BSE ODISHA CLASS 9 • UTKAL MASTER STROKE

ବୋର୍ଡ ଅଫ୍ ସେକେଣ୍ଡାରୀ ଏଜୁକେସନ୍ (BSE Odisha) — ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଅଧ୍ୟାୟ ମାଷ୍ଟର ନୋଟ୍ସ

ଶ୍ରେଣୀ: Class 9 | ବିଷୟ: Hindi

ଅଧ୍ୟାୟ: वैज्ञानिक चेतना के वाहक चंद्रशेखर वेंकट रामन (लेखକ: धीरंजन मालवे)


୧. ଅଧ୍ୟାୟର ସାରାଂଶ ଓ ମାଇଣ୍ଡ ମ୍ୟାପ୍ (Mind Map & Conceptual Architecture)


ଅଧ୍ୟାୟର ସାରାଂଶ (Chapter Summary):

'वैज्ञानिक चेतना के वाहक चंद्रशेखर वेंकट रामन' नामक यह पाठ नोबेल पुरस्कार विजेता प्रथम भारतीय वैज्ञानिक सर चंद्रशेखर वेंकट रामन के जीवन, संघर्ष, वैज्ञानिक खोजों और उनके व्यक्तित्व पर आधारित है। लेखक धीरंजन मालवे ने रामन के बचपन से लेकर उनके महान वैज्ञानिक बनने तक की यात्रा का सजीव चित्रण किया है।

रामन का जन्म 7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था। उनके पिता गणित और भौतिकी के शिक्षक थे, जिन्होंने बचपन से ही रामन में इन विषयों के प्रति रुचि जगाई। रामन ने मात्र 11 साल की उम्र में मैट्रिक और 18 साल की उम्र में भारत सरकार के वित्त विभाग में नौकरी हासिल कर ली थी। उनकी शिक्षा ए.बी.एन. कॉलेज और प्रेसीडेंसी कॉलेज, मद्रास से हुई, जहाँ उन्होंने भौतिकी और अंग्रेजी में स्वर्ण पदक के साथ बी.ए. और प्रथम श्रेणी में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की।

सरकारी नौकरी के दौरान भी उनकी वैज्ञानिक जिज्ञासा शांत नहीं हुई। वे कलकत्ता में 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस' की प्रयोगशाला में शोध कार्य करते रहे, जहाँ उन्होंने वाद्ययंत्रों की ध्वनियों पर गहन अध्ययन किया। यह उनके लिए एक प्रकार का 'आधुनिक हठयोग' था, जहाँ सीमित संसाधनों के बावजूद वे विज्ञान साधना में लीन रहे।

सन् 1917 में, उन्होंने सर आशुतोष मुखर्जी के आग्रह पर सरकारी नौकरी छोड़कर कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर का पद स्वीकार किया। यह उनके लिए एक साहसिक निर्णय था, क्योंकि विश्वविद्यालय की नौकरी में वेतन और सुविधाएँ कम थीं।

सन् 1921 की समुद्री यात्रा के दौरान, रामन के मन में यह सवाल उठा कि समुद्र का रंग नीला क्यों होता है। इसी जिज्ञासा ने उन्हें 'रामन प्रभाव' की खोज की ओर अग्रसर किया। उन्होंने ठोस रवों और तरल पदार्थों पर प्रकाश की किरण के प्रभाव का अध्ययन किया और पाया कि जब एकवर्षीय प्रकाश किसी पदार्थ से गुजरता है, तो उसके वर्ण (रंग) में परिवर्तन आता है। यह परिवर्तन प्रकाश के फोटॉनों के अणुओं से टकराने और ऊर्जा के आदान-प्रदान के कारण होता है। इस खोज ने आइंस्टाइन के प्रकाश के कण स्वरूप (फोटॉन) सिद्धांत को प्रायोगिक प्रमाण दिया और पदार्थों की आणविक तथा परमाणविक संरचना के अध्ययन के लिए 'रामन स्पेक्ट्रोस्कोपी' नामक एक नई तकनीक का विकास किया।

रामन को उनकी इस महान खोज के लिए सन् 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। वे नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक थे। उन्हें 1924 में रॉयल सोसाइटी की सदस्यता, 1929 में 'सर' की उपाधि और 1954 में भारत के सर्वोच्च सम्मान 'भारत-रत्न' से सम्मानित किया गया।

रामन भारतीय संस्कृति से गहरे जुड़े थे। वे कट्टर शाकाहारी थे और मदिरा से परहेज करते थे। उन्होंने अपनी भारतीय पहचान को हमेशा अक्षुण्ण रखा। उन्होंने बंगलौर में 'रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट' की स्थापना की और 'इंडियन जर्नल ऑफ फिजिक्स' नामक शोध पत्रिका भी शुरू की। उन्होंने अनेक शोध छात्रों का मार्गदर्शन किया और 'करेंट साइंस' पत्रिका का संपादन भी किया। 21 नवंबर 1970 को 82 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।

यह पाठ हमें रामन के जीवन से प्रेरणा लेने और अपने आसपास की प्राकृतिक घटनाओं को वैज्ञानिक दृष्टि से देखने का संदेश देता है।

ମାଇଣ୍ଡ ମ୍ୟାପ୍ (Conceptual Mind Map):

  • चंद्रशेखर वेंकट रामन
  • जन्म एवं प्रारंभिक जीवन
  • जन्म: 7 नवंबर 1888, तिरुचिरापल्ली, तमिलनाडु
  • पिता: गणित और भौतिकी के शिक्षक
  • शिक्षा: मैट्रिक (11 वर्ष), इंटरमीडिएट, बी.ए. (स्वर्ण पदक), एम.ए. (प्रथम श्रेणी)
  • प्रारंभिक नौकरी: 18 वर्ष की आयु में वित्त विभाग, कलकत्ता
  • वैज्ञानिक जिज्ञासा एवं प्रारंभिक शोध
  • समुद्र का नीला रंग (1921 समुद्री यात्रा)
  • 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस' प्रयोगशाला
  • वाद्ययंत्रों पर शोध (देशी-विदेशी)
  • 'आधुनिक हठयोग' - सीमित संसाधनों में शोध
  • शैक्षणिक करियर
  • सरकारी नौकरी छोड़कर कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर (1917)
  • सर आशुतोष मुखर्जी का प्रस्ताव
  • रामन प्रभाव (Raman Effect)
  • खोज: 1921 की समुद्री यात्रा से प्रेरित, ठोस रवों और तरल पदार्थों पर प्रकाश का प्रभाव
  • सिद्धांत: प्रकाश के फोटॉनों का अणुओं से टकराना, ऊर्जा का आदान-प्रदान, वर्ण (रंग) में परिवर्तन
  • महत्व: आइंस्टाइन के फोटॉन सिद्धांत का प्रायोगिक प्रमाण, 'रामन स्पेक्ट्रोस्कोपी' का विकास (आणविक/परमाणविक संरचना अध्ययन)
  • पुरस्कार एवं सम्मान
  • रॉयल सोसाइटी सदस्यता (1924)
  • 'सर' की उपाधि (1929)
  • नोबेल पुरस्कार (भौतिकी) (1930) - प्रथम भारतीय वैज्ञानिक
  • अन्य: मेट्यूसी पदक, ह्यूज़ पदक, फ्रैंकलिन पदक, लेनिन पुरस्कार
  • भारत-रत्न (1954) - सर्वोच्च भारतीय सम्मान
  • व्यक्तित्व एवं विरासत
  • भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव, शाकाहारी, मदिरा से परहेज
  • 'रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट' की स्थापना (बंगलौर)
  • 'इंडियन जर्नल ऑफ फिजिक्स' का प्रकाशन
  • शोध छात्रों का मार्गदर्शन, 'करेंट साइंस' का संपादन
  • मृत्यु: 21 नवंबर 1970 (82 वर्ष)
  • संदेश
  • वैज्ञानिक चेतना और दृष्टि का विकास
  • प्राकृतिक घटनाओं की वैज्ञानिक छानबीन

  • ୨. ମୁଖ୍ୟ ବିଷୟବସ୍ତୁ, ସିଦ୍ଧାନ୍ତ ଓ ଗାଣିତିକ ସୂତ୍ରାବଳୀ (Comprehensive Theory & Formulas)


    लेखक परिचय: धीरंजन मालवे

  • जन्म: 9 मार्च 1952 को बिहार के नालंदा जिले के हुँवरावाँ गाँव में।
  • शिक्षा: एम.एस.सी., एम.बी.ए. और एल.एल.बी. जैसी उच्च डिग्रियाँ प्राप्त कीं।
  • कार्यक्षेत्र: आकाशवाणी और दूरदर्शन से जुड़े रहे। उन्होंने वैज्ञानिक जानकारी को लोगों तक पहुँचाने का कार्य किया।
  • लेखन: कई भारतीय वैज्ञानिकों की संक्षिप्त जीवनियाँ लिखीं, जो उनकी पुस्तक 'विश्व-विख्यात भारतीय वैज्ञानिक' में संकलित हैं।
  • भाषा शैली: उनकी भाषा सीधी, सरल और वैज्ञानिक शब्दावली से युक्त है।
  • विचार-बिन्दु (पाठ का केंद्रीय भाव)

  • यह पाठ नोबेल विजेता प्रथम भारतीय वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकट रामन के जीवन संघर्ष, उनकी वैज्ञानिक यात्रा और उपलब्धियों का वर्णन करता है।
  • रामन ने 11 साल की उम्र में मैट्रिक और 18 साल की उम्र में सरकारी नौकरी प्राप्त की।
  • उन्होंने भौतिकी और अंग्रेजी में स्वर्ण पदक के साथ बी.ए. और प्रथम श्रेणी में एम.ए. किया।
  • वे भारत में विज्ञान की उन्नति के प्रबल आकांक्षी थे।
  • भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में उनकी नई खोज के लिए उन्हें 1930 में नोबेल पुरस्कार मिला।
  • यह पाठ एक मेधावी छात्र से महान वैज्ञानिक बनने तक की रामन की संघर्षमय जीवन-यात्रा और उपलब्धियों की जानकारी देता है।
  • चंद्रशेखर वेंकट रामन का जीवन और वैज्ञानिक यात्रा

    ୧. प्रारंभिक जीवन और शिक्षा:

  • जन्म: 7 नवंबर 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली नगर में।
  • पिता: विशाखापत्तनम् में गणित और भौतिकी के शिक्षक थे। उन्होंने बचपन से ही रामन को इन विषयों की शिक्षा दी, जिससे उनकी नींव मजबूत हुई।
  • शिक्षा:
  • 11 साल की उम्र में मैट्रिक पास किया।
  • विशेष योग्यता के साथ इंटरमीडिएट पास किया।
  • भौतिकी और अंग्रेजी में स्वर्ण पदक के साथ बी.ए. की डिग्री।
  • प्रथम श्रेणी में एम.ए. की डिग्री।
  • कॉलेज की पढ़ाई ए.बी.एन. कॉलेज, तिरुचिरापल्ली और प्रेसीडेंसी कॉलेज, मद्रास से की।
  • प्रारंभिक नौकरी: मात्र 18 साल की उम्र में कलकत्ता में भारत सरकार के वित्त-विभाग में नौकरी।
  • ୨. वैज्ञानिक जिज्ञासा और शोध की शुरुआत:

  • रामन का मस्तिष्क बचपन से ही विज्ञान के रहस्यों को सुलझाने के लिए बेचैन रहता था।
  • कॉलेज के ज़माने से ही शोधकार्यों में दिलचस्पी लेना शुरू कर दिया था। उनका पहला शोधपत्र 'फिलॉसॉफिकल मैगज़ीन' में प्रकाशित हुआ था।
  • सरकारी नौकरी के दौरान भी वे दफ्तर से फुर्सत पाकर 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस' की प्रयोगशाला में शोध करते थे।
  • यह प्रयोगशाला कलकत्ता के डॉक्टर महेंद्रलाल सरकार ने देश में वैज्ञानिक चेतना के विकास के उद्देश्य से स्थापित की थी, हालाँकि यहाँ साधनों का अभाव था।
  • रामन यहाँ कामचलाऊ उपकरणों का इस्तेमाल कर शोध करते थे, जिसे लेखक ने 'आधुनिक हठयोग' कहा है।
  • उन्होंने वाद्ययंत्रों (वायलिन, चैलो, पियानो, वीणा, तानपूरा, मृदंगम्) की ध्वनियों के पीछे छिपे वैज्ञानिक रहस्यों का अध्ययन किया। उन्होंने पश्चिमी देशों की इस भ्रांति को तोड़ा कि भारतीय वाद्ययंत्र घटिया होते हैं। उन्होंने वाद्ययंत्रों के कंपन के गणित पर भी शोध किया।
  • ୩. सरकारी नौकरी छोड़कर अकादमिक क्षेत्र में प्रवेश:

  • उस समय के प्रसिद्ध शिक्षाशास्त्री सर आशुतोष मुखर्जी को रामन की प्रतिभा के बारे में पता चला।
  • मुखर्जी महोदय ने रामन को कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर का पद स्वीकार करने का प्रस्ताव दिया।
  • रामन के लिए यह एक कठिन निर्णय था, क्योंकि सरकारी नौकरी में मोटी तनख्वाह और सुविधाएँ थीं, जबकि विश्वविद्यालय की नौकरी में वेतन और सुविधाएँ कम थीं।
  • रामन ने सरस्वती की साधना को सरकारी सुख-सुविधाओं से अधिक महत्वपूर्ण माना और सन् 1917 में कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर के रूप में कार्यभार संभाला।
  • ୪. रामन प्रभाव (Raman Effect) की खोज:

  • सन् 1921 में एक समुद्री यात्रा के दौरान, रामन ने समुद्र के नीले रंग को देखकर यह सवाल किया कि 'आखिर समुद्र का रंग नीला ही क्यों होता है? कुछ और क्यों नहीं?'
  • इस जिज्ञासा ने उन्हें इस दिशा में प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया।
  • उन्होंने अनेक ठोस रवों (क्रिस्टल) और तरल पदार्थों पर प्रकाश की किरण के प्रभाव का अध्ययन किया।
  • खोज: उन्होंने पाया कि जब एकवर्षीय प्रकाश की किरण किसी तरल या ठोस रवेदार पदार्थ से गुजरती है, तो गुजरने के बाद उसके वर्ण (रंग) में परिवर्तन आता है।
  • कारण: यह इसलिए होता है क्योंकि प्रकाश के फोटॉन जब पदार्थ के अणुओं से टकराते हैं, तो इस टकराव के परिणामस्वरूप वे या तो ऊर्जा का कुछ अंश खो देते हैं या पा जाते हैं। ऊर्जा में यह परिवर्तन प्रकाश के वर्ण (रंग) में बदलाव लाता है।
  • ऊर्जा और रंग: एकवर्षीय प्रकाश की किरणों में सबसे अधिक ऊर्जा बैंगनी रंग के प्रकाश में होती है। इसके बाद क्रमशः नीले, आसमानी, हरे, पीले, नारंगी और लाल वर्ण का नंबर आता है। लाल-वर्णीय प्रकाश की ऊर्जा सबसे कम होती है। जिस परिमाण में ऊर्जा खोती या पाती है, उसी हिसाब से उसका वर्ण परिवर्तित हो जाता है।
  • ୫. रामन प्रभाव का महत्व:

  • यह खोज भौतिकी के क्षेत्र में एक क्रांति के समान थी।
  • आइंस्टाइन के विचारों का प्रायोगिक प्रमाण: इसने प्रकाश की प्रकृति के बारे में आइंस्टाइन के विचारों को प्रायोगिक प्रमाण दिया। आइंस्टाइन ने बताया था कि प्रकाश अति सूक्ष्म कणों (फोटॉन) की तीव्र धारा के समान है। रामन के प्रयोगों ने सिद्ध किया कि प्रकाश किरण तीव्रगामी सूक्ष्म कणों के प्रवाह के रूप में व्यवहार करती है।
  • रामन स्पेक्ट्रोस्कोपी: इस खोज की वजह से पदार्थों के अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना का अध्ययन सहज हो गया। पहले इसके लिए इंफ्रा रेड स्पेक्ट्रोस्कोपी का सहारा लिया जाता था, जो मुश्किल और त्रुटिपूर्ण थी। रामन स्पेक्ट्रोस्कोपी ने इस प्रक्रिया को सरल और सटीक बना दिया।
  • अनुप्रयोग: पदार्थों के संश्लेषण और अनेक उपयोगी पदार्थों के कृत्रिम निर्माण में यह जानकारी सहायक सिद्ध हुई।
  • ୬. पुरस्कार और सम्मान:

  • रामन प्रभाव की खोज ने रामन को विश्व के चोटी के वैज्ञानिकों की पंक्ति में ला खड़ा किया।
  • 1924: रॉयल सोसाइटी की सदस्यता।
  • 1929: 'सर' की उपाधि।
  • 1930: भौतिकी में नोबेल पुरस्कार (विश्व का सर्वोच्च पुरस्कार)। वे नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक थे।
  • अन्य पुरस्कार: रोम का मेट्यूसी पदक, रॉयल सोसाइटी का ह्यूज़ पदक, फिलाडेल्फिया इंस्टीट्यूट का फ्रैंकलिन पदक, सोवियत रूस का अंतर्राष्ट्रीय लेनिन पुरस्कार।
  • 1954: देश का सर्वोच्च सम्मान 'भारत-रत्न'।
  • ये सम्मान उस दौर में मिले जब भारत अंग्रेजों का गुलाम था, जिससे भारत को एक नया आत्म-सम्मान और आत्म-विश्वास मिला।
  • ୭. रामन का व्यक्तित्व और विरासत:

  • भारतीय संस्कृति से लगाव: उन्हें भारतीय संस्कृति से गहरा लगाव था। उन्होंने अपनी भारतीय पहचान को हमेशा अक्षुण्ण रखा। अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि के बाद भी उन्होंने अपने दक्षिण भारतीय पहनावे को नहीं छोड़ा।
  • जीवन शैली: वे कट्टर शाकाहारी थे और मदिरा से सख्त परहेज रखते थे। नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने स्टॉकहोम जाने पर उन्होंने शराब पीने से इनकार कर दिया था।
  • वैज्ञानिक चेतना का विकास: वे देश में वैज्ञानिक दृष्टि और चिंतन के विकास के प्रति समर्पित थे।
  • संस्थानों की स्थापना: उन्होंने बंगलौर में एक अत्यंत उन्नत प्रयोगशाला और शोध-संस्थान 'रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट' की स्थापना की।
  • प्रकाशन: भौतिक शास्त्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 'इंडियन जर्नल ऑफ फिजिक्स' नामक शोध-पत्रिका प्रारंभ की। वे 'करेंट साइंस' नामक पत्रिका का संपादन भी करते थे।
  • मार्गदर्शन: उन्होंने अपने जीवन-काल में सैकड़ों शोध-छात्रों का मार्गदर्शन किया, जिनमें से कई बाद में उच्च पदों पर प्रतिष्ठित हुए।
  • मृत्यु: 21 नवंबर 1970 को 82 वर्ष की आयु में।
  • पाठ का संदेश:

    रामन वैज्ञानिक चेतना और दृष्टि की साक्षात् प्रतिमूर्ति थे। उन्होंने हमें यह संदेश दिया कि हमें अपने आसपास घट रही विभिन्न प्राकृतिक घटनाओं की छानबीन एक वैज्ञानिक दृष्टि से करनी चाहिए। उन्होंने संगीत के सुर-ताल और प्रकाश की किरणों की आभा के अंदर से वैज्ञानिक सिद्धांत खोज निकाले। प्रकृति में बिखरे वैज्ञानिक रहस्यों को भेदने की आवश्यकता है।

    शब्दार्थ (Glossary):

  • आभा - चमक, कांति (Glow, radiance)
  • जिज्ञासा - जानने की इच्छा (Curiosity)
  • नींव - आधार (Foundation)
  • दिलचस्पी - आग्रह, रुचि (Interest)
  • दिली इच्छा - मन या हृदय की कामना (Heartfelt desire)
  • तैनाती - नियुक्ति (Posting, appointment)
  • विश्वविख्यात - संसार में प्रसिद्ध (World-renowned)
  • निहारना - देखना (To gaze at)
  • असंख्य - अनगिनत (Countless)
  • रुझान - झुकाव (Inclination)
  • इस्तेमाल - व्यवहार (Use)
  • भौतिकी - पदार्थ विज्ञान, वह विज्ञान जिसमें तत्वों के गुण आदि का विवेचन किया गया हो (Physics)
  • शोध - खोज (Research)
  • अनुसंधान - शोध (Research)
  • तनख्वाह - वेतन (Salary)
  • माहौल - वातावरण (Environment)
  • ठोस रवों - बिल्लौर, मणिभ (Crystals)
  • फोटॉन - प्रकाश का अंश (Photon, particle of light)
  • एकवर्षीय - एक रंग का (Monochromatic, single-colored)
  • ऊर्जा - शक्ति, बल (Energy, power)
  • क्रांति - आंदोलन, उलटफेर (Revolution, upheaval)
  • संरचना - गठन रीति (Structure, formation)
  • आणविक - अणु संबंधित (Molecular)
  • परमाणविक - परमाणु से संबंधित (Atomic)
  • अक्षुण्ण - अखंडित (Intact, unbroken)
  • आह्लादित - आनंदित (Delighted, joyful)
  • इंफ्रा रेड स्पेक्ट्रोस्कोपी - अवरक्त स्पेक्ट्रम विज्ञान (Infrared Spectroscopy)
  • संश्लेषण - मिलान करना (Synthesis)
  • कट्टर - दृढ़ (Staunch, strict)
  • नोबेल पुरस्कार - एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर का सर्वोच्च पुरस्कार जो साहित्य, भौतिक विज्ञान, रसायन विज्ञान, चिकित्सा विज्ञान, अर्थशास्त्र तथा शांति के क्षेत्र में अभूतपूर्व कार्य के लिए दिया जाता है। जन्मदाता अल्फ्रेड नोबेल (1833 ई.), डायनामाइट का आविष्कार (1866 ई.)। सर्वप्रथम 1901 ई. में दिया गया।

  • ୩. ପାଠ୍ୟପୁସ୍ତକ ଅଭ୍ୟାସ ପ୍ରଶ୍ନାବଳୀର ୧୦୦% ସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ସମାଧାନ (100% Complete Solved Exercises)


    प्रश्न और अभ्यास

    1. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दो-तीन वाक्यों में दीजिए :

    (क) रामन के प्रारंभिक शोध-कार्य को आधुनिक हठयोग क्यों कहा गया है ?

    उत्तर: रामन भारत सरकार के वित्त-विभाग में एक उच्च पद पर कार्यरत थे, जहाँ उन्हें अच्छी तनख्वाह और सुविधाएँ मिलती थीं। इसके बावजूद, वे दफ्तर से फुर्सत पाते ही 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस' की प्रयोगशाला में शोध कार्य करने पहुँच जाते थे। यह प्रयोगशाला सीमित संसाधनों वाली थी, जहाँ उन्हें कामचलाऊ उपकरणों का इस्तेमाल करना पड़ता था। अपनी इच्छाशक्ति और लगन के बल पर ऐसी मामूली प्रयोगशाला में भौतिक विज्ञान को समृद्ध बनाने के उनके प्रयासों को ही आधुनिक हठयोग कहा गया है।

    (ख) रामन-प्रभाव का परिणाम कैसा रहा ?

    उत्तर: रामन-प्रभाव की खोज भौतिकी के क्षेत्र में एक क्रांति के समान थी। इसका पहला परिणाम यह हुआ कि प्रकाश की प्रकृति के बारे में आइंस्टाइन के विचारों (प्रकाश कणों या फोटॉनों से बना है) को प्रायोगिक प्रमाण मिल गया। दूसरा महत्वपूर्ण परिणाम यह था कि इस खोज की वजह से पदार्थों के अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना का अध्ययन 'रामन स्पेक्ट्रोस्कोपी' नामक एक नई और आसान तकनीक से संभव हो गया, जिसने इंफ्रा रेड स्पेक्ट्रोस्कोपी की मुश्किल तकनीक को प्रतिस्थापित कर दिया।

    (ग) भारतीय संस्कृति से रामन का लगाव कैसा था ?

    उत्तर: रामन को भारतीय संस्कृति से हमेशा ही गहरा लगाव रहा। उन्होंने अपनी भारतीय पहचान को कभी नहीं छोड़ा और उसे हमेशा अक्षुण्ण रखा। अंतर्राष्ट्रीय प्रसिद्धि प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने अपने दक्षिण भारतीय पहनावे को नहीं त्यागा। वे कट्टर शाकाहारी थे और मदिरा से सख्त परहेज रखते थे। नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने स्टॉकहोम जाने पर भी उन्होंने शराब पीने से इनकार कर दिया था, जो भारतीय संस्कृति के प्रति उनके दृढ़ लगाव को दर्शाता है।

    (घ) देश में वैज्ञानिक दृष्टि और चिंतन के विकास के लिए रामन ने क्या योगदान दिया ?

    उत्तर: रामन केवल एक वैज्ञानिक ही नहीं थे, बल्कि उनके अंदर एक राष्ट्रीय चेतना भी थी। उन्होंने देश में वैज्ञानिक दृष्टि और चिंतन के विकास के लिए महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने बंगलौर में 'रामन रिसर्च इंस्टीट्यूट' नामक एक उन्नत प्रयोगशाला और शोध-संस्थान की स्थापना की। उन्होंने भौतिक शास्त्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 'इंडियन जर्नल ऑफ फिजिक्स' नामक शोध-पत्रिका प्रारंभ की और 'करेंट साइंस' नामक पत्रिका का संपादन भी किया। उन्होंने सैकड़ों शोध-छात्रों का मार्गदर्शन किया, जिससे देश में विज्ञान के क्षेत्र में नई पीढ़ी तैयार हुई।

    (ङ) रामन को क्या-क्या पुरस्कार और सम्मान प्राप्त हुए ?

    उत्तर: रामन को उनकी वैज्ञानिक उपलब्धियों के लिए अनेक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार तथा सम्मान प्राप्त हुए। उन्हें सन् 1924 में रॉयल सोसाइटी की सदस्यता से सम्मानित किया गया, सन् 1929 में 'सर' की उपाधि प्रदान की गई और सन् 1930 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। इसके अतिरिक्त, उन्हें रोम का मेट्यूसी पदक, रॉयल सोसाइटी का ह्यूज़ पदक, फिलाडेल्फिया इंस्टीट्यूट का फ्रैंकलिन पदक और सोवियत रूस का अंतर्राष्ट्रीय लेनिन पुरस्कार भी प्राप्त हुए। सन् 1954 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत-रत्न' से सम्मानित किया गया।

    2. निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर एक या दो वाक्यों में दीजिए :

    (क) पेड़ से सेब गिरने के पीछे छिपे रहस्य को सबसे पहले कौन समझ पाया ?

    उत्तर: पेड़ से सेब गिरने के पीछे छिपे रहस्य को सबसे पहले आइज़ैक न्यूटन समझ पाए थे।

    (ख) रामन का जन्म कब हुआ था ?

    उत्तर: रामन का जन्म 7 नवंबर सन् 1888 को हुआ था।

    (ग) रामन के पिता किस विषय के शिक्षक थे ?

    उत्तर: रामन के पिता गणित और भौतिकी विषय के शिक्षक थे।

    (घ) रामन का पहला शोधपत्र किस में प्रकाशित हुआ ?

    उत्तर: रामन का पहला शोधपत्र 'फिलॉसॉफिकल मैगज़ीन' में प्रकाशित हुआ था।

    (ङ) रामन को भारत-सरकार के किस विभाग में नौकरी मिली ?

    उत्तर: रामन को भारत-सरकार के वित्त-विभाग में नौकरी मिली थी।

    (च) डॉक्टर महेन्द्रलाल सरकार ने कौन-सी संस्था खड़ी की थी ?

    उत्तर: डॉक्टर महेन्द्रलाल सरकार ने 'इंडियन एसोसिएशन फॉर द कल्टीवेशन ऑफ साइंस' नामक संस्था खड़ी की थी।

    (छ) रामन ने कब सरकारी नौकरी छोड़ दी ?

    उत्तर: रामन ने सन् 1917 में सरकारी नौकरी छोड़ दी थी।

    (ज) समुद्र-यात्रा पर रामन कब निकले ?

    उत्तर: समुद्र-यात्रा पर रामन सन् 1921 में निकले थे।

    (झ) रामन को कब 'सर' की उपाधि मिली ?

    उत्तर: रामन को सन् 1929 में 'सर' की उपाधि मिली थी।

    (ञ) सन् 1954 ई. में रामन को किस सम्मान से सम्मानित किया गया ?

    उत्तर: सन् 1954 ई. में रामन को देश के सर्वोच्च सम्मान 'भारत-रत्न' से सम्मानित किया गया था।

    (ट) रामन की खोज ने किसे सहज बनाया ?

    उत्तर: रामन की खोज ने पदार्थों के अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना के अध्ययन को सहज बनाया।

    (ठ) रामन ने 'रामन इंस्टीच्यूट' की स्थापना क्यों की ?

    उत्तर: रामन ने देश में वैज्ञानिक दृष्टि और चिंतन के विकास तथा भौतिक शास्त्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए 'रामन इंस्टीच्यूट' की स्थापना की।

    3. कोष्ठक से सही उत्तर चुनकर रिक्त स्थान भरिए :

    (क) एकवर्षीय प्रकाश की किरणों में सब से अधिक ऊर्जा बैंजनी रंग के प्रकाश में होती है ।

    (नीले, बैंजनी, नारंगी, आसमानी)

    (ख) रामन की खोज भौतिक विज्ञान के क्षेत्र में एक क्रांति के समान थी ।

    (गणित, रसायन शास्त्र, जीव विज्ञान, भौतिक विज्ञान)

    (ग) रामन को सन् 1924 में रॉयल सोसाइटी की सदस्यता से सम्मानित किया गया था ।

    (1921, 1929, 1924, 1954)

    (घ) रामन नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीय वैज्ञानिक थे ।

    (दूसरे, तीसरे, पहले, चौथे)

    (ङ) रामन की मृत्यु 82 वर्ष की आयु में हुई ।

    (85, 82, 83, 84)

    भाषा - ज्ञान

    4. विज्ञान + इक = वैज्ञानिक

    यहाँ 'विज्ञान' शब्द में 'इक' प्रत्यय जुड़कर नया शब्द 'वैज्ञानिक' बना है । इसी प्रकार 'इक' प्रत्यय जोड़कर पाँच शब्द बनाइए ।

    उत्तर:

    1. समाज + इक = सामाजिक

    2. इतिहास + इक = ऐतिहासिक

    3. अर्थ + इक = आर्थिक

    4. धर्म + इक = धार्मिक

    5. शरीर + इक = शारीरिक

    5. निम्नलिखित वाक्यों के रेखांकित शब्दों को स्पष्ट कीजिए : (संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया आदि)

    (क) वे समुद्र की नीली आभा में घंटों खोए रहते ।

    उत्तर:

  • वे: सर्वनाम (पुरुषवाचक सर्वनाम)
  • नीली: विशेषण (गुणवाचक विशेषण)
  • घंटों: क्रियाविशेषण (कालवाचक क्रियाविशेषण)
  • खोए रहते: क्रिया (संयुक्त क्रिया)
  • (ख) इस संस्था का उद्देश्य था देश में वैज्ञानिक चेतना का विकास करना ।

    उत्तर:

  • इस: विशेषण (सार्वनामिक विशेषण)
  • वैज्ञानिक: विशेषण (गुणवाचक विशेषण)
  • विकास करना: क्रिया (संयुक्त क्रिया)
  • (ग) प्रतिभावान छात्र, सरकारी नौकरी की ओर आकर्षित होते थे ।

    उत्तर:

  • प्रतिभावान: विशेषण (गुणवाचक विशेषण)
  • सरकारी: विशेषण (गुणवाचक विशेषण)
  • आकर्षित होते थे: क्रिया (संयुक्त क्रिया)
  • (घ) हमारे आसपास ऐसी न जाने कितनी ही चीजें बिखरी पड़ी हैं ।

    उत्तर:

  • हमारे: सर्वनाम (उत्तम पुरुष बहुवचन संबंध कारक)
  • कितनी: विशेषण (अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण)
  • बिखरी पड़ी हैं: क्रिया (संयुक्त क्रिया)
  • 6. सही विराम चिह्नों का प्रयोग कीजिए :

    (क) वे अपना पूरा समय अध्ययन अध्यापन और शोध में बिताने लगे

    उत्तर: वे अपना पूरा समय अध्ययन, अध्यापन और शोध में बिताने लगे।

    (ख) आखिर समुद्र का रंग नीला ही क्यों होता है

    उत्तर: आखिर समुद्र का रंग नीला ही क्यों होता है?

    (ग) बैंजनी के बाद क्रमशः नीले आसमानी हरे पीले नारंगी और लाल वर्ण का नंबर आता है

    उत्तर: बैंजनी के बाद क्रमशः नीले, आसमानी, हरे, पीले, नारंगी और लाल वर्ण का नंबर आता है।

    7. रिक्त स्थानों में सही परसर्ग भरिए :

    (क) भारतीय संस्कृति से रामन को हमेशा ही गहरा लगाव रहा ।

    (ख) रामन वैज्ञानिक चेतना और दृष्टि की साक्षात् प्रतिमूर्त्ति थे ।

    (ग) रामन की खोज भौतिकी के क्षेत्र में एक क्रांति के समान थी ।

    गृह कार्य :

    (क) नोबेल पुरस्कार पानेवाले भारतीयों के बारे में जानकारी हासिल कीजिए ।

    उत्तर: नोबेल पुरस्कार पाने वाले कुछ प्रमुख भारतीय हैं:

  • रवींद्रनाथ टैगोर (साहित्य, 1913)
  • चंद्रशेखर वेंकट रामन (भौतिकी, 1930)
  • मदर टेरेसा (शांति, 1979)
  • अमर्त्य सेन (अर्थशास्त्र, 1998)
  • कैलाश सत्यार्थी (शांति, 2014)
  • हरगोविंद खुराना (चिकित्सा, 1968)
  • सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर (भौतिकी, 1983)
  • वेंकटरामन रामकृष्णन (रसायन विज्ञान, 2009)
  • अभिजीत बनर्जी (अर्थशास्त्र, 2019)
  • (ख) आइजाक न्यूटन की उपलब्धि के बारे में पता लगाइए ।

    उत्तर: सर आइज़ैक न्यूटन (1642-1727) एक महान अंग्रेज वैज्ञानिक और गणितज्ञ थे। उनकी प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं:

  • गुरुत्वाकर्षण का नियम: उन्होंने सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण का नियम प्रतिपादित किया, जिसके अनुसार ब्रह्मांड में प्रत्येक कण दूसरे कण को आकर्षित करता है।
  • गति के नियम: उन्होंने गति के तीन नियम दिए, जो शास्त्रीय यांत्रिकी के आधार हैं।
  • प्रकाशिकी: उन्होंने बताया कि श्वेत प्रकाश सात रंगों से मिलकर बना होता है और प्रकाश के परावर्तन तथा अपवर्तन के सिद्धांतों पर काम किया।
  • कैलकुलस का विकास: उन्होंने स्वतंत्र रूप से डिफरेंशियल और इंटीग्रल कैलकुलस का विकास किया।
  • परावर्तक दूरबीन का आविष्कार: उन्होंने पहली व्यावहारिक परावर्तक दूरबीन का निर्माण किया।

  • ୪. ବୋର୍ଡ ପରୀକ୍ଷା ମାଷ୍ଟ୍ରି ଟିପ୍ସ ଓ ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ (Board Exam Tips & Pitfalls)


    ବୋର୍ଡ ପରୀକ୍ଷା ମାଷ୍ଟ୍ରି ଟିପ୍ସ (Board Exam Mastery Tips):

    1. ପାଠ୍ୟପୁସ୍ତକର ଗଭୀର ଅଧ୍ୟୟନ (Deep Study of Textbook): ପ୍ରତ୍ୟେକ ବାକ୍ୟକୁ ଧ୍ୟାନର ସହ ପଢ଼ନ୍ତୁ। ବିଶେଷ କରି ଲେଖକ ପରିଚୟ, ଶବ୍ଦାର୍ଥ ଏବଂ ମୁଖ୍ୟ ବିଷୟବସ୍ତୁ ଉପରେ ଗୁରୁତ୍ୱ ଦିଅନ୍ତୁ।

    2. ମୁଖ୍ୟ ତଥ୍ୟ ଓ ତାରିଖ ମନେରଖନ୍ତୁ (Memorize Key Facts and Dates): ଚନ୍ଦ୍ରଶେଖର ଭେଙ୍କଟ ରାମନଙ୍କ ଜନ୍ମ ତାରିଖ, ନୋବେଲ ପୁରସ୍କାର ମିଳିବା ବର୍ଷ, 'ସର' ଉପାଧି, ଭାରତ-ରତ୍ନ ସମ୍ମାନ, ରାମନ ଇନଷ୍ଟିଚ୍ୟୁଟ୍ ପ୍ରତିଷ୍ଠା ବର୍ଷ ଇତ୍ୟାଦି ମନେରଖିବା ଜରୁରୀ।

    3. ଶବ୍ଦାର୍ଥ ଓ ବ୍ୟାକରଣ ଉପରେ ଧ୍ୟାନ ଦିଅନ୍ତୁ (Focus on Vocabulary and Grammar): ପାଠରେ ଥିବା ସମସ୍ତ ଶବ୍ଦାର୍ଥକୁ ଭଲ ଭାବରେ ବୁଝନ୍ତୁ ଓ ମନେରଖନ୍ତୁ। ବ୍ୟାକରଣ ଅଭ୍ୟାସ (ଯଥା: ପ୍ରତ୍ୟୟ, ବିରାମ ଚିହ୍ନ, ପରସର୍ଗ, ଶବ୍ଦଭେଦ) ଉପରେ ବିଶେଷ ଧ୍ୟାନ ଦିଅନ୍ତୁ।

    4. ପ୍ରଶ୍ନୋତ୍ତର ଅଭ୍ୟାସ (Practice Q&A): ଅନୁଶୀଳନୀର ସମସ୍ତ ପ୍ରଶ୍ନର ଉତ୍ତର ଲେଖି ଅଭ୍ୟାସ କରନ୍ତୁ। ଉତ୍ତରଗୁଡ଼ିକ ସଠିକ୍, ସ୍ପଷ୍ଟ ଏବଂ ସୀମିତ ଶବ୍ଦରେ ଲେଖିବା ଶିଖନ୍ତୁ।

    5. ବିଷୟବସ୍ତୁର ଗଭୀରତା (Depth of Content): ରାମନ ପ୍ରଭାବ କ'ଣ, ଏହାର ବୈଜ୍ଞାନିକ ମହତ୍ତ୍ୱ କ'ଣ, ଏହା କିପରି ଆଇନଷ୍ଟାଇନଙ୍କ ତତ୍ତ୍ୱକୁ ପ୍ରମାଣିତ କଲା ଏବଂ ଏହାର ପ୍ରୟୋଗ କ'ଣ, ଏସବୁକୁ ଭଲ ଭାବରେ ବୁଝନ୍ତୁ।

    6. ଲେଖକଙ୍କ ବାର୍ତ୍ତା (Author's Message): ପାଠର ମୂଳ ବାର୍ତ୍ତା (ବୈଜ୍ଞାନିକ ଚେତନା ଓ ଦୃଷ୍ଟିର ବିକାଶ) କୁ ବୁଝିବାକୁ ଚେଷ୍ଟା କରନ୍ତୁ। ଏହା ଉପରେ ଆଧାରିତ ପ୍ରଶ୍ନ ଆସିପାରେ।

    7. ସମୟ ପରିଚାଳନା (Time Management): ପରୀକ୍ଷାରେ ସମୟ ଅନୁଯାୟୀ ଉତ୍ତର ଲେଖିବା ଅଭ୍ୟାସ କରନ୍ତୁ।

    ସାଧାରଣ ଭୁଲ୍ (Common Pitfalls):

    1. ତଥ୍ୟଗତ ତ୍ରୁଟି (Factual Errors): ରାମନଙ୍କ ଜନ୍ମ ତାରିଖ, ନୋବେଲ ପୁରସ୍କାର ବର୍ଷ, 'ସର' ଉପାଧି ବର୍ଷ ଇତ୍ୟାଦି ମନେରଖିବାରେ ଭୁଲ୍ କରିବା।

    2. ଶବ୍ଦାର୍ଥ ଓ ବ୍ୟାକରଣଗତ ତ୍ରୁଟି (Vocabulary and Grammatical Errors): ହିନ୍ଦୀ ଶବ୍ଦର ଅର୍ଥ ନ ବୁଝିବା କିମ୍ବା ବ୍ୟାକରଣଗତ ଭୁଲ୍ କରିବା (ଯଥା: ଲିଙ୍ଗ, ବଚନ, କାରକ)।

    3. ଅସମ୍ପୂର୍ଣ୍ଣ ଉତ୍ତର (Incomplete Answers): ପ୍ରଶ୍ନର ସମସ୍ତ ଅଂଶକୁ ଉତ୍ତର ନ ଦେବା କିମ୍ବା ଅଧା ଉତ୍ତର ଲେଖିବା।

    4. ଅସ୍ପଷ୍ଟ ଉତ୍ତର (Vague Answers): ଉତ୍ତର ସ୍ପଷ୍ଟ ନ ହେବା କିମ୍ବା ପ୍ରଶ୍ନର ମୂଳ ବିଷୟବସ୍ତୁରୁ ବିଚ୍ୟୁତ ହେବା।

    5. ରାମନ ପ୍ରଭାବର ବୈଜ୍ଞାନିକ ବ୍ୟାଖ୍ୟା ନ ବୁଝିବା (Not Understanding Scientific Explanation of Raman Effect): ରାମନ ପ୍ରଭାବର ମୂଳ ସିଦ୍ଧାନ୍ତକୁ ଠିକ୍ ଭାବରେ ବୁଝି ନ ପାରିବା।

    6. ଅଭ୍ୟାସର ଅଭାବ (Lack of Practice): ଲେଖି ଅଭ୍ୟାସ ନ କରିବା ଦ୍ୱାରା ପରୀକ୍ଷାରେ ସମୟ ଅଭାବ ହୋଇପାରେ କିମ୍ବା ଉତ୍ତର ଲେଖିବାରେ ଧୀରତା ଆସିପାରେ।

    7. ବିରାମ ଚିହ୍ନର ଭୁଲ୍ ପ୍ରୟୋଗ (Incorrect Use of Punctuation): ବିରାମ ଚିହ୍ନର ସଠିକ୍ ବ୍ୟବହାର ନ ଜାଣିବା।

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    (ନୋଟ୍ସ ପ୍ରସ୍ତୁତି: ଉତ୍କଳ ସ୍କିଲ୍ ସେଣ୍ଟର - BSE Odisha 100% Full Textbook Master Edition)

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