BSE ODISHA CLASS 9 • UTKAL MASTER STROKE

ବୋର୍ଡ ଅଫ୍ ସେକେଣ୍ଡାରୀ ଏଜୁକେସନ୍ (BSE Odisha) — ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଧ୍ୟାୟ ମାଷ୍ଟର ନୋଟ୍ସ

ଶ୍ରେଣୀ: Class 9 | ବିଷୟ: Hindi

ଅଧ୍ୟାୟ: Class9 HindiLit Ch06 Ch06 Sathi Dukh Se Ghabrata Hai Neeraj


୧. ଅଧ୍ୟାୟର ସାରାଂଶ ଓ ମାଇଣ୍ଡ ମ୍ୟାପ୍ (Mind Map & Conceptual Architecture)


୧.୧ ଅଧ୍ୟାୟର ସାରାଂଶ (Chapter Summary)

प्रस्तुत कविता 'साथी ! दुःख से घबराता है ?' प्रसिद्ध कवि गोपालदास 'नीरज' द्वारा रचित है। इस कविता में कवि ने मानव जीवन में दुःख के महत्व को प्रतिपादित किया है। कवि अपने साथी को दुःख से न घबराने की सलाह देते हैं, क्योंकि दुःख ही वह कसौटी है जो मनुष्य को मजबूत बनाती है और उसे जीवन के सही मार्ग पर अग्रसर करती है। कवि के अनुसार, दुःख से डरना या रोना-चीखना व्यर्थ है, क्योंकि दुःख से लड़ने पर ही वह दूर होता है और उसके बाद सुख अवश्य आता है। दुःख को जीवन का एक अनिवार्य हिस्सा बताया गया है, जो सुख के साथ-साथ चलता है। यह मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारता है, उसे कर्मठ बनाता है और अंततः मुक्ति का मार्ग प्रशस्त करता है। जिस प्रकार जलती हुई ज्वाला में तपकर लोहा लाल और मजबूत बनता है, उसी प्रकार दुःख रूपी संघर्ष मनुष्य को सशक्त और श्रेष्ठ बनाता है। कवि दुःख को एक बुरी चीज़ न मानकर उसे जीवन के उत्कर्ष का साधन मानने का संदेश देते हैं।

୧.୨ ମୁଖ୍ୟ ଉଦ୍ଦେଶ୍ୟ (Core Objectives)

  • छात्रों को दुःख के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायता करना।
  • यह समझाना कि दुःख जीवन का एक अभिन्न अंग है और यह मनुष्य को मजबूत बनाता है।
  • कवि गोपालदास 'नीरज' की काव्य शैली और उनके विचारों से परिचित कराना।
  • जीवन में संघर्षों का सामना करने की प्रेरणा देना।
  • दुःख को मुक्ति का मार्ग समझने की दार्शनिक अवधारणा से अवगत कराना।
  • ୧.୩ ମାଇଣ୍ଡ ମ୍ୟାପ୍ (Conceptual Mind Map)

    ```

    जीवन

    ┌─────┴─────┐

    │ │

    सुख दुःख

    │ │

    │ │

    └─────┬─────┘

    ┌─────┴─────┐

    │ │

    दुःख से न घबराना दुःख का महत्व

    │ │

    │ │

    ┌───────────┴───────────┐

    │ │

    प्रबल परीक्षा का क्षण मुक्ति का बंधन

    │ │

    │ │

    व्यक्तित्व का उत्कर्ष कर्मठता का स्रोत

    │ │

    │ │

    लोहे का जलती ज्वाला में तपकर लाल होना (उदाहरण)

    │ │

    │ │

    └───────────┬───────────┘

    सशक्त एवं श्रेष्ठ मानव

    ```


    ୨. ମୁଖ୍ୟ ବିଷୟବସ୍ତୁ, ସିଦ୍ଧାନ୍ତ ଓ ଗାଣିତିକ ସୂତ୍ରାବଳୀ (Comprehensive Theory & Formulas)


    ୨.୧ କବି ପରିଚୟ (कवि परिचय - Poet Introduction)

    गोपालदास 'नीरज' का जन्म सन् 1926 ई. में उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के पुरावली गाँव में हुआ था। उनका बचपन संघर्षों से भरा रहा, क्योंकि कम उम्र में ही उनके पिता का देहांत हो गया था। उन्होंने अपनी मेहनत और लगन से एम.ए. तक की शिक्षा प्राप्त की और फिर नौकरी भी की। 'नीरज' जी हिंदी साहित्य के एक अत्यंत लोकप्रिय कवि और गीतकार हैं। उनके गीतों में जीवन के सहज अनुभव, प्रेम, दर्शन और संघर्ष का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। उनकी भाषा सरल, सुबोध और हृदयस्पर्शी होती है, जिसके कारण उनके गीत जनमानस में बहुत लोकप्रिय हुए। उनके प्रमुख काव्य-संग्रहों में 'संघर्ष', 'विभावरी', 'नीरज की पाती', 'प्राणगीत', 'दो गीत', 'मुक्तावली', 'दर्द दिया है', 'बादर बरस गयो' आदि शामिल हैं। उन्हें पद्मश्री और पद्मभूषण जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाजा गया है। 'नीरज' जी के गीत आज भी लोगों के दिलों में बसे हुए हैं और उन्हें प्रेरणा देते हैं।

    ୨.୨ ଭାବ-ବୋଧ (भाव-बोध - Essence of the Poem)

    इस कविता का मूल भाव यह है कि दुःख से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उसका सामना करना चाहिए। कवि 'नीरज' कहते हैं कि मानव जीवन में सुख और दुःख दोनों साथ-साथ चलते हैं, और दुःख का पलड़ा अक्सर भारी होता है। लेकिन दुःख से डरने या रोने-चीखने से दुःख दूर नहीं होता, बल्कि उससे लड़ने पर ही विजय प्राप्त होती है। दुःख के बाद सुख अवश्य आता है, क्योंकि कोई भी स्थिति स्थायी नहीं होती।

    कवि दुःख को मुक्ति का बंधन और प्रबल परीक्षा का क्षण मानते हैं। उनका मानना है कि दुःख ही हमें कर्मठ बनाता है और हमारे व्यक्तित्व को निखारता है। जिस प्रकार आग में जलकर लोहा और अधिक लाल और मजबूत हो जाता है, उसी प्रकार दुःख रूपी संघर्षों से गुजरकर मनुष्य का व्यक्तित्व और अधिक उत्कृष्ट बनता है। दुःख जीवन में हलचल पैदा करता है, जो हमें निष्क्रिय नहीं रहने देता। यदि हम दुःख को मन की दुर्बलता न मानकर स्वीकार कर लें, तो वही दुःख सुख में बदल जाता है।

    कवि हमें दुःख को धन्यवाद देने को कहते हैं, क्योंकि दुःख ही हमें सपने देखने और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। एक समय ऐसा भी आता है जब सुख भी साथ नहीं दे पाता, लेकिन दुःख हमेशा हमारे साथ रहता है और हमें कुछ न कुछ सिखाता रहता है। अतः, दुःख को एक बुरी चीज़ न मानकर उसे जीवन के उत्थान का मार्ग मानना चाहिए।

    ୨.୩ କବିତାର ବିସ୍ତୃତ ବିଶ୍ଳେଷଣ (कविता का विस्तृत विश्लेषण - Detailed Analysis of the Poem)

    साथी ! दुःख से घबराता है ?

    दुःख ही कठिन मुक्ति का बंधन,

    दुःख ही प्रबल परीक्षा का क्षण,

    दुःख से हार गया जो मानव, वह क्या मानव कहलाता है ?

  • व्याख्या: कवि अपने मित्र या पाठक को संबोधित करते हुए पूछते हैं कि क्या वह दुःख से घबराता है। वे कहते हैं कि दुःख वास्तव में मुक्ति का एक कठिन बंधन है, अर्थात दुःख ही हमें जीवन की सच्चाइयों से अवगत कराकर मुक्ति की ओर ले जाता है। यह जीवन की सबसे बड़ी और कठिन परीक्षा का क्षण भी है। कवि प्रश्न करते हैं कि जो मनुष्य दुःख से हार मान लेता है, क्या उसे वास्तव में मानव कहा जा सकता है? यहाँ कवि मनुष्य को दुःख का सामना करने और उससे न हारने की प्रेरणा दे रहे हैं।
  • साथी ! दुःख से घबराता है ?

    जीवन के लम्बे पथ पर जब

    सुख दुःख चलते साथ-साथ तब

    सुख पीछे रह जाया करता दुःख ही मंजिल तक जाता है ।

  • व्याख्या: कवि पुनः पूछते हैं कि क्या तुम दुःख से घबराते हो? वे समझाते हैं कि जीवन के इस लंबे सफर में सुख और दुःख दोनों साथ-साथ चलते हैं। अक्सर ऐसा होता है कि सुख तो क्षणिक होता है और पीछे छूट जाता है, लेकिन दुःख ही वह साथी है जो हमें हमारी मंजिल तक ले जाता है। इसका अर्थ है कि दुःख हमें लगातार आगे बढ़ने, संघर्ष करने और अपने लक्ष्य तक पहुँचने के लिए प्रेरित करता रहता है।
  • साथी ! दुःख से घबराता है ?

    दुःख जीवन में करता हलचल,

    वह मन की दुर्बलता केवल,

    दुःख को यदि मान न तू तो दुःख ही फिर सुख बन जाता है ।

  • व्याख्या: कवि कहते हैं कि दुःख जीवन में हलचल पैदा करता है, अर्थात यह हमें निष्क्रिय नहीं रहने देता, बल्कि हमें सक्रिय और कर्मठ बनाता है। यदि हम दुःख को मन की कमज़ोरी मान लेते हैं, तो यह हमारी भूल है। कवि सलाह देते हैं कि यदि हम दुःख को अपनी कमज़ोरी न मानें और उसका डटकर सामना करें, तो वही दुःख अंततः सुख में परिवर्तित हो जाता है। यह दुःख को स्वीकार करने और उससे सीखने की बात पर जोर देता है।
  • साथी ! दुःख से घबराता है ?

    पथ में शूल बिछे तो क्या चल

    पथ में आग जली तो क्या जल

    जलती ज्वाला में जलकर ही लोहा लाल निकल आता है ।

  • व्याख्या: कवि फिर पूछते हैं कि क्या तुम दुःख से घबराते हो? वे कहते हैं कि यदि रास्ते में काँटे बिछे हों तो क्या चलना छोड़ दोगे? यदि रास्ते में आग जल रही हो तो क्या जलना छोड़ दोगे? नहीं! कवि लोहे का उदाहरण देते हुए समझाते हैं कि जिस प्रकार लोहा जलती हुई आग (ज्वाला) में तपकर ही लाल और मजबूत बनता है, उसी प्रकार मनुष्य भी जीवन के कष्टों और संघर्षों में तपकर ही सशक्त और श्रेष्ठ बनता है। यह संघर्षों से न डरने और उन्हें सहने की शक्ति विकसित करने का संदेश है।
  • साथी ! दुःख से घबराता है ?

    धन्यवाद दो उसको जिसने

    दिए तुझे दुःख के तो सपने,

    एक समय है जब सुख ही क्या ! दुःख भी साथ न दे पाता है ।

  • व्याख्या: अंतिम छंद में कवि एक गहरा दार्शनिक विचार प्रस्तुत करते हैं। वे कहते हैं कि हमें उस दुःख को धन्यवाद देना चाहिए जिसने हमें सपने देखने और जीवन में कुछ हासिल करने की प्रेरणा दी। कवि यह भी कहते हैं कि जीवन में एक ऐसा समय भी आता है जब सुख तो दूर की बात है, दुःख भी साथ नहीं दे पाता। यह पंक्ति थोड़ी विरोधाभासी लग सकती है, लेकिन इसका अर्थ यह हो सकता है कि जब व्यक्ति अत्यधिक निराशा या शून्य की स्थिति में होता है, तो उसे दुःख का अनुभव करने की शक्ति भी नहीं रहती, या दुःख इतना गहरा हो जाता है कि वह किसी भी भावना से परे हो जाता है। यह दुःख की चरम अवस्था को दर्शाता है, जहाँ व्यक्ति को स्वयं ही अपने संघर्षों से उबरना होता है। कुल मिलाकर, कवि दुःख को एक शिक्षक और मार्गदर्शक के रूप में देखने का आग्रह करते हैं।
  • ୨.୪ ଶବ୍ଦାର୍ଥ (शब्दार्थ - Word Meanings)

  • मुक्ति - आज़ादी, स्वतंत्रता (Freedom, liberation)
  • प्रबल - बड़ा, भारी, प्रचंड, शक्तिशाली (Strong, intense, powerful)
  • क्षण - घड़ी, पल, वक्त (Moment, instant)
  • मंजिल - लक्ष्य, गंतव्य (Destination, goal)
  • हलचल - हिलने-डोलने की क्रिया या भाव, बेचैनी, उथल-पुथल (Agitation, commotion, stir)
  • दुर्बलता - कमज़ोरी, निर्बलता (Weakness, feebleness)
  • शूल - काँटा (Thorn, prickle)
  • ज्वाला - अग्नि शिखा, लौ, लपट (Flame, blaze)
  • घबराना - डरना, भयभीत होना (To be scared, to panic)
  • कर्मतत्पर - काम करने में लगा हुआ, कर्मशील (Active, diligent, engaged in work)
  • उत्कर्ष - उन्नति, श्रेष्ठता, विकास (Excellence, progress, development)
  • प्रतिपादित - स्थापित, सिद्ध किया हुआ (Established, proven)
  • मार्ग - रास्ता (Path, way)

  • ୩. ପାଠ୍ୟପୁସ୍ତକ ଅଭ୍ୟାସ ପ୍ରଶ୍ନାବଳୀର ୧୦୦% ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସମାଧାନ (100% Complete Solved Exercises)


    ପ୍ରଶ୍ନ ଓ ଅଭ୍ୟାସ (प्रश्न और अभ्यास)

    1. इन प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में दीजिए :

    (क) कवि दुःख से न घबराने को क्यों कहते हैं ?

    ଉତ୍ତର: कवि दुःख से न घबराने को इसलिए कहते हैं क्योंकि दुःख ही मनुष्य को जीवन की कठिन परीक्षाओं में सफल बनाता है और उसे मुक्ति का मार्ग दिखाता है। दुःख से लड़ने पर ही वह दूर होता है और उसके बाद सुख आता है। दुःख मनुष्य के व्यक्तित्व को निखारता है और उसे कर्मठ बनाता है।

    (ख) इस कविता का संदेश क्या है - समझाइए ।

    ଉତ୍ତର: इस कविता का संदेश यह है कि हमें जीवन में आने वाले दुःखों से कभी घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उनका डटकर सामना करना चाहिए। दुःख ही हमें मजबूत बनाता है, हमारे अंदर संघर्ष करने की शक्ति पैदा करता है और हमें अपनी मंजिल तक पहुँचाता है। कवि के अनुसार, दुःख को एक बुरी चीज़ न मानकर उसे जीवन के उत्कर्ष और मुक्ति का साधन समझना चाहिए।

    2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए :

    (क) कवि ने मुक्ति का बंधन किसे माना है ?

    ଉତ୍ତର: कवि ने दुःख को मुक्ति का बंधन माना है।

    (ख) जीवन के लम्बे पथ पर कौन साथ-साथ चलते हैं ?

    ଉତ୍ତର: जीवन के लम्बे पथ पर सुख और दुःख साथ-साथ चलते हैं।

    (ग) जीवन की मंजिल तक कौन जाता है ?

    ଉତ୍ତର: जीवन की मंजिल तक दुःख जाता है।

    (घ) जीवन में हलचल कौन लाता है ?

    ଉତ୍ତର: जीवन में हलचल दुःख लाता है।

    (ङ) जलती ज्वाला में जलकर क्या लाल बन निकलता है ?

    ଉତ୍ତର: जलती ज्वाला में जलकर लोहा लाल बन निकलता है।

    (च) कवि ने किसे धन्यवाद देने को कहा है ?

    ଉତ୍ତର: कवि ने दुःख को धन्यवाद देने को कहा है।

    (छ) दुःख कब सुख बन जाता है ?

    ଉତ୍ତର: दुःख को यदि मन की दुर्बलता न माना जाए, तो दुःख ही सुख बन जाता है।

    3. पंक्तियाँ पूरा कीजिए :

    (क) जीवन के लम्बे पथ पर जब

    सुख दुःख चलते साथ-साथ तब

    (ख) दुःख जीवन में करता हलचल,

    वह मन की दुर्बलता केवल,

    (ग) जलती ज्वाला में जलकर ही लोहा लाल निकल आता है ।

    (घ) एक समय है जब सुख ही क्या ! दुःख भी साथ न दे पाता है ।

    4. सही अर्थ चुनिए :

    (क) प्रबल परीक्षा का क्षण क्या है ?

    (i) सुख

    (ii) दुःख

    (iii) आनंद

    (ख) किसमें जलकर ही लोहा लाल निकल आता है ?

    (i) दुःख में

    (ii) सुख में

    (iii) जलती ज्वाला में

    ଭାଷା - ଜ୍ଞାନ (भाषा - ज्ञान)

    1. विपरीत अर्थवाले शब्द लिखिए :

  • कठिन : सरल
  • बंधन : मुक्ति
  • दुर्बलता : सबलता / शक्ति
  • दुःख : सुख
  • मुक्ति : बंधन
  • हार : जीत
  • 2. इन शब्दों का वाक्यों में प्रयोग कीजिए :

  • परीक्षा: जीवन एक लंबी परीक्षा है।
  • समय: समय का सदुपयोग करना चाहिए।
  • मंजिल: हमें अपनी मंजिल पाने के लिए कड़ी मेहनत करनी चाहिए।
  • बंधन: प्रेम का बंधन सबसे मजबूत होता है।
  • 3. लिंग बताइए :

  • लोहा : पुल्लिंग
  • आग : स्त्रीलिंग
  • हार : स्त्रीलिंग
  • ज्वाला : स्त्रीलिंग
  • पथ : पुल्लिंग
  • दुःख : पुल्लिंग
  • 4. बहुवचन रूप लिखिए :

  • एक : अनेक
  • परीक्षा : परीक्षाएँ
  • सपना : सपने
  • मंजिल : मंजिलें
  • 5. 'जीवन के लम्बे पथ पर जब'... में 'पथ' संज्ञा है और 'लम्बे' विशेषण है जिससे पथ की लम्बाई सूचित हुई है । निम्न वाक्यों में विशेषणों को रेखांकित कीजिए :

    (क) कोयल की आवाज़ सुरीली होती है ।

    (ख) मुझे पाँच रुपये चाहिए ।

    (ग) हमें गरीब जनता की सेवा करनी चाहिए ।

    (घ) रमेश एक मेधावी छात्र है ।

    ଗୃହକାର୍ଯ୍ୟ (गृहकार्य - Homework)

    1. अपने जीवन में आये दुःख के क्षण का वर्णन कीजिए ।

    ଉତ୍ତର: यह एक व्यक्तिगत प्रश्न है। छात्रों को अपने जीवन के किसी ऐसे अनुभव का वर्णन करना चाहिए जब उन्हें दुःख का सामना करना पड़ा हो और उन्होंने उससे कैसे सीखा या उससे कैसे बाहर निकले। उन्हें यह भी बताना चाहिए कि उस दुःख ने उन्हें कैसे मजबूत बनाया।

    2. इस कविता को कंठस्थ कीजिए ।

    ଉତ୍ତର: छात्रों को इस कविता को याद करना चाहिए। इससे उन्हें कवि की भाषा शैली, भाव और संदेश को गहराई से समझने में मदद मिलेगी।


    ୪. ବୋର୍ଡ ପରୀକ୍ଷା ମାଷ୍ଟ୍ରି ଟିପ୍ସ ଓ ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ (Board Exam Tips & Pitfalls)


    ୪.୧ ପରୀକ୍ଷା ପ୍ରସ୍ତୁତି ରଣନୀତି (Exam Preparation Strategies)

  • कविता का गहन अध्ययन: कविता को कम से कम दो-तीन बार ध्यान से पढ़ें। प्रत्येक पंक्ति का अर्थ और कवि का भाव समझने का प्रयास करें।
  • कवि परिचय: कवि गोपालदास 'नीरज' के जीवन और उनकी प्रमुख कृतियों को याद रखें। यह संदर्भ-आधारित प्रश्नों में सहायक होगा।
  • भाव-बोध पर ध्यान: कविता के केंद्रीय संदेश (दुःख से न घबराना, दुःख का महत्व) को अच्छी तरह समझें। यह दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के लिए महत्वपूर्ण है।
  • शब्दार्थ याद करें: सभी कठिन शब्दों के अर्थ याद करें। यह न केवल प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करेगा बल्कि आपकी शब्दावली को भी बढ़ाएगा।
  • पंक्तियों की व्याख्या का अभ्यास: कविता की किसी भी पंक्ति की व्याख्या करने का अभ्यास करें। यह सुनिश्चित करें कि आप कवि के मूल विचार को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर सकें।
  • अभ्यास प्रश्नों का समाधान: पाठ्यपुस्तक के सभी अभ्यास प्रश्नों को ईमानदारी से हल करें। यह आपकी तैयारी का सबसे अच्छा तरीका है।
  • लिखने का अभ्यास: समय सीमा के भीतर उत्तर लिखने का अभ्यास करें। अपनी लिखावट को स्पष्ट और पठनीय रखें।
  • ୪.୨ ୧୦୦/୧୦୦ ସ୍କୋରିଂ ରହସ୍ୟ (100/100 Scoring Secrets)

  • स्पष्ट और सटीक उत्तर: प्रश्नों के उत्तर सीधे और सटीक शब्दों में दें। अनावश्यक विस्तार से बचें।
  • कविता की पंक्तियों का उल्लेख: यदि संभव हो, तो अपने उत्तरों को पुष्ट करने के लिए कविता की प्रासंगिक पंक्तियों का उल्लेख करें। इससे आपके उत्तर अधिक प्रभावशाली बनेंगे।
  • व्याकरण और वर्तनी की शुद्धता: हिंदी व्याकरण और वर्तनी पर विशेष ध्यान दें। गलतियाँ आपके अंक काट सकती हैं।
  • सुंदर प्रस्तुति: उत्तरों को व्यवस्थित तरीके से प्रस्तुत करें। मुख्य बिंदुओं को रेखांकित करें या बुलेट पॉइंट का उपयोग करें।
  • दार्शनिक दृष्टिकोण: कवि के दार्शनिक विचारों को समझने और उन्हें अपने उत्तरों में शामिल करने का प्रयास करें, खासकर 'दुःख को मुक्ति का मार्ग' जैसे बिंदुओं पर।
  • ୪.୩ ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ (Common Student Errors)

  • दुःख को नकारात्मक मानना: कई छात्र दुःख को केवल एक नकारात्मक चीज़ के रूप में देखते हैं और कवि के सकारात्मक दृष्टिकोण को समझने में विफल रहते हैं।
  • शब्दार्थ की अनदेखी: कठिन शब्दों के अर्थ न जानने के कारण कविता के भाव को गलत समझ लेना।
  • रटकर उत्तर देना: केवल रटे-रटाए उत्तर लिखने से बचें। अपनी समझ के अनुसार उत्तरों को अपने शब्दों में व्यक्त करें।
  • व्याकरणिक अशुद्धियाँ: हिंदी भाषा में लिंग, वचन, कारक और वर्तनी की सामान्य गलतियाँ करना।
  • प्रश्न को ठीक से न पढ़ना: प्रश्न की मांग को समझे बिना उत्तर देना, जिससे अप्रासंगिक जानकारी लिखी जाती है।
  • समय प्रबंधन का अभाव: परीक्षा में सभी प्रश्नों को हल करने के लिए पर्याप्त समय न दे पाना।
  • ───────────────────────────────────────────────────────────────────────────────

    (ନୋଟ୍ସ ପ୍ରସ୍ତୁତି: ଉତ୍କଳ ସ୍କିଲ୍ ସେଣ୍ଟର - BSE Odisha 100% Full Textbook Master Edition)

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