ବୋର୍ଡ ଅଫ୍ ସେକେଣ୍ଡାରୀ ଏଜୁକେସନ୍ (BSE Odisha) — ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଧ୍ୟାୟ ମାଷ୍ଟର ନୋଟ୍ସ
ଶ୍ରେଣୀ: Class 9 | ବିଷୟ: Hindi
ଅଧ୍ୟାୟ: Class9 HindiLit Ch02 Priyatam Nirala
୧. ଅଧ୍ୟାୟର ସାରାଂଶ ଓ ମାଇଣ୍ଡ ମ୍ୟାପ୍ (Mind Map & Conceptual Architecture)
अध्याय का सारांश:
'प्रियतम' कविता सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' द्वारा रचित एक प्रेरणादायक कविता है जो कर्म की महत्ता और सच्ची भक्ति के स्वरूप को उजागर करती है। इस कविता में भगवान विष्णु और देवर्षि नारद के बीच एक संवाद के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि केवल ईश्वर का नाम जपना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि अपने कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करते हुए ईश्वर का स्मरण करना ही सच्ची भक्ति है।
कविता की शुरुआत में नारदजी भगवान विष्णु से पूछते हैं कि मृत्युलोक में उनका सबसे प्रिय भक्त कौन है। विष्णु एक सज्जन किसान का नाम लेते हैं। नारदजी को यह बात अच्छी नहीं लगती क्योंकि वे सोचते हैं कि जो दिन-रात भगवान का नाम जपता है, वही श्रेष्ठ भक्त हो सकता है। नारदजी किसान की परीक्षा लेने की बात कहते हैं।
विष्णु नारदजी को एक तेल से भरा पात्र देते हैं और उन्हें भूमंडल की परिक्रमा करने का आदेश देते हैं, साथ ही यह शर्त रखते हैं कि पात्र से तेल की एक बूँद भी नहीं गिरनी चाहिए। नारदजी इस कार्य में इतने लीन हो जाते हैं कि वे परिक्रमा के दौरान एक बार भी भगवान का नाम नहीं ले पाते। जब वे लौटते हैं, तो विष्णु उनसे पूछते हैं कि उन्होंने कितनी बार नाम लिया। नारदजी स्वीकार करते हैं कि वे एक बार भी नाम नहीं ले पाए क्योंकि उनका सारा ध्यान तेल के पात्र पर केंद्रित था।
तब विष्णु नारदजी को समझाते हैं कि किसान भी अपने परिवार और खेती के कई उत्तरदायित्वों को निभाता है। वह दिन भर कड़ी मेहनत करता है, फिर भी वह दिन में तीन बार भगवान का नाम लेना नहीं भूलता। विष्णु कहते हैं कि किसान के पास भी उनके ही दिए हुए काम हैं, और वह उन सभी को निभाते हुए भी ईश्वर का स्मरण करता है, इसलिए वह उनका प्रियतम भक्त है। नारदजी अपनी गलती स्वीकार करते हैं और लज्जित होते हैं।
मुख्य उद्देश्य एवं वैचारिक संरचना (Conceptual Architecture):
୨. ମୁଖ୍ୟ ବିଷୟବସ୍ତୁ, ସିଦ୍ଧାନ୍ତ ଓ ଗାଣିତିକ ସୂତ୍ରାବଳୀ (Comprehensive Theory & Formulas)
୨.୧ कवि परिचय: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला'
सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' हिंदी साहित्य के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक हैं। उनका जीवन और साहित्य दोनों ही संघर्षों से भरा रहा।
प्रमुख रचनाएँ:
୨.୨ भाव-बोध (कविता का केंद्रीय संदेश)
'प्रियतम' कविता का मूल भाव कर्मयोग की श्रेष्ठता और सच्ची भक्ति के स्वरूप को स्पष्ट करना है। कविता यह संदेश देती है कि:
୨.୩ कविता 'प्रियतम' का विस्तृत सारांश
१. नारद का प्रश्न और विष्णु का उत्तर:
एक दिन देवर्षि नारद भगवान विष्णु के पास वैकुण्ठ लोक में गए और उनसे पूछा कि मृत्युलोक (पृथ्वी) में उनका सबसे पुण्यश्लोक और प्रधान भक्त कौन है। विष्णुजी ने उत्तर दिया कि एक सज्जन किसान उनका प्राणों से भी प्रियतम भक्त है।
२. नारद का संदेह और परीक्षा का आग्रह:
नारदजी को यह बात अच्छी नहीं लगी। उन्हें लगा कि जो ऋषि-मुनि दिन-रात भगवान का नाम जपते हैं, वे ही श्रेष्ठ भक्त हो सकते हैं, न कि कोई साधारण किसान। उन्होंने विनम्रतापूर्वक विष्णु के इस कथन का विरोध किया और कहा कि वे उस किसान की परीक्षा लेंगे। विष्णुजी हँसते हुए बोले कि वे ऐसा कर सकते हैं।
३. किसान की दिनचर्या और भक्ति:
नारदजी किसान के घर पहुँचे। उन्होंने देखा कि किसान दोपहर को हल जोतकर घर आया। दरवाजे पर पहुँचकर उसने रामजी का नाम लिया। फिर स्नान-भोजन करके वह फिर से अपने काम पर चला गया। शाम को जब वह घर लौटा, तो उसने फिर से भगवान का नाम लिया। अगले दिन प्रातःकाल काम पर जाते समय भी उसने एक बार मधुर नाम स्मरण किया। इस प्रकार, किसान ने पूरे दिन में केवल तीन बार भगवान का नाम लिया।
४. नारद का आश्चर्य और विष्णु से शिकायत:
यह देखकर नारदजी चकरा गए। उन्होंने सोचा कि ऋषि-मुनि तो दिन-रात भगवान का नाम जपते हैं, फिर भी भगवान को यह किसान ही याद आया जिसने दिन भर में केवल तीन बार नाम लिया। नारदजी तुरंत विष्णुलोक लौट गए और भगवान से शिकायत की, "देखो किसान को, दिन भर में तीन बार नाम उसने लिया है।"
५. विष्णु द्वारा नारद की परीक्षा:
विष्णुजी ने नारदजी की बात सुनकर कहा, "नारदजी! मुझे एक आवश्यक काम है जो तुम्हारे सिवा कोई और नहीं कर सकता।" उन्होंने नारदजी को एक तेल से भरा हुआ पात्र दिया और कहा कि इसे लेकर भूमंडल की प्रदक्षिणा करो। साथ ही यह विशेष ध्यान रखना कि पात्र से तेल की एक बूँद भी नीचे न गिरे।
६. नारद की परिक्रमा और अनुभव:
नारदजी भगवान की आज्ञा मानकर तेल का पात्र लेकर भूमंडल की परिक्रमा करने चले गए। उनका पूरा ध्यान इस बात पर केंद्रित था कि तेल की एक बूँद भी न गिरे। योगिराज नारद जल्द ही विश्व-पर्यटन करके वैकुण्ठ लौट आए। वे यह देखकर उल्लास से भरे हुए थे कि उन्होंने एक बूँद भी तेल नहीं गिरने दिया। उन्हें लगा कि अब उन्हें तेल का रहस्य (यानी किसान की भक्ति का रहस्य) अवश्य मालूम होगा।
७. विष्णु का प्रश्न और नारद का उत्तर:
नारद को देखकर विष्णु भगवान ने स्नेह से बैठाया और पूछा, "बतलाओ, पात्र लेकर जाते समय तुमने अपने इष्ट का नाम कितनी बार लिया?" शंकित हृदय से नारद ने उत्तर दिया, "एक बार भी नहीं, क्योंकि काम तुम्हारा ही था, ध्यान उसी में लगा रहा, नाम फिर क्या लेता और?"
८. सत्य का बोध और नारद की लज्जा:
विष्णु ने नारद को समझाया, "नारद! उस किसान का भी काम मेरा दिया हुआ है। उस पर एक साथ कई उत्तरदायित्व लदे हैं। वह उन सबको निभाता और काम करता हुआ भी मेरा नाम लेता है, इसी से वह मेरा प्रियतम है।" नारदजी यह सुनकर लज्जित हुए और उन्होंने स्वीकार किया, "यह सत्य है।" इस प्रकार नारदजी को कर्मयोग की महत्ता का ज्ञान हुआ।
୨.୪ शब्दार्थ (Glossary)
୩. ପାଠ୍ୟପୁସ୍ତକ ଅଭ୍ୟାସ ପ୍ରଶ୍ନାବଳୀର ୧୦୦% ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସମାଧାନ (100% Complete Solved Exercises)
प्रश्न और अभ्यास
1. इन प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में दीजिए ।
(क) भगवान विष्णु किसे और क्यों अपना श्रेष्ठ भक्त मानते हैं ?
उत्तर: भगवान विष्णु एक सज्जन किसान को अपना श्रेष्ठ भक्त मानते हैं। वे उसे अपना प्रियतम इसलिए मानते हैं क्योंकि वह अपने सभी सांसारिक कर्तव्यों और जिम्मेदारियों का ईमानदारी से पालन करते हुए भी ईश्वर का नाम लेना नहीं भूलता। वह कर्मयोगी है और अपने कर्मों को ही ईश्वर की सेवा मानता है।
(ख) नारदजी ने विष्णु से क्या सवाल किया और उसके उत्तर में विष्णु ने नारदजी को क्या करने को कहा ?
उत्तर: नारदजी ने विष्णु से सवाल किया कि मृत्युलोक में उनका सबसे पुण्यश्लोक और प्रधान भक्त कौन है। इसके उत्तर में विष्णु ने नारदजी को एक तेल से भरा पात्र लेकर भूमंडल की प्रदक्षिणा करने को कहा और यह ध्यान रखने की शर्त रखी कि पात्र से तेल की एक बूँद भी नीचे न गिरे।
2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए ।
(क) नारदजी ने किससे सवाल किया ?
उत्तर: नारदजी ने भगवान विष्णु से सवाल किया।
(ख) विष्णुजी ने नारद को क्या उत्तर दिया ?
उत्तर: विष्णुजी ने नारद को उत्तर दिया कि मृत्युलोक में एक सज्जन किसान उनका प्रियतम भक्त है।
(ग) नारद ने किसकी परीक्षा लेने की बात कही ?
उत्तर: नारद ने किसान की भक्ति की परीक्षा लेने की बात कही।
(घ) किसान ने कब-कब भगवान का नाम स्मरण किया ?
उत्तर: किसान ने दोपहर में हल जोतकर घर आने पर, शाम को घर आने पर और प्रातःकाल काम पर जाते समय भगवान का नाम स्मरण किया।
(ङ) नारदजी किस बात से चकरा गये ?
उत्तर: नारदजी इस बात से चकरा गए कि ऋषि-मुनि दिन-रात भगवान का नाम जपते हैं, फिर भी भगवान को वह किसान ही याद आया जिसने दिन भर में केवल तीन बार नाम लिया।
(च) तैलपूर्ण पात्र लेकर नारदजी कहाँ गये ?
उत्तर: तैलपूर्ण पात्र लेकर नारदजी भूमंडल की प्रदक्षिणा करने गये।
(छ) विष्णु ने नारदजी को किस बात पर ध्यान देने को कहा ?
उत्तर: विष्णु ने नारदजी को इस बात पर ध्यान देने को कहा कि तेल से भरे पात्र से एक बूँद भी तेल नीचे न गिरे।
(ज) नारदजी को अपने पास बुलाकर विष्णु ने क्या कहा ?
उत्तर: नारदजी को अपने पास बुलाकर विष्णु ने पूछा कि भूमंडल की परिक्रमा करते समय उन्होंने अपने इष्ट का नाम कितनी बार लिया।
(झ) विश्व-पर्यटन के दौरान नारदजी ने कितनी बार विष्णु का नाम लिया था ?
उत्तर: विश्व-पर्यटन के दौरान नारदजी ने विष्णु का नाम एक बार भी नहीं लिया था।
(ञ) शंकित हृदय से नारद ने विष्णु से क्या कहा ?
उत्तर: शंकित हृदय से नारद ने विष्णु से कहा कि काम तुम्हारा ही था, ध्यान उसी में लगा रहा, नाम फिर क्या लेता।
(ट) विष्णु ने किसान को क्यों प्रियतम कहा ?
उत्तर: विष्णु ने किसान को प्रियतम कहा क्योंकि वह अपने सभी उत्तरदायित्वों को निभाते हुए भी ईश्वर का नाम लेता है और कर्मयोगी है।
(ठ) नारदजी ने विष्णु की बात से लज्जित होकर क्या कहा ?
उत्तर: नारदजी ने विष्णु की बात से लज्जित होकर कहा कि 'यह सत्य है'।
3. सही उत्तर चुनिए ।
(क) किसान ने एक दिन में कितनी बार भगवान का नाम-स्मरण किया ?
(i) चार
(ii) तीन
(iii) एक
उत्तर: (ii) तीन
(ख) विश्व-पर्यटन करके नारदजी कहाँ लौटे ?
(i) मर्त्यलोक
(ii) विष्णुलोक
(iii) पाताल लोक
उत्तर: (ii) विष्णुलोक
(ग) योगिराज कौन हैं ?
(i) किसान
(ii) नारद
(iii) विष्णु
उत्तर: (ii) नारद (कविता में नारद को 'योगिराज' कहकर संबोधित किया गया है।)
भाषा - ज्ञान
1. नीचे लिखे शब्दों के समानार्थी शब्द लिखिए ।
2. नीचे लिखे शब्दों के विलोम शब्द लिखिए ।
3. विशेष रूप से ध्यान दीजिए कि हिन्दी में केवल दो लिंग होते हैं । क्लीव लिंग या नपुंसक लिंग होता ही नहीं । इसलिए निम्नलिखित शब्दों में से कौन-सा शब्द पुंलिंग का और कौन-सा शब्द स्त्रीलिंग का है, बताइए ।
4. नारद ने कहा, 'मैं उसकी परीक्षा लूँगा' । इस वाक्य में 'लूँगा' क्रिया है, जिससे भविष्यत काल की सूचना मिलती है । निम्न वाक्यों का काल निर्णय कीजिए ।
(क) किसान शाम को घर लौटा ।
उत्तर: भूतकाल
(ख) कुत्ता भौंक रहा है ।
उत्तर: वर्तमान काल
(ग) मेरे पिताजी कल दिल्ली जाएँगे ।
उत्तर: भविष्यत काल
(घ) यहाँ का दृश्य दर्शक को आकृष्ट करता है ।
उत्तर: वर्तमान काल
(ङ) बुखार के कारण कल मैं स्कूल नहीं आ पाया ।
उत्तर: भूतकाल
5. इन्हें क्या कहते हैं लिखिए ।
(क) जो खेती का काम करता है, वह है किसान ।
उत्तर: किसान
(ख) जो कपड़ा बुनने का काम करता है, वह है जुलाहा ।
उत्तर: जुलाहा
(ग) जो रोगियों का इलाज करता है, वह है डॉक्टर/वैद्य ।
उत्तर: डॉक्टर/वैद्य
(घ) जो हमारे पास चिट्ठियाँ पहुँचाता है, वह है डाकिया ।
उत्तर: डाकिया
गृह कार्य
१. अपने प्रिय दोस्त के बारे में वर्णन कीजिए तथा यह बताइए कि वह क्यों प्रिय है ?
उत्तर: यह एक व्यक्तिगत प्रश्न है जिसका उत्तर प्रत्येक छात्र को अपनी पसंद और अनुभव के आधार पर देना होगा। इसमें छात्र अपने प्रिय मित्र के गुणों, आदतों, व्यवहार और उनके साथ बिताए गए पलों का वर्णन कर सकते हैं, और यह बता सकते हैं कि वे गुण या अनुभव उन्हें क्यों प्रिय लगते हैं।
୪. ବୋର୍ଡ ପରୀକ୍ଷା ମାଷ୍ଟ୍ରି ଟିପ୍ସ ଓ ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ (Board Exam Tips & Pitfalls)
ବୋର୍ଡ ପରୀକ୍ଷା ମାଷ୍ଟ୍ରି ଟିପ୍ସ (Board Exam Mastery Tips):
୧. କବି ପରିଚୟ ଓ ଭାବ-ବୋଧର ଗଭୀର ଅଧ୍ୟୟନ: 'प्रियतम' कविता के कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' के जीवन, साहित्यिक योगदान और कविता के केंद्रीय भाव (कर्मयोग की महत्ता) को अच्छी तरह समझें और याद करें। यह आपको संदर्भ आधारित प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करेगा।
୨. କବିତାର ସାରାଂଶ ଓ ମୁଖ୍ୟ ବିନ୍ଦୁଗୁଡ଼ିକୁ ମନେ ରଖନ୍ତୁ: कविता की कहानी (विष्णु-नारद संवाद, किसान की परीक्षा, नारद की परीक्षा) को क्रमबद्ध तरीके से याद रखें। प्रत्येक पात्र की भूमिका और उनके संवादों को समझें।
୩. ଶବ୍ଦାର୍ଥ ଉପରେ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦିଅନ୍ତୁ: पाठ में दिए गए सभी 'शब्दार्थ' को कंठस्थ करें। इससे कविता का अर्थ समझने और प्रश्नों के सटीक उत्तर लिखने में आसानी होगी।
୪. ପ୍ରଶ୍ନୋତ୍ତର ଅଭ୍ୟାସ: पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों का बार-बार अभ्यास करें। उत्तरों को अपनी भाषा में स्पष्ट और संक्षिप्त रूप से लिखने का प्रयास करें। 'एक या दो वाक्यों में' और 'दो-तीन वाक्यों में' उत्तर देने की शैली का अभ्यास करें।
୫. ବ୍ୟାକରଣ ବିଭାଗ ଉପରେ ଧ୍ୟାନ ଦିଅନ୍ତୁ: 'भाषा ज्ञान' खंड में दिए गए समानार्थी, विलोम शब्द, लिंग निर्णय और काल निर्णय जैसे व्याकरणिक बिंदुओं को अच्छी तरह समझें और उनका अभ्यास करें। ये प्रश्न अक्सर सीधे पूछे जाते हैं और पूरे अंक दिलाते हैं।
୬. ସ୍ୱଚ୍ଛ ଓ ସୁନ୍ଦର ହସ୍ତାକ୍ଷର: परीक्षा में स्वच्छ और पठनीय लिखावट का विशेष महत्व होता है। उत्तरों को साफ-सुथरा लिखें ताकि परीक्षक को पढ़ने में आसानी हो।
୭. ସମୟ ପରିଚାଳନା: परीक्षा के दौरान समय का उचित प्रबंधन करें। प्रत्येक प्रश्न के लिए आवंटित समय का ध्यान रखें ताकि कोई भी प्रश्न छूट न जाए।
ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ (Common Pitfalls):
୧. କବିତାର ମୂଳ ଭାବକୁ ନ ବୁଝିବା: कई छात्र केवल कहानी याद कर लेते हैं, लेकिन कविता का गहरा संदेश (कर्मयोग) नहीं समझ पाते, जिससे विश्लेषणात्मक प्रश्नों के उत्तर गलत हो जाते हैं।
୨. ଶବ୍ଦାର୍ଥରେ ଅସାବଧାନତା: कठिन शब्दों के अर्थ न जानने के कारण कविता का भावार्थ समझने में कठिनाई होती है और प्रश्नोत्तर में भी गलतियाँ होती हैं।
୩. ବ୍ୟାକରଣଗତ ତ୍ରୁଟି: वर्तनी (स्पेलिंग) की गलतियाँ, लिंग, वचन या काल संबंधी अशुद्धियाँ हिंदी में अंक कटा सकती हैं।
୪. ପ୍ରଶ୍ନକୁ ଠିକ୍ ଭାବେ ନ ବୁଝିବା: कभी-कभी छात्र प्रश्न को ठीक से नहीं पढ़ते और गलत उत्तर लिख देते हैं। प्रश्न की मांग को समझना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
୫. ଅଧିକ ଲେଖିବା କିମ୍ବା ବହୁତ କମ୍ ଲେଖିବା: 'दो-तीन वाक्यों में' या 'एक या दो वाक्यों में' जैसे निर्देशों का पालन न करना। अनावश्यक रूप से लंबा उत्तर लिखना या बहुत छोटा उत्तर लिखना, दोनों ही स्थिति में अंक कट सकते हैं।
୬. ଅଭ୍ୟାସର ଅଭାବ: बिना अभ्यास के सीधे परीक्षा में उत्तर लिखने से गति और सटीकता प्रभावित होती है। नियमित अभ्यास से आत्मविश्वास बढ़ता है।
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(ନୋଟ୍ସ ପ୍ରସ୍ତୁତି: ଉତ୍କଳ ସ୍କିଲ୍ ସେଣ୍ଟର - BSE Odisha 100% Full Textbook Master Edition)
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