v) दनादन
(vi) दिन भर
(vii) हौले-हौले
यदि, अब, तभी, तो, तेज, ज्यादा, ज़रा, तक, बल्कि, मानो, ज्यों-त्यों, चाहे, नहीं तो, या, अथवा, एवं, वरना, ही, भी, भर, न, नहीं, जैसे, हाँ, मत, सिर्फ, के अनुसार, अभी, कब, आज, कल, यहाँ, वहाँ, जहाँ, तहाँ, ऐसे, वैसे, बहुत, कम, थोड़ा, कितना, जितना, कृपया, सर्वथा, अनायास, यत्र-तत्र।
ଉତ୍ତର: (ପ୍ରତ୍ୟେକ ଅବ୍ୟୟ ପଦର ସରଳ ଓ ଶୁଦ୍ଧ ବାକ୍ୟ ପ୍ରୟୋଗ ନିମ୍ନରେ ଦିଆଗଲା)
(i) बाबूजी दफ्तर के लिए ------ निकले। (जल्द, साथ, क्योंकि)
(ii) अरबी घोड़े ------ दौड़ते हैं। (तेज़, भीतर, कुछ)
(iii) वे ------ हों, आज आ जायेंगे। (विदेशों, जहाँ भी, जब तक)
(iv) लीला को ------ हँसी आ गई। (लगातार, अचानक, यदाकदा)
(v) उसने ------ कहा। (रोते-रोते, हँसते-गाते, चलते-फिरते)
(vi) ऐसा ------ चलेगा? (कब तक, जब तक, पर्यन्त)
(vii) मनु पहाड़ पर ------ चढ़ता गया। (इधर, धीरे-धीरे, चारों ओर)
(viii) बेवकूफ लोग ------ हँसते हैं। (ध्यानपूर्वक, यों ही, शर्म से)
ଉତ୍ତର:
(i) बाबूजी दफ्तर के लिए जल्द निकले।
(ii) अरबी घोड़े तेज़ दौड़ते हैं।
(iii) वे जहाँ भी हों, आज आ जायेंगे।
(iv) लीला को अचानक हँसी आ गई।
(v) उसने रोते-रोते कहा।
(vi) ऐसा कब तक चलेगा?
(vii) मनु पहाड़ पर धीरे-धीरे चढ़ता गया।
(viii) बेवकूफ लोग यों ही हँसते हैं।
क्रिया विशेषण, विधेय विशेषण, समुच्चयबोधक, सम्मानबोधक, आदरार्थक, विस्मयादिबोधक, हेतुहेतुमद्भूत, संबंधबोधक
ଉତ୍ତର: ଦିଆଯାଇଥିବା ବିକଳ୍ପଗୁଡ଼ିକ ମଧ୍ୟରୁ ଅବ୍ୟୟର ଚାରୋଟି ପ୍ରକାର ହେଉଛି:
1. क्रिया विशेषण
2. संबंधबोधक
3. समुच्चयबोधक
4. विस्मयादिबोधक
और, अथवा, परन्तु, अपितु, इसलिए, ताकि
ଉତ୍ତର:
ଉତ୍ତର: विस्मयादिबोधक अव्ययों से वक्ता के मन के विभिन्न भाव जैसे - विस्मय (आश्चर्य), हर्ष (खुशी), शोक (दुःख), घृणा, क्रोध, भय, चेतावनी आदि व्यक्त होते हैं।
चार उदाहरण:
(१) वाह! कितना सुंदर दृश्य है। (हर्षबोधक)
(२) हाय! अब मेरा क्या होगा। (शोकबोधक)
(३) अरे! तुम कब आए? (विस्मयबोधक)
(४) छिः! यहाँ कितनी गंदगी है। (घृणाबोधक)
(i) तुम रोज पढ़ाई करो ---- परीक्षा में पास हो जाओ। (ताकि, अथवा, अपितु)
(ii) वह अच्छा खेलता है ------ सभी से झगड़ता है। (एवं, लेकिन, पुनश्च)
(iii) राम, लक्ष्मण ------ सीता वन में गये। (या, और, किंतु)
(iv) दशरथ ने ------ प्राण त्यागे। (तड़प-तड़प कर, हँस-हँस कर, मर मर कर)
(v) हनुमान ------ पहाड़ी पर चढ़ गये। (धम से, मानो, इधर-उधर)
(vi) धृतराष्ट्र ठीक से चल नहीं पाते थे ------ वे अंधे थे। (ताकि, क्योंकि, हालाँकि)
(vii) आज बारिश होगी ------ पौधे लगाना। (और, चूँकि, तो, कि)
(viii) वह ऐसी बातें करता है ------ वह सबका मालिक हो। (मानो, ऊपर, अर्थात्)
ଉତ୍ତର:
(i) तुम रोज पढ़ाई करो ताकि परीक्षा में पास हो जाओ।
(ii) वह अच्छा खेलता है लेकिन सभी से झगड़ता है।
(iii) राम, लक्ष्मण और सीता वन में गये।
(iv) दशरथ ने तड़प-तड़प कर प्राण त्यागे।
(v) हनुमान धम से पहाड़ी पर चढ़ गये।
(vi) धृतराष्ट्र ठीक से चल नहीं पाते थे क्योंकि वे अंधे थे।
(vii) आज बारिश होगी तो पौधे लगाना।
(viii) वह ऐसी बातें करता है मानो वह सबका मालिक हो।
(i) हिरन दौड़ता है। (तेज, सहसा, धीरे-धीरे)
(ii) शेर शिकार पर झपटता है। (धीरे से, अचानक, क्योंकि)
(iii) हवाई जहाज आसमान में उड़ता है। (फर्राटे से, धीरे से, कदाचित्)
(iv) पेड़ लगाएँ, जीवन बचाएँ। (तब, और, फिर से)
(v) उनको दिलका दौरा पड़ा, अस्पताल गए हैं। (जब, इसलिए, अवश्य)
(vi) यह गाड़ी चार घंटे आयी। (देर से, अधिक, सामने)
ଉତ୍ତର:
(i) हिरन तेज दौड़ता है।
(ii) शेर शिकार पर अचानक झपटता है।
(iii) हवाई जहाज आसमान में फर्राटे से उड़ता है।
(iv) पेड़ लगाएँ और जीवन बचाएँ।
(v) उनको दिलका दौरा पड़ा, इसलिए अस्पताल गए हैं।
(vi) यह गाड़ी चार घंटे देर से आयी।
୪. ବୋର୍ଡ ପରୀକ୍ଷା ମାଷ୍ଟ୍ରି ଟିପ୍ସ ଓ ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ (Board Exam Tips & Pitfalls)
୪.୧ ପରୀକ୍ଷା ପାଇଁ ଗୁରୁତ୍ୱପୂର୍ଣ୍ଣ ଟିପ୍ସ (Exam Scoring Secrets):
୪.୨ ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ ଓ ସେଗୁଡ଼ିକର ସଂଶୋଧନ (Common Student Errors & Pitfalls):
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(ନୋଟ୍ସ ପ୍ରସ୍ତୁତି: ଉତ୍କଳ ସ୍କିល୍ ସେଣ୍ଟର - BSE Odisha 100% Full Textbook Master Edition)
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